chandravilla

विश्व गुरु बने मेरा भारत

307 Posts

13097 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2711 postid : 105

एक अनमोल मदद

Posted On: 9 Oct, 2010 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

यह प्रसंग काफी समय पूर्व मंच पर प्रकाशित किया किया था ऐसे प्रसंग जीवन को एक नयी दिशा प्रदान करते हैं और कुछ शिक्षा भी देते हैं,कि संकटग्रस्त के लिए की गयी आपकी छोटी सी सहायता उस व्यक्ति के लिए कितनी महत्पूर्ण हो सकती है.मंच पर उस समय वर्तमान सदस्यों में से बहुत जन नए हैं,अतः कुछ संशोधन के साथ पुनः प्रकाशित कर रही हूँ
प्रेरक प्रसंग का नाम दूं ,चिर स्मरणीय घटना कहूं,प्रभु कृपा का एक स्वरुप या एक संस्मरण जिंदगी का समझ नहीं पा रही हूँ पर मेरे जीवन में घटित ये घटना सदा प्रेरणा देती है.
वर्षों पुरानी घटना है अपने पति के साथ दक्षिण भारत के ट्रिप पर जाने का कार्यक्रम बना.इतनी लम्बी रेल यात्रा का प्रथम अवसर था.मन में उत्साह,नूतन देखने की उत्कंठा पर सब कुल मिला कर बहुत अच्छा लग रहा था. हमारे अनुभव की कमी के कारण सयुंक्त परिवार में सभी लोग अपने अपने स्तर से हमें सुझाव दे रहे थे.- “कोई कुछ दे तो कुछ खाना नहीं,किसी पर विश्वास नहीं करना,रात्री में सोते समय सामान का ध्यान रखना,हर स्टेशन पर उतरना नहीं,पैसे अलग अलग जगह पर रखना”( उस समय आज की भांति क्रेडिट कार्ड,डेबिट कार्ड ATM जैसी बैंकिंग व्यवस्थाएं व सैलफोन जैसी सुविधाएँ नहीं थी. .) आदि……….प्रोग्राम के अनुरूप बस से दिल्ली पहुंचे रात्री में ट्रेन थी.सब हिदायतों को ध्यान रखते हुए कन्याकुमारी,रामेश्वरम त्रिवेंद्रम,मदुरई तथा मैसूर,बंगलोर व कुछ अन्य स्थानों का भ्रमण करते हुए,यात्रा का आनंद लेने के पश्चात् वापस दिल्ली पहुँचने का कार्यक्रम था
जोलारपेट नामक स्थान से ट्रेन पकडनी थी अत स्टेशन पर वेटिंग रूम में प्रतीक्षा में बैठे थे .एक सज्जन ने पानी माँगा.पानी उनको दे दिया.ट्रेन आने के बाद पुनः वापसी यात्रा प्रारंभ हुई अब सीधा दिल्ली पहुंचना था अतः ट्रेन में बैठने के बाद सारा सामान एक साथ मेरे बड़े पर्स में रख दिया.टिकट,सारे पैसे,ज्यूलरी,घडी अन्य बहुत सी वस्तुएं. आदि.अचानक ही आंध्रप्रदेशमें विजयवाडा पहुँचने पर पता चला कि मेरा पर्स गायब है.हमारे होश उड़ गए जब पता चला अन्य सहयात्रियों से,कि रेल के (उस समय) नियमानुसार यदि टिकेट मांगने पर टिकेट चेकर को नहीं दिखाया तो हमको वो उतार सकता है.हम बहुत घबराये हुए थे,अपने इष्ट का ध्यान कर रहे थे पर मन परेशां था.हमारे पास ५पैसे भी नहीं थे यात्रा अभी दो दिन की शेष थी.
थोड़े समय पश्चात् वही सज्जन जिन्होंने हमसे पानी लिया था हमारे डिब्बे में आये,उनको बातों बातो में पता चल गया कि हम इस समय टिकट सहित सब सामान खो चुके हैं पहले उन्होंने पर्स खोजने का भी प्रयास किया,परन्तु वो मिलने के लिए नहीं खोया था.उन्होंने हमको धैर्य व साहस से काम लेने को कहा.साथ ही बताया कि किसी को पता न चलने दो कि आपका सारा सामान खो गया है.उन्होंने हमको अपने ईश्वर का स्मरण करने को कहा.हमारी चाय भोजन आदि की व्यवस्था अपनी ओर से (आगे के लिए ) करवाई.पता चला कि वो सेना में सिपाही थे.शरफुद्दीन उनका नाम था.पूरे समय हमारी हिम्मत बंधाते हमारी जरूरतों का ध्यान रखा.टी टी ने टिकट चेक किया उस समय हमारी स्थिति बहुत दयनीय थी,हम हनुमान चालीसा का जाप कर रहे थे. और प्रभुकृपा से हमारा टिकट बिना चेक टिकट चैकर आगे चला गया.
तद्पश्चात उन्होंने हमसे ट्रेन से उतरने के बाद आगे के सफ़र की जानकारी ली तथा पुछा कितने धन में आप अपने घर पहुँच सकते हैं.हिसाब लगाकर पचीस रु उन्होंने हमें दिए उस समय २५ रु बहुत छोटी राशि नहीं थी और जरूरत के समय तो डूबते को तिनके का सहारा के सामान थी वो राशि..उनके पास सेना का पास था पर हमारा सामान स्टेशन से बाहर निकलने की व्यवस्था स्वयं की हमको प्लेटफार्म टिकट ला कर दिए,फिर उनको जम्मू की ट्रेन पकडनी थी.अतः इस निवेदन के साथ कि आप ये धन वापस मत भेजना उन्होंने हमसे विदा ली उनको अपने बच्चों के लिए पेठा, पेड़े आदि कुछ सामान भी खरीदना था परन्तु उनकी जेब में सीमित धनराशी थी.अतः उन्होंने कुछ नहीं खरीदा.
हम अपने गंतव्य तक पहुँच गए.लेकिन उस अमूल्य सहायता को क्या हम कभी भुला सकते हैं.इस घटना ने बहुत सारे अनुभव दिए.हिन्दू मुस्लिम नहीं सच्ची मानवता थी ये. यदि हमारे पास बहुत सारा धन है और उसमें से हम कुछ राशि से किसी की सहायता करते हैं वो इतनी महत्पूर्ण नहीं, जितना कि अपनी आवश्यकताओं पर नियंत्रण लगाकर सहायता करना. वास्तव में वो अपने विद्यार्थी जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के सदस्य भी रह चुके थे , और सेना में बहादुरी दिखने का पुरस्कार भी उनको मिला था. वास्तविक सैनिक धर्म का निर्वाह किया था उन्होंने. हमको ये सबक सिखाया था कि हम सबसे पहले इंसान बने,आपद्ग्रस्त की यथासंभव सहायता करें.आप क्या नाम देंगे इस वृतांत को .

