chandravilla

विश्व गुरु बने मेरा भारत

307 Posts

13097 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2711 postid : 22

कैसे बदले गुरु शिष्यों की सोच

Posted On: 5 Sep, 2010 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

शिक्षक दिवस प्रतिवर्ष मनाया जाता है.कॉन्वेंट स्कूल्स,पुब्लिच्स्कूल्स में(अधिकांश) एक दिन पूर्व ही शिक्षकों को कुछ उपहार आदि देना,खाना पीना ,थोडा बहुत सांस्कृतिक (तथाकथित) संपन्न होता और हो जाती है ओपचारिकता पूरी हो जाती है.सरकारी स्तर पर तो कुछ सिफारिशी अध्यापकों को राज्य व् राष्ट्रीय स्तर पर पुरुस्कार मिल जाता है,जिनमे अधिकांश तो शायद शिक्षक के नाम पर कलंक ही हैं (ये अभी समाचारपत्रों की रिपोर्ट थी)कुछ भाषण और हो गया शिक्षक दिवस संपन्न.
सवाल तो ये है की क्या आज शिक्षक अपना दायित्व भूल गए हैं,क्यों छात्रों के मध्य आज शिक्षक का सम्मान लुप्त हो रहा है?(अपवादों को अलग रखा जाये) मेरे विचार से शिक्षा का व्यवसायीकरण इसका मूल कारन है उचित -अनुचित साधनों के प्रयोग से डिग्री प्राप्त कर शिक्षक बन जाना आत्मसम्मान को ताक पर रख गुरु शिष्य व् शिष्या के पुनीत संबंधों को भूला देना, शिक्षा को उधोग बना देना ,जहाँ केवल धनार्जन ही शिक्षण संस्थाओं का उद्देश्य बन गया है तो आप किस नैतिकता की आशा कर सकते हैं उन शिक्षकों से जिनसे दोगुने तिन्गुने वेतन पर हस्ताक्षर करा नाममात्र का वेतन दिया जाता है.ऐसा नहीं की केवल इन्ही शिक्षण संस्थाओं में ऐसा होता है. स्तिथि तो कमोवेश सभी जगह एक जैसी है.
आज आवश्यकता शिक्षक को अपना गौरव ,अपना सम्मान बनाये रखते हुए अपना,पुरातन पद प्राप्त करना है ,समाज का दृष्टि कोण बदलना है. क्या आप सुझा सकते है की शिक्षक के प्रति सबकी वही सम्मानजनक सोच कैसे बन सकती है

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 1.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

6 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Piyush Pant के द्वारा
September 6, 2010

शिक्षा के स्तर में गिरावट में राजनीती का बड़ा योगदान है……… जब तक शिक्षक को उसकी प्रतिभा व छात्रों के साथ उसके व्यव्हार व उसके प्रति छात्रों के भावना के आधार पर शिक्षकों को मूल्यांकित किये जाने के स्थान पर राजनीती में उनकी पकड़ के आधार पर सुविधाएँ दी जाएँगी तब तक ये खेल यूँ ही चलता रहेगा…….. अच्छे लेख के लिए शुक्रिया……………..

    nishamittal के द्वारा
    September 7, 2010

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद .आपने सही कहा,राजनीती के चलते कभी श्रेष्ट शिक्षक को सम्मान नहीं मिल सकता.परन्तु सिक्के का दूसरा पहलु ये भी है की शिक्षक को भी अपने पद की गरिमा समझते हुए अपने आचरण में सुधार लाना होगा.क्योंकि शिक्षक वर्ग में वो महानुभाव भी सम्मिलित हैं जो आज धन की चकाचौंध में सदाचार को विस्मृत किये हुए हैं.

आर.एन. शाही के द्वारा
September 6, 2010

अपने प्रति सम्मानजनक सोच का माहौल तैयार करना खुद शिक्षकों के हाथ में है निशा जी । बधाई ।

    nishamittal के द्वारा
    September 6, 2010

    धन्यवाद शाहीजी,आपके विचार से सहमत हूँ .शेक्षणिक वातावरण तैयार करना होगा, लेकिन प्रयास युद्धस्तर पर होना आवश्यक है.साथ ही मानसिकता का बदलाव भी जरूरी है, आप सदृश विद्वान जन शायद बेहतर मार्गदर्शन कर सकते हैं.

rameshbajpai के द्वारा
September 6, 2010

मेरे विचार से शिक्षा का व्यवसायीकरण इसका मूल कारन है उचित -अनुचित साधनों के प्रयोग से डिग्री प्राप्त कर शिक्षक बन जाना आत्मसम्मान को ताक पर रख गुरु शिष्य व्…. आपकी बात को काटा नहीं जा सकता . धरातल की सच्चाई व वास्तविकता यही है

    nishamittal के द्वारा
    September 6, 2010

    धन्यवाद प्रतिक्रिया हेतु.समाधान कब होगा इस समस्या का?समझ पाना कठिन है.शिक्षा ही तो हमारे विकास का,उत्थान का आधार है और ये दुर्दशा .


topic of the week



latest from jagran