chandravilla

विश्व गुरु बने मेरा भारत

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.`देश आपका आप देश के (अपनी बदनामी अपने आप?)

Posted On: 15 Oct, 2010 Others में

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एक बहुत महान चित्रकार था.कला बहुत सजीव होती थी उसकी.एक बार उसने एक सुन्दर चित्र बना नगर के चौराहे पर टंगवा दिया. चित्र के बराबर में एक पट्टिका लगी थी,जिस पर लिखा था “इस चित्र में जो कमी दिखाई दे कृपया बताएं”.धीरे धीरे लोगों को उस चित्र में इतनी कमियाँ नज़र आयी कि सारा चित्र उन निशानों से भर गया जो जनता ने उस पर कमियां बताने हेतु लगाये थे.चित्रकार को बहुत दुःख हुआ,परन्तु उसने हिम्मत नहीं हारी एक और वैसा ही दूसरा चित्र बना उसने पुनः वहीँ लगाया ,इस बार पट्टिका पर लिखा था ” जो कमी आपको इस चित्र में दिखाई दे उसको सुधार दें.”आश्चर्य इस बार चित्र बिलकुल साफ़ सुथरा था.
जीवन की वास्तविकता भी यही है,कि हमको दुसरे के काम में कमियाँ तो बहुत जल्दी दीखती हैं,भले ही उस काम की अ ब स भी हम न जानते हों.परन्तु स्वयं कुछ करना चाहते नहीं या जानते नहीं.इस समय ये उदाहरण देने का उद्देश्य commonwealth खेल हैं.खेल प्रारम्भ होने से पूर्व मीडिया तथा समस्त आलोचकों का एक ही अभियान था कि देश को अधिकाधिक बदनाम किया जाये.इसका प्रभाव ,सन्देश सम्पूर्ण विश्व में गया और पर्याप्त आलोचना हुई.इन सबसे प्रभावित स्वयं थी ,अतः दुखी होकर मैंने भी लिखा था” अपमान कब तक सहें ”
” अंत भला सो भला” खेल समाप्त हुए.उद्घाटन से लेकर समापन तक सब कुछ बहुत भव्य,शानदार रहा.खिलाडियों का प्रदर्शन भी सदेव से लाजवाब रहा.प्रथम बार हम पदक तालिका में द्वितीय स्थान पर रह सके तथा इन खेलों के सरताज इंग्लॅण्ड को हम पदक तालिका में अपने से निम्न स्थान पर पहुंचाने में सफल रहे.इतने समय से विवादित चलता आरहा आयोजन बहुत ही उत्तम ढंग से पूर्ण हो गया.
अभी कल ही पढ़ा कि विदेशी पत्रकारों ने भी हमारे मीडिया की आलोचना को अतिरंजित बताते हुए कहा कि,यदि हमारे देश में ऐसा होता तो हम इतना नकारात्मक बता अपने देश को कभी बदनाम न करते यद्यपि आलोचना करना अनुचित नहीं जैसा कि महान संत,समाजसुधारक कबीर दास जी ने कहा है,
“निंदक नियरे राखिये,आँगन कुटी छवाए.
बिन पानी बिन साबुन निर्मल करे सुभाए.”
अर्थात अपने आलोचक को सदा अपने साथ रखिये.बिन पानी बिना साबुन वह आपके सारे विकारों को मिटा देता है व आपका व्यक्तित्व निर्मल हो जाता है.
आलोचना से लाभ भी होता है कि हम अपने दोषों को सुधार सकते हैं,चेत जाते हैं.और शायद खेलों से पूर्व की आलोचना के कारण हमारी व्यवस्था इतनी उत्तम हो सकी.परन्तु सच्चा हितेषी वही होता है जो हमें हमारे दोष बताता है सुधारनें हेतु परन्तु बाहर ढाल बन हमारे ऊपर होने वाले हर प्रहार से बचाता है.आलोचना तो माता-पिता भी अपने बच्चों की करते हैं,परन्तु वह भी यदि अधिक नकारात्मक होती है तो बच्चे में अपेक्षित सुधार नहीं आ पाता.
अतः आलोचना तो करें पर अपने देश के मान सम्मान को ताक पर रखकर नहीं .आपके देश की कोई आलोचना करे तो आपको कष्ट होना चाहिए न कि आपको उसका साथ देना चाहिए .जय भारत

