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करवाचौथ (पति के लिए मंगलकामना का एक सुन्दर पर्व)

Posted On: 14 Oct, 2011 Others में

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Karva-Chauth-2010-From-rituals-to-fads करवाचौथ पर्व की मंगल कामनाएं मेरी सभी ब्लोगर बहिनों को उनके सुखी व सौभाग्य सम्पन्न वैवाहिक जीवन के लिए , मंगलकामनाएं पुरुषों को भी उनके सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए और विवाह के लिए प्रतीक्षारत उन युवाओं के लिए जो इस शुभ घडी की प्रतीक्षा में हैं.ईश्वर करे उनकी कामनाएं पूर्ण हों शीघ्रातिशीघ्र !!!!!!!
पर्व एवं त्यौहार सम्पूर्ण विश्व में अपनी अपनी परम्पराओं ,सामजिक या धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप मनाये जाते हैं.हमारी विलक्षण भारतभूमि में तो पर्व और उत्सवों की धूम है.त्यौहार मनाने का उद्देश्य सभी चिंताओं से मुक्त हो कर हंसी खुशी जीवन व्यतीत करना तो है ही,साथ ही सामाजिकता को प्रोत्साहन देने व अपनी भावनाएं व्यक्त करने का भी एक साधन है.केवल मात्र हिन्दू संस्कृति ही ऐसी संस्कृति है जहाँ त्यौहारों पर हम अपने से अधिक परिवार की मंगल कामना करते हैं.रक्षाबंधन,दशहरा व भाईदूज पर जहाँ बहिनों द्वारा भाई के मंगल की कामना की जाती है,विवाह के पश्चात करवा चौथ ,तीज तथा कुछ अन्य पर्वों पर पति की कुशलता व दीर्घ आयु के लिए ईश्वर से प्रार्थना की जाती है, और व्रत रखा जाता है.और संकट चतुर्थी तथा अहोई अष्टमी पर माँ अपनी संतान के लिए.पूजा व व्रत आदि करती हैं..कुछ स्थानों पर अविवाहित लड़कियां भी अपने मंगेतर या भावी पति की कामना से ये व्रत करती हैं.
श्राद्ध समाप्त होते ही नवरात्र, विजयादशमी शरद पूर्णिमा और फिर करवाचौथ का पर्व आता है शरद पूर्णिमा के पश्चात कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को .हिन्दू स्त्रियाँ इस पर्व को बहुत धूम धाम से मनाती हैं.कई दिन पूर्व इसकी तैयारियां प्रारम्भ हो जाती है यद्यपि इस पर्व को उत्तरप्रदेश,उत्तराखंड,पंजाब,राजस्थान,गुजरात,दिल्ली ,हरियाणा व हिमाचलप्रदेश में विशेष रूप से मनाया जाता है,परंतू अब सम्पूर्ण भारत में ही नौकरी .व्यवसाय आदि के कारण अन्य प्रान्तों के लोग भी रहते हैं,और शेष दूरदर्शन व फिल्मों की मेहरबानी से देश के अन्य भागों में तथा भारत से बाहर विदेशों में रहने वाली भारतीय महिलाओं द्वारा यह व्रत किया जाता है
Karva-Chauth-Mehndi-Designs-4 करवाचौथ से .एक दिन पूर्व महिलाएं मेहंदी आदि हाथों में रचाती हैं, करवा एक मिटटी का पात्र होता है,जिसमें जल भरकर रखा जाता है.और रात्रि में वही करवे वाले जल से चन्दमा को अर्घ्य दिया जाता है. .अपनी शारीरिक सामर्थ्य व परम्परा के अनुसार महिलाएं इस व्रत को निर्जल ही करती हैं ,पक्वान्न तैयार किये जाते हैं .विशेष रूप से साज-श्रृंगार कर दिन में इसकी कथा या महातम्य सुना जाता है,अपने श्रद्धेय सास या नन्द को पक्वान्न ,वस्त्र आदि की भेंट दी जाती है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है.रात्रि में चन्द्रदेवता के उदय होने पर दर्शन कर और पतिदेव की पूजा कर ही व्रत का पारायण किया जाता है.त्यौहार मनाने का तरीका स्थानीय परम्पराओं के अनुसार थोडा भिन्न भले ही हो सकता है,परन्तु मूलतः इसी रूप में त्यौहार मनाया जाता है.