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.67 out of 5)
Loading ... Loading ...

20 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
April 3, 2012

दुनिया आज भी अछे लोगों के दम पर ही कायम है.

yogi saraswat के द्वारा
September 21, 2011

Nisha ji , aap jo bhi likhti hain, aisa lagta haipoore manoyog se likti hai.

s.p.singh के द्वारा
October 10, 2010

निशा जी आपकी अभिव्यक्ति अति सुन्दर है. वैसे सर्वशक्ति मान प्रभु/इश्वर/अल्ला/गुरु/परमात्मा अपने सच्चे भक्तों की कष्ट के समय अवश्य सहायता करता है और किसी न किसी को देवदूत बनाकर भेज देता है यही सत्य है, उस देवदूत शरफुद्दीन को सौ सौ प्रणाम /

    nishamittal के द्वारा
    October 10, 2010

    आभार उत्साह वर्धन हेतु.आपने सही कहा है कष्ट देता भी ईश्वर ही है शायद हमें शिक्षा देने के लिया लेकिन अपने हाथ बढ़ा कर आश्रय भी वही प्रदान करता है.

abodhbaalak के द्वारा
October 10, 2010

निशा जी, इसी लिए कहा जाता है की इस दुनिया में इंसानियत अभी बाकी है, और दुनिया भी इसी लिए बाकी है, वरना अगर केवल पापी लोग ही हों तो शायद दुनिया का अंत ही हो जाए. प्रेरक प्रंसग और आपने उतनी ही सुन्दरता से लिखा भी, आजके साममी में ऐसे ही लेख की आवश्यकता है जो हम में प्रेम भाव बनाए. बधाई हो http://abodhbaalak.jagranjunction.com

roshni के द्वारा
October 10, 2010

निशा जी ऐसे ही लोगों को फ़रिश्ते कहा जाता है……..वह सैनिक आपके लिए फ़रिश्ता बनकर आया और आपकी सहायता की ……. उन्हें हमारी और से प्रणाम ……

    nishamittal के द्वारा
    October 10, 2010

    सैनिक,मानवता सभी धर्मों का निर्वाह करने वाले उन सत्जन से हम सभी सीखें इसी लिए ये अनुभव बांटा था .प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद.