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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Amit kr Gupta के द्वारा
October 30, 2010

निशा जी. नमस्कार निश्चित अच्छी रचना . छोटे से लेख ,में आपने बहुत सी बात कह दी हैं. बधाई फुर्सत मिले तो मेरे लेख पढ़कर अपने विचारो से मुझे अवगत करावे . जय हिंद जय भारत .www.amitkrgupta.jagranjunction.com

syeds के द्वारा
October 19, 2010

निशा जी ,खिलाडियों ने हमारा सर फख्र से ऊंचा कर दिया वरना अधिकारीयों/व्यस्थापकों ने कोई कसार नहीं छोड़ी थी http://syeds.jagranjunction.com

    nishamittal के द्वारा
    October 19, 2010

    कसार तो किसी ने भी नहीं छोडी थी न अधिकारीयों ने न सम्बंधित मंत्रिओं ने अब समय आया है उन पर कठोरतम कार्यवाही हो परन्तु देश को बदनाम न करें .हमारे परिवार के किसी दुष्कृत्य की सजा परिवार को बदनाम करते हुए मिलने चाहिय?

kmmishra के द्वारा
October 16, 2010

निशा जी नमस्कार । नेताओं और अफसरों ने तो देश की नाक कटवा ही दी थी । वह तो भला हो खिलाड़ियों का जिनके अतुल्य साहस से भारत 100 से ज्यादा पदक जीत सका । सलाम है हर एक पदक विजेता खिलाड़ी को और थू है कलमाड़ी और उनकी फौज को ।

    nishamittal के द्वारा
    October 18, 2010

    मिश्राजी,नेताओं,अधिकारीयों,सम्बंधित मंत्रिओं तथा अन्य किसी भी दोषी को कठोरतम दंड मिलना चाहिय,ऐसा मेरा मानना है.भ्रष्टाचार का समर्थन मेरे द्वारा कभी नहीं किया गया.मेरा कथन मात्र इतना है कि अगर हमारे देश का अपमान होता है तो बदनाम हम भी होते हैं.आवाज उठाना एक साहसपूर्ण कार्य है,जो सदा जारी रहना चाहिय .खिलाडियों के प्रदर्शन पर हमें गर्व है.

Babu के द्वारा
October 16, 2010

BAHUT ACHHA ARTICLE HAI, SADEV AISA LIKHTE RAHO DESH LOGO KI SOCH JARUR BADLEGI. DHANYAVAAD BABU(DUBAI)

    nishamittal के द्वारा
    October 18, 2010

    धन्यवाद.

kamlesh pandey के द्वारा
October 16, 2010

कामनवेल्थ खेलों के शुरू होने से पहले इसकी जितनी निंदा की गई अगर वह न की जाती तो हो निसा जी मेरे एक सीनियर ने इसी मंच पर अपने ब्लॉग में कहा है की -हो सकता है खेल शुरू हो जाते और व्यवस्थाएं अधूरी रह जातीं और बाद में देश की किरकिरी होती मगर मीडिया ने निंदक की अपनी पूरी भूमिका ठीक से निभाई। अब वहा मीडिया खेलों के सफल आयोजन, अद्भुत उद्घाटन और अकल्पनीय समापन के साथ ही खिलाड़ियों की उपलब्धि के साथ देश को जोड़ कर देख रहा है। अब देखिये घपलो पर मन्होहन का ध्यान भी गया है, जाँच होगी, मीडिया ने निंदक की अपनी पूरी भूमिका ठीक से न निभाई होती तो क्या देश के धन का दुरूपयोग करने वालो पर शिकंजा कसता ………… आपके चित्रकार वाली कहानी में विचार ,दम दोनों है, ………….