\ पंजाब में भी करवाचौथ बहुत उत्साहपूर्वक मनाया जाता है,सासू माँ या ससुराल पक्ष की ओर से सरगी के रूप में पुत्रवधू के लिए वस्त्र-आभूषण ,श्रृंगार सामग्री,चूड़ियाँ , पक्वान्न ,मेवे. फल आदि भेजे जाते हैं.सूर्योदय से पूर्व कुछ महिलाएं शगुन के रूप में कुछ खाकर मुहं भी मीठा करती हैं.
श्रृंगार तो महिलाएं करती ही हैं,परन्तु अब व्यवसायिकता की दौड़ में मेहंदी और ब्यूटी पार्लर्स की चांदी रहती है,विशेष पैकेजस की व्यवस्था उनके द्वारा की जाती है,यही स्थिति मेहंदी लगाने वाले लोगों की रहती है.
फिल्मों के या दूरदर्शन धारावाहिकों के प्रभाव से अब पति भी पत्नी के साथ करवाचौथ पर व्रत रखने लगे हैं. और उपहार आदि दिलाने की व्यवस्था करते हैं. अपनी पत्नी से किसी भी कारण प्रदेश स्थित पतियों को इन्टरनेट के माध्यम से त्यौहार मनाने तथा विभिन्न साईट्स वेबकेम के माध्यम से परस्पर अपनी भावनाएं व्यक्त करने का सुअवसर प्रदान करती हैं. हैं.
\ सर्वे भवन्तु सुखिनः का उद्घोष करती हमारी संस्कृति में “पर ” पर बल दिया जाता है.अपने से अधिक अपने परिवार के लिए सोचें.भोजन करने से पूर्व पशु, पक्षियों, कोई भूखा समक्ष हो तो पहले उसको भोजन कराएँ. परिवार में सबके भोजन करने के पश्चात भोजन ग्रहण करना आदि विशेष रूप से सैद्धांतिक रूप में नारी को देवी का समान प्रदान कर ये समस्त सिद्धांत नारी द्वारा ही पालन किये जाते हैं.कुछ तो शास्त्रों का विधान,कुछ परम्पराएँ और कुछ स्वयं नारी ऩे अपने को देवी मानते हुए स्वयं को उपेक्षित बनाया.और सबको अच्छा खिलाकर स्वयं बासी या बचा हुआ खा लेना या भूखा रहना आदि आदि.
ऐसी परिस्थितियाँ प्राय पूर्वकाल में देखने को अधिक मिलती थी जब नारी स्वयं को सदा उपेक्षित ही रखती थी परन्तु तुलनात्मक रूप से समय में परिवर्तन कुछ सीमा तक आया है.परन्तु ऐसा नहीं की वह स्थिति समाप्त हो गयी हो. आज भी ऐसी महिलाएं हैं जो पति द्वारा परित्यक्ता या तलाक दिए जाने पर,दुर्व्यवहार करने पर,तथा अन्य उत्पीड़नों का शिकार होने पर भी उनके लिए व्रत रखती हैं.
अतः मेरा अनुरोध ,विनम्र आग्रह पुरुषवर्ग से (जो ऐसा नहीं करते ) उन भाईयों से,उन पतियों से और उन पुत्रों से जिनके लिए मंगल कामनाएं ,व्रत उपवास नारी द्वारा किये जाते हैं.,क्या उनका दायित्व नहीं कि वें भी नारी जगत के प्रति सम्पूर्ण दायित्व का निर्वाह करते हुए उनको वो मानसम्मान ,सुख. खुशी प्रदान करें जिनकी वो अधिकारी हैं.और वही व्यवहार करें जिसकी अपेक्षा वो उनसे अपने लिए करते हैं. अपनी उन बहिनों से भी जो पति के लिए व्रत तो रखती हैं परन्तु पति का अपमान करने में या अन्य किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार से चूकती नहीं.

