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कैसे पार लगेगी नैय्या ?(जागरण जंक्शन फोरम)

Posted On: 5 Jan, 2012 Others में

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“किसी को न मारना तो जरूरी है ही ,कुविचार भाव हिंसा है,मिथ्या भाषण हिंसा है,द्वेष हिंसा है,जिसकी दुनिया को आवश्यकता है ,उसपर कब्ज़ा जमाना भी हिंसा है .
अहिंसा बिना सत्य की खोज असंभव है,अहिंसा और सत्य सिक्के के दोनों रुख हैं,एक साधन है तो दूसरा साध्य.” ……………
गत १५ दिन में अपनी गुजरात यात्रा में पोरबंदर जाने का सुअवसर प्राप्त हुआ महात्मा गाँधी के उपरोक्त तथा अन्य सद्विचारों को पढने पर गर्व का अनुभव हुआ. अन्य सभी स्थानों पर भी द्वारिका धाम,सोमनाथ जी आदि तीर्थस्