    nishamittal के द्वारा
    October 18, 2010

    पाण्डेय जी, आलोचना करने को लेकर मेरा कोई विरोध नहीं,मेरे द्वारा लिखा भी गया कि आलोचना या निंदा आवश्यक है,यथेष्ट सुधार लाने के लिए.आलोचनाअगर चरम नकारात्मक हो जाये तो उससे देश भी बदनाम होता है.देश हमारा है उन चंद लोगों का नहीं न ही उनके दुष्कृत्य की सजा सबको मिलनी चाहिए . इस सफलता के कारण भ्रष्टाचारियों के लिए कोई माफ़ी नहीं. धन्यवाद

abodhbaalak के द्वारा
October 16, 2010

निशाजी इश्वर का लाख लाख धन्यवाद है की ” अंत भला तो सब भला” पर क्या जो कुछ पहले लिखा जा रहा था वो असत्य था. क्या ये भी गलत है की जनता का करोर्ड़ो रुपया ये ठेकेदार खा गए? खेल बिना किसी दुर्घटना से समाप्त हो जाना अलग बात है और पहले जो कहा जा रहा था वो अलग बात. सच्ची बात कहना गलत नहीं है, और जनता के सामने सच दिखना भी गलत नहीं है.

    nishamittal के द्वारा
    October 18, 2010

    खेलों में भ्रष्टाचार चरम पर था,समस्त सम्बंधित अधिकारी,मंत्री,अन्य सभी लोग जो इस गठजोड़ में सम्मिलित थें,के लिए कठोरतम दंड (यदि संस्तुति करना मेरे अधिकार में होता तो ) सच सामने रखना भी गलत नहीं पर देश को बदनाम कर तो गेहूं के साथ घुन नहीं, घुन के साथ गेहूं पीस रहे हैं.

bharatswabhiman के द्वारा
October 16, 2010

खेल खेलना बुरा नहीं , लेकिन ये कहाँ की समझदारी है की घर फूक कर दुनिया को तमाशा दिखाओ | देश का 70000 हज़ार करोड़ रुपया इन CWG खेलो की भेंट चढ़ गया | देश मे 7000 लोग हर रोज़ व 25 लाख लोग हर साल भूख से मर जाते है | देश में 40 करोड़ लोगो के पास २ वक़्त का खाना नहीं होता .देश मे 44 करोड़ लोगो के पास रोज़ के 20 रूपये भी नहीं होते और 20 करोड़ बच्चे गरीबी के कारण स्कूल नहीं जा पाते| वहां पर पैसे की इस तरह से बर्बादी करना , अपराध है | ताज़ा आकडे बताते है की हालात और भी ख़राब होते जा रहे है | ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2010 मे भारत का स्थान 66 है | हमारे देश के कर्णदार 63 सालो से बार बार , लगातार हमें बहकाते आये है की हमारा देश विकासशील है और हम सब भारतीय आंख मूंद उनपर विशवास करते आ रहे है | |विकास तो सिर्फ इन नेताओ और सरकारी अफसरों का हुआ है और होगा | शरीर के किसी एक हिस्से को क्रीम पाउडर लगाकर कुछ दिनों के लिए चमकाने से वो स्वस्थ नहीं होता | अगर इसी तरह से विकास होता रहा तो हम अगले १०० सालो में भी विकासशील ही रहेंगे. कभी विकसित देश नहीं बनेगे सभी भारतीयों से निवेदन है की इस छलावे में न आये और सभी मिलकर इसका विरोध करे | इश्वर की असीम कृपा से हमारे बीच स्वामी राम देव जी महाराज का आगमन हुआ है जो इस देश की दशा व दिशा को बदल सकते है | पूरे देश मे एक नई आशा का संचार हुआ है | हम सब को मिलकर स्वामी जी का साथ देना है | भारत स्वाभिमान आन्दोलन के साथ जुड़कर अपना सहयोग दे| अधिक जानकारी के लिए कृपा वेब साईट देखें —– www .bharatswabhimantrust.org

    nishamittal के द्वारा
    October 18, 2010

    आपके विचारों से शत प्रतिशत सहमती है मेरी. देश को विकासशील नहीं विकसित बनाना हर भारतवासी का परम धर्म है.परन्तु देश को बदनामी से बचाना भी हमारा धर्म है. हमारे इतने भाई भूखे रहने को विवश हैं, स्कूल नहीं जा पाते बच्चे ,या इस प्रकार के आयोजनों के कारण इतना पैसा हमारा व्यय होता है,निश्चित रूप से पहले देश की इनआवश्यकताओं की पूर्ती जरूरी है. स्वामी जी के कारण योग के शेत्र में जो क्रान्ति आयी है,मेरा शत शत नमन वेबसाइट अवश्य देखूंगी.