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65 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lahar के द्वारा
October 21, 2011

निशा जी सप्रेम नमस्कार भारतीय संस्कृति और भारतीय मूल्यों को परचित करता आपका ये लेख अदभुत है | आपने बहुत ही सहजता से इस इस पावन पर्व की महत्ता का वर्णन किया है | हमारी संस्कृति में नारी को लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है | कहा भी गया है की जहाँ नारी की पूजा होती है वह देवता निवास करते है | आपने सभी को इस पावन पर्व के एहसास से परिचित कराया आपको बहुत – बहुत धन्यवाद |

    nishamittal के द्वारा
    October 21, 2011

    लहर जी आपका वास्तविक नाम मुझको नहीं ज्ञात है अतः इसी नाम से संबोधित कर रही हूँ.धन यवाद आपकी प्रतिक्रिया हेतु.

    Lahar के द्वारा
    October 21, 2011

    मेरा नाम पंकज कुमार शर्मा है |

    nishamittal के द्वारा
    October 21, 2011

    पंकज जी त्वरित उत्तर के लिए धन्यवाद.

alkargupta1 के द्वारा
October 18, 2011

निशा जी , इस पारंपरिक त्यौहार पर बहुत अच्छा लिखा है…..इतने बढ़िया आलेख के लिए बधाई !

    nishamittal के द्वारा
    October 18, 2011

    धन्यवाद अलका जी.आपकी प्रतिक्रिया हेतु.

Meenakshi Srivastava के द्वारा
October 16, 2011

निशा जी,बहुत-बहुत मंगलकामनाओं के साथ शुक्रिया भी , स्वीकार करें . ” करवाचौथ पर्व ” के विषय को सभी ने इतने नज़रिये से देखा कि – एक मज़ेदार विषय बन गया .अच्छा लगा .वैसे एक बात तो सही है ‘ पति-पत्नी ‘ की नोक-झोंक में भी प्यार छिपा होता है – इसका एक साक्षात् उदहारण ‘ बागवान फिल्म ‘ में ‘परेश रावल हर बार कुछ न कुछ गलत बोलता है ; जिससे उसकी पत्नी सुधार करें ; पत्नी नहीं समझती वो तनिक झल्लाती भी है ; परन्तु ये अदा भी पति के लिए …कुछ और मायनें रखती है ….हम सभी पति पत्नी इस रिश्ते को समझतें हैं ;और समझना भी चाहिए – ये रिश्ता भी बड़ा अनूठा बड़ा मधुर होता है…अंदाज़े बयां जुदा-जुदा हो सकता है.. एक बार फिर शुक्रिया और बधाई आपको. मीनाक्षी श्रीवास्तव

    nishamittal के द्वारा
    October 17, 2011

    सटीक उदाहरण मीनाक्षी जी ये ही सभी नोंक झोंक मधुर बनाती हैं जीवन को.धन्यवाद.मंगलकामनाएं.

roshni के द्वारा
October 16, 2011

निशाजी बहुत ही अच्छा लेख आभार

    nishamittal के द्वारा
    October 16, 2011

    धन्यवाद रौशनी प्रथम करवाचौथ की मंगलकामनाएं

abodhbaalak के द्वारा
October 16, 2011

आदरणीय निशा जी हर पति को चाहिए की आपका ये लेख पढ़े और इस पर्व के बारे में ……………. :) अक्सर का ज्ञान इस विषय पर कम ही ………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    nishamittal के द्वारा
    October 16, 2011