NIKHIL PANDEY के द्वारा
October 10, 2010

निशा जी , कलयुग के लिए एक बात कही गई है की इस समय काल में मनुष्य को मोक्ष भी मनुष्य द्वारा मिलेगा.. और उसका विनाश भी मनुष्य द्वारा ही होगा.. .. तो आपका अनुभव ये साबित करता है. की आज भी असी लोग है जो मानवता को सबसे बड़ा धर्म मानते है और इसी भावना पर अभी जीवन सुरक्षित है…

    nishamittal के द्वारा
    October 10, 2010

    धन्यवाद निखिल जी,सत्य कहा आपने ऐसे ही सत्जनों के कार्यों से धरती पर संतुलन बना है.

आर.एन. शाही के द्वारा
October 10, 2010

निशा जी वहां आप लोगों की मदद करने वाला न हिन्दू था, न मुसलमान, बल्कि सिर्फ़ इंसान था, और असली धार्मिक व्यक्ति था, नकली नहीं जो सिर्फ़ बड़ी-बड़ी बातें कर माहौल तो गंदा कर सकते हैं, लेकिन किसी की मदद करते समय या दंगों के समय कन्नी काटकर भाग लेते हैं । शरफ़ुद्दीन जैसे इंसानों की धरती पर कोई कमी नहीं है । आदमी ही आदमी के काम आता है, बस नीयत साफ़ होनी चाहिये । अच्छे संस्मरण के लिये साधुवाद ।

    nishamittal के द्वारा
    October 10, 2010

    धन्य वाद शाहीजी,ऐसे हीमानवों के लिए ये पंक्तियाँ लिखी गयी हैं “आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ “

Ramesh bajpai के द्वारा
October 10, 2010

आदरणीया निशा जी मुसीबत के समय इस तरह दुसरो की मदद करने वाले लोग वास्तव में इन्सान होते है

    Ramesh bajpai के द्वारा
    October 10, 2010

    आदरणीय निशा जी’ ” धर्म की उत्पत्ति क्यों और कैसे ” आदरणीय श्री यस बाजपेयी जी के लेख पर आपके विचरो की जिज्ञाषा है

    nishamittal के द्वारा
    October 10, 2010

    बाजपाई जी, सही अर्थों में इंसान,फ़रिश्ता सच्चा सैनिक कुछ भी नाम दें अगर हम ऐसे किसी के काम आ सकें तभी हमारी कृतज्ञता व्यक्त हो सकेगी

    nishamittal के द्वारा
    October 10, 2010

    मै लेख के शीर्षक, के नाम से खोज रही हूँ बाजपाई जी का लेख नहीं मिल रहा है कृपया डेट बताने की कृपा करें

    Ramesh bajpai के द्वारा
    October 10, 2010

    निशा जी ८ /१०/ १० धर्म की उत्पत्ति कैसे और क्यों

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 9, 2010

आदरनीय निशा जी,आज भी इस धरती पे ऐसे इन्सान हैं जो हमेशा याद किये जाते है,आपकी साथ साथ मै भी ऐसे इन्शान को धन्यवाद देता हूँ,अच्छा यात्रा दर्शन,बधाई

    nishamittal के द्वारा
    October 10, 2010

    मानव जीवन की सार्थकता ही निस्वार्थ भाव से किसी सत्पात्र की सहायता करने में है.

razia mirza के द्वारा
October 9, 2010

शरीफुद्दीन को मानव मंदिर के पुजारी कहना बहेतर होगा| है ना?निशाजी

    nishamittal के द्वारा
    October 10, 2010

    प्रथम प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद रज़िया जी,ऐसे किसी भी महान व्यक्ति की प्रशंसा करना और अधिक सार्थक होगा जब समय आने पर ऐसा किसी भी रूप में हम मानव बनें.


topic of the week



latest from jagran