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 16, 2010

आदरणीया निशा जी नमस्कार,आलोचना से सुधार अवस्य होता है लेकिन आलोचना की भी एक लिमिट तक अछि लगती है,बहुत ही ज्ञानवर्धक पोस्ट,धन्यवाद!

    nishamittal के द्वारा
    October 18, 2010

    धन्यवाद तिवारी जी.

chaatak के द्वारा
October 15, 2010

आदरणीय निशा जी, ‘निंदक नियरे राखिये’ की उचित व्याख्या की आपने | कथा का वर्णन और सीख का प्रस्तुतीकरण दोनों ही प्रशंसनीय है | बधाई स्वीकार करें!

    nishamittal के द्वारा
    October 18, 2010

    धन्यवाद चातक भाई.कृपया अपने विचारों से वंचित न करे.आप जैसे प्रबुद्ध विचारक अपना कार्य क्यों रोकें,औरों को रोकने को बाध्य करें जो राष्ट्र,समाज के हितेषी नहीं. 

Alka r Gupta1 के द्वारा
October 15, 2010

निशा जी आलोचना से सुधार अवश्य होता है लेिकन उसमें िहत नीिहत हो न िक अिहत। आपने अच्छा िलखा। बधाई हो।

    nishamittal के द्वारा
    October 18, 2010

    धन्यवाद अलका जी.

    nishamittal के द्वारा
    October 18, 2010

    धन्यवाद चातक भाई.कृपया अपने विचारों से वंचित न करें

आर.एन. शाही के द्वारा
October 15, 2010

निशा जी यहां पर एक बात समझने वाली है । निस्संदेह हम आज गौरवान्वित हैं कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावज़ूद हमारी धरती के लाल अपनी प्रतिभाएं निखार कर इस स्वरूप में सामने आ रहे हैं कि देश का भरोसा और विश्वास पुनर्जीवित हुआ । उसी प्रकार विज्ञान और कला पर आधारित नयनाभिराम दृश्य और संयोजन भी भारत की शान बढ़ाते हुए यादगार छोड़ गए । लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि आयोजन की सफ़लता के साथ पापियों भ्रष्टाचारियों के सारे पाप भी धुल गए और उन्हें इसी आधार पर क्लीन चिट दे दी जाय, कि चलो अरबों डकारा, लेकिन सारे परफ़ार्मेंस की क्रेडिट तुम्हें देते हुए माफ़ किया जाता है । दोनों दो बातें हैं निशा जी । किसी आलोचना में हमारे खिलाड़ियों या कलाकारों पर कोई उंगली नहीं उठी थी । आलोचनाएं जो भी हुईं, भ्रष्ट तरीके से बजट के पैसे के गबन और व्यवस्थाओं के प्रति आखिरी समय तक बरती जाने वाली लापरवाहियों के कारण हुईं, जो अपनी जगह पर आज भी यथावत हैं । साधुवाद ।

    nishamittal के द्वारा
    October 18, 2010

    आदरणीय शाहीजी, खिलाडिओं या कलाकारों के प्रदर्शन पर कोई अंगुली उठाने की बात मेरे द्वारा नहीं की गयी,खिलाडियों से सम्बंधित समस्या तो डोप टेस्ट में positive पाए जाने को लेकर थी,न की उनके प्रदर्शन पर.भ्रष्टाचारियों को कोई क्लीन चिट देने के पक्ष में भी नहीं हूँ .इनको जितना कड़ा से कड़ा दंड मिले वह कम है, ऐसा मेरा विचार है.मेरा विचार मात्र इतना था कि सजा मिले,उनसे अधिकार छीने जाएँ पर देश की बदनामी नकी जाए.

jalal के द्वारा
October 15, 2010

बहुत अच्छी बात कही आपने. बधाई हो.

    nishamittal के द्वारा
    October 18, 2010

    हार्दिक धन्यवाद


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