    धन्यवाद चलिए संस्तुति करते हैं पति वर्ग के लिए धन्यवाद.

syeds के द्वारा
October 16, 2011

आदरणीय निशा जी, करवा चौथ के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी देने वाला लेख…बधाई http://syeds.jagranjunction.com

    nishamittal के द्वारा
    October 16, 2011

    धन्यवाद आपका

vinitashukla के द्वारा
October 16, 2011

करवा चौथ के महत्व पर प्रकाश डालने वाले, जानकारियों से भरे इस सुन्दर लेख पर आपको बधाई निशा जी.

    nishamittal के द्वारा
    October 16, 2011

    धन्यवाद विनीता जी.मंगलकामनाएं.

Rita Singh, 'Sarjana' के द्वारा
October 15, 2011

निशा जी ,नमस्कार ,सुन्दर लेख के साथ आपको भी करवा चौथ के अवसर पर बहुत -बहुत शुभकामनाये ……

    nishamittal के द्वारा
    October 16, 2011

    धन्यवाद रीता जी,आपको भी शुभकामनाएं.

sadhana thakur के द्वारा
October 15, 2011

आदरणीय निशा जी ,करवाचौथ की आपको .और सभी बहनों को ढेर सी शुभकामनाये ………..

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    धन्यवाद साधना जी.आपको पर्व मंगलमय हो.

Tamanna के द्वारा
October 15, 2011

निशा जी, लेकिन पतियों के लिए भी ऐसा कोई पर्व निश्चित होना चाहिए. हमेशा पत्नियों को ही अपना प्रेम क्यों प्रमाणित करना पड़ता है…. http://tamanna.jagranjunction.com/2011/10/15/prashant-bhushan-controversial-statement-on-kashmir-issue/

    Santosh Kumar के द्वारा
    October 15, 2011

    तमन्ना जी,.सादर नमस्कार ,….बात तो आपने पते की की है ,..वैसे मुझे नहीं लगता कि ये पर्व प्रेम का प्रमाण होता है ,..खैर मैं आपसे सहमत ही हूँ ,…एक ब्रत तो मर्दों के लिए भी होना ही चाहिए ,…पंचांग देखकर पता चलेगा ३६१वां दिन होता है या नहीं !..( मजाक में ही लेना ,..)…सादर आभार

    munish के द्वारा
    October 15, 2011

    गलत बात तमन्ना जी …………! एक ही तो दिन है जब हम पुरुषों को देवता का रूप मिलता है….. अन्यथा तो हम ३६४ दिन देवी आराधना में ही लीं रहते हैं…… ! मैं आज के दिन का पूरे साल भर इंतज़ार करता हूँ…….. आदरणीय निशाजी, बहुत अच्छी जानकारी करवाचौथ के सन्दर्भ में, मैं अपनी श्रीमतीजी को भी पढवाउंगा ( तमन्ना जी के कमेन्ट को छोड़कर हाहाहा )

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    प्रेम प्रमाणित करने की आवश्यकता नहीं होती तमन्ना जी प्रेम तो ह्रदय में होता है और हनुमान जी की तरह ह्रदय चीर कर दिखाना संभव नहीं.सबकी भूमिकाएं अलग अलग हैं,परन्तु अंत में मैंने लिखा है कि यदि पुरुष यथा योग्य सम्मान नारी को प्रदान करे और वही व्यवहार करे जिसकी अपेक्षा वो अपने लिए करता है.तो ये भी उसका योगदान है,हाँ बहुत केसेज आपको ऐसे मिलेंगें जहाँ पत्नियाँ व्रत तो रखती हैं,परन्तु सरे आम पति का अपमान करने से नहीं चूकती .हाँ परस्पर सम्मान ,प्रेम ,पारस्परिक विश्वास सुखी दाम्पत्य जीवन के मुख्या सूत्रों में जिनका पालन तो दोनों को करना चाहिए.आपको मंगल कामनाएं और धन्यवाद,

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    वैसे मुनीश जी ३६४ दिन पति किस प्रकार पत्नी की आराधना करते हैं,उनके लिए पति पत्नी दोनों को जागरण मंच ज्वाइन करना पड़ेगा.

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    संतोष जी आप गणना न भूलें ३६0 नहीं ३६५ दिन होते हैं वर्ष में और हाँ पर्व प्रेम का प्रमाण नहीं है,यह मैं मानती हूँ.

    akraktale के द्वारा
    October 15, 2011

    संतोषजी भाई आदरणीय तम्मान्ना जी ने बात पते की नहीं पति कि की है.वही पति जो बेचारा इनकी डांट से घबराकर, अफसर कि डांट खाकर, डेढ़ इंच मुस्कान लिए खडा होता है इनकी चलनी के सामने आकर. मुनीश भाई जी कहते हैं श्रीमती जी को पढ़वाउंगा, भाई साहब मैंने तो मैडमजी को,कल इस उम्मीद में कि शायद ये व्रत रख लें, करवा ही ला कर दे दिया.उनकी ख़ुशी देखकर लगा कि कल व्रत तय है.मगर जब उन्होंने कहा कि बहुत अच्छा किया कई दिन से हमने कुल्ल्ड में जमा दही नहीं खाया.अब क्या करें. आदरणीय निशा जी क्षमा करें मगर हमारे यहाँ करवा चौथ कि परम्परा नहीं रही, कुछ लोग पड़ोसियों को देखकर व्रत करने लगे हैं.हाँ हरतालिका जरूर की जाती है. मगर मै नहीं चाहता की मेरी पत्नी कभी मेरे लिए कोई अतिरिक्त कष्ट उठाये. अंत में सभी व्रतधारी बहनों को शुभकामनाएं.

    jlsingh के द्वारा
    October 15, 2011

    तमन्ना जी को शुक्रिया! जो सिर्फ दो पक्तियां लिखकर करवा चौथ को करवा, खट्टा, मीठा और सुमधुर वातावरण पैदा करने में सक्षम रही हैं. मुझे तो सारी प्रतिक्रिया पढ़कर बहुत आनंद आने लगा है और बिना उपवास किये, पत्नी के प्रति, प्रेम ‘प्रदर्शित’ करने की ‘इच्छा’ जाग्रत हो गयी है! सबलोगों का आभार जिन्होंने वातावरण को ‘विनोदमय’ बनाया!

    nishamittal के द्वारा
    October 16, 2011

    आदरनीय अशोक जी,मैंने इस आलेख में केवल कराचौथ का नहीं तीज का भी उल्लेख किया है,इससे पूर्व भी तीज पर एक ब्लॉग प्रकाशित किया था “व्यवसायिक होते त्यौहार संस्कृति पर प्रहार”उसमें भी तीज पर लिखा था परन्तु वर्तमान में विस्तृत व्याख्या सामयिक होने के कारण की.वैसे आप्कीअप्नी पत्नी के प्रति भावनाओं का मैं सम्मान करती हूँ परन्तु इसमें कष्ट उठाने वाली बात नहीं होती क्योंकि परम्पराओं में विश्वास रखने वाली हर भारतीय नारी इन व्रतों ,पर्वों को प्राय ह्रदय से स्वीकार करती है,और इन पर्वों को मनाने का विवाह से पूर्व ही एक स्वप्न संजोती है.धन्यवाद.अगली बार ईश्वर ने चाहा तो तीज पर लिखूँगी इसी प्रकार.

    nishamittal के द्वारा
    October 16, 2011

    सिंह साहब ये विवेचना कोई खट्टा नहीं स्वादिष्ट चर्चा थी और स्वादप्रियता सबकी अलग अलग होती है,किसी को खट्टा अधिक प्रिय है,तो किसी को मीठा और कोई तीखे का दीवाना है,धन्यवाद वातावरण को सुमधुर सौहार्दपूर्ण बनाने हेतु.

    Santosh Kumar के द्वारा
    October 16, 2011

    आदरणीय निशा जी ,.सादर प्रणाम , मैंने हिंदी वाला पंचांग देखने की बात की थी ,. पर्व तो उसी से निर्धारित होता है ,.क्या फर्क पड़ता है एक दिन की बात है चाहे ३६१वां मन लें या ३६६वां,.. अशोक भाई जी ,.सादर नमस्कार ,…कभी कभी पति भी पते का मिल ही जाता है …हा हा हा .. तमन्ना जी ….कहाँ हो आप ?…. सभी सम्मानीय ब्लागरों को मधुर सौहार्दपूर्ण माहौल बनाने के लिए एक्स्ट्रा बधाई

    nishamittal के द्वारा
    October 16, 2011

    संतोष जी,जब बात हिंदी पंचांग की चली है तो मेरी जानकारी के अनुसार हिंदी वर्ष में भी शायद ३५४. या ३५५ दिन होते हैं,ये कोई विवाद की बात नहीं मात्र स्पष्टीकरण है ,हाँ इस बात से फर्क नहीं पड़ता की दिन ३६६व है,३६१ व या अब ३५६ व

    munish के द्वारा
    October 16, 2011

    यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता. मैं तो इसी श्लोक के अनुसार ३६४ दिन श्रीमती जी को देवी मानकर पूजा करता हूँ तब जाकर एक दिन देवता बनने का मिलता है……….! मुझे ये जानकारी मिल गई है की आप की चैटिंग फेस बुक पर हमारी श्रीमती जी से हो गयी है…..इसीलिए आप दोनों को j j मंच पर आने के लिए कह रहीं हैं….. ! मैं भी उनसे कहता हूँ की आप भी कुछ लिखो नहीं तो मेरी ही पुरानी डायरी में से चुराकर लिख दो अभी पता चला भी है की इस तरह का भी नया रिवाज j j पर चला है पर वो मानती ही नहीं……. सिर्फ पढ़ कर ही अपने देवी होने का सबूत देती हैं ……….. कहती हैं तुम लिखो में चैक करती हूँ ……..यकीन मानिए में भी लिखने के बाद सबसे पहले उन्हें पढाता हूँ हंसी आई तो अच्छा लिखा है नहीं तो……. और उनकी सिर्फ एक हंसी के लिए ३६४ दिन कुछ न कुछ नया लिख कर उनकी सेवा करता हूँ………….. और फिर बनता हूँ एक दिन का देवता

    nishamittal के द्वारा
    October 16, 2011

    धन्यवाद मुनीश जी और नमन आपके पत्नीव्रत धर्म को. परन्तु वास्तव में उनका निर्देशन महान है जो वो आपको इतने उत्तम सुझाव देती हैं,हाँ बस एक बात पर आपत्ति है,पुरुष स्वयं को इतना महान लेखक समझते हैं कि पत्नी उनकी रचनाएँ चुरा कर प्रस्तुत करेंगीं,मेरे विचार से जब वो लिखेंगी तो कहीं पासा उल्टा न पड़े (मज़ाक)

manoranjan thakur के द्वारा
October 15, 2011

लेखनी पर बधाई दू या पर्व पर शायद दोनों पर

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    आपको दोनों का धन्यवाद एक साथ दूं या पृथक चलिए धन्यवाद २

amitadixit के द्वारा
October 15, 2011

आदरणीय निशाजी, क्या पत्नियों को मंगलकामनाओं की दरकार नहीं होती…? :-(

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    अमिता जी,कृपया आलेख की प्रथम पंक्ति पुनः पढने का कष्ट करें.वैसे मेरी पुनः मंगलकामनाएं आपको

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    हाँ एक बात और पति पत्नी दोनों के लिए मंगल ही परिवार की खुशी का सूचक है.

    amitadixit के द्वारा
    October 15, 2011

    आपने ‘पत्नियों’ शब्द पर गौर नहीं किया…. क्या पतियों की तरफ से महिलाओं को मंगलकामनाओं की जरूरत नहीं है? और यदि दोनों की मंगलकामनाओं का ही मसला है तो फिर पत्नियाँ ही क्यों करती हैं, पति क्यों नहीं करते हैं? कह सकते हैं कि कुछ पति करते हैं, लेकिन वो परंपरा का नहीं प्रेम और बहुत हद तक दिखावे का मसला है।

    pramod chaubey के द्वारा
    October 15, 2011

    आदरणीया अमिता जी  सादर नमन आपसे से निवेदन है कि आदरणीया निशा जी की बातों पर फिर से विचार करें। मुझे लगता है कि .मंगल. शब्द में  पति, पत्नी और बच्चों सभी के मंगल की कामनाएं निहीत हैं।  वैसे इस मामले में निशा जी का जवाब ही मुझसे बेहतर होंगे। 

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    अमिता जी ,हाँ ये शिकायत आपकी उचित है,परन्तु शायद सुरेन्द्र शुक्ल जी ने शुभकामनाएं दी हैं.कविता के रूप में.

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    आपका कथन सही है,परन्तु अमिता जी को शिकायत पुरुष वर्ग से है,

Santosh Kumar के द्वारा
October 15, 2011

आदरणीय निशाजी ,सादर प्रणाम करवाचौथ पर्व के प्रत्येक पहलू को दिखाता बहुत ही सुन्दर आलेख ,..क्या लिखूं ?..आपकी प्रशंसा के लिए शायद मैं बहुत छोटा हूँ ,…यह आलेख मैंने अपनी पत्नी को भी सुनाया ,..वो भी बहुत ज्यादा प्रभावित हुई,.. आपको हार्दिक शुभकामनाएं ,..पुनः प्रणाम

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    आदरनीय संतोष जी,लेख पसंद करने के लिए धन्यवाद.आपकी पत्नी व आपके लिए मेरी शुभकामनाएं.

    Santosh Kumar के द्वारा
    October 15, 2011

    आदरणीय निशाजी,…….”आदरणीय संतोष जी “????????????? क्या हो गया आपको ? .. बच्चे को बार बार शर्मिदा ना किया करें ,..रोम रोम से प्रार्थना है ! …सच में मुझे बहुत ही बुरा लगता है…मेरी किसी बात या हरकत से आप खफा हैं तो मैं करबद्ध होकर क्षमा मांगता हूँ ,..और आपको यकीन दिलाता हूँ ,..मैंने कभी आपका दिल दुखाने की सोची भी नहीं ,..और ना कभी सोच सकता हूँ ,… आपकी शुभकामनाओं से कृतार्थ हुआ ,..सादर प्रणाम

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    संतोष जी ऐसा कुछ नहीं नाराजगी किस बात की .मंच कोई लड़ने झगड़ने का अड्डा नहीं प्रेम सौहार्द के साथ विचार अभिव्यक्ति के लिए है.और आपसे नाराजगी क्यों हो सकती है

mparveen के द्वारा
October 15, 2011

निशा जी आपको भी करवा चौथ की बहुत बहुत बधाई हो …. और बाकि सभी बहनों को भी…. और भाइयों को भी …. धन्यवाद

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    धन्यवाद प्रवीन जी.आपको पर्व की मंगलकामनाएं.

jlsingh के द्वारा
October 14, 2011

फिल्मों के या दूरदर्शन धारावाहिकों के प्रभाव से अब पति भी पत्नी के साथ करवाचौथ पर व्रत रखने लगे हैं. और उपहार आदि दिलाने की व्यवस्था करते हैं. अपनी पत्नी से किसी भी कारण प्रदेश स्थित पतियों को इन्टरनेट के माध्यम से त्यौहार मनाने तथा विभिन्न साईट्स वेबकेम के माध्यम से परस्पर अपनी भावनाएं व्यक्त करने का सुअवसर प्रदान करती हैं. —– उपर्युक्त बातें प्रेरणादायी है उन पतियों के लिए जो अभीतक ऐसा नहीं करते थे.

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    धन्यवाद सिंह साहब अच्छा है सभी प्रेरणा प्राप्त करें.

surendr shukla bhramar5 के द्वारा
October 14, 2011

आदरणीय निशा जी करवा चौथ की बहुत बहुत शुभ कामनाएं प्रभु सब को सुखमय जीवन दे व् उनका चाँद सदा खिला रहे कम से कम इसी बहाने पतियों को एक दिन तो … बाजार भरे हैं बहार है इस समय मेंहदी और पूजा पाठ….’ सुन्दर लेख ..अच्छा पर्व भ्रमर ५

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    शुक्ल जी,सारे ही दिन वैसे पतियों के ही होते हैं,पत्नियों के लिए तो कोई दिन पुरुषों ने बनने ही नहीं दिया.फिर भी बेचारी पत्नियाँ प्रसन्न रहती हैं.और पुरुष …………………..

    surendr shukla bhramar5 के द्वारा
    October 16, 2011

    निशा जी ऐसा नहीं है इसी बात का तो रोना है पुरुषों का ..की पत्नियों के लिए बैल से खटें कमायें खिलाएं घर और दिल में प्यार से रखें और इस तरह का उलाहना पायें क्या इसे आप जायज ठहरती हैं ?? अपवाद भी है … क्या सब पुरुष वर्ग एक सा है ..शायद नहीं कोई तो अपने दिल की रानी बना रात दिन उनके नाम कर देते हैं … शुक्ल भ्रमर ५

    nishamittal के द्वारा
    October 16, 2011

    शुक्ल जी यदि आप दूसरी श्रेणी के पुरुषों में हैं तो आप व आपकी पत्नी विशेष सराहना के पात्र हैं.स्त्री- पुरुष में सभी श्रेणी के लोग हैं.

Amita Srivastava के द्वारा
October 14, 2011

निशा दी , करवाचौथ की बहुत -२ शुभकामनाये …..

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    धन्यवाद अमिता जी पर्व मंगलमय हो.

pramod chaubey के द्वारा
October 14, 2011

आदरणीया निशा जी सादर प्रमाण पति द्वारा परित्यक्ता या तलाक दिए जाने पर,दुर्व्यवहार करने पर, तथा अन्य उत्पीड़नों का शिकार होने पर भी उनके लिए व्रत रखती हैं। ऐसे आपके कथन से पति और पत्नी के मध्य संबंधों में प्रगाढ़ता आयेगी।  करवाचौथ पर आपकी सामग्री वन्दनीय है…..

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    धन्यवाद प्रमोद जी,लेख पसंद करने के लिए.

naturecure के द्वारा
October 14, 2011

आदरणीय दीदी सादर प्रणाम ! करवा चौथ के विषय में अच्छी जानकारी के लिए बधाई |

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    धन्यवाद डॉ साहब.

malkeet singh "jeet" के द्वारा
October 14, 2011

सच यही है आदरनीय ,जब तक गाड़ी के दोनों पहियों में संतुलन बना रहेगा गाड़ी सही चलती रहे गी लेकिन इसके लिए कुछ फ़र्ज़ पति को भी याद रखने होगे खली रीतिरिवाज मन लेने से किसी का भी भला नहीं होगा

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    जीत जी सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

sumandubey के द्वारा
October 14, 2011

निशा जी नमस्कार, आपको भी व आपके परिवार को करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाएं बहुत सुन्दर पोस्ट है ।

    nishamittal के द्वारा
    October 15, 2011

    धन्यवाद सुमन जी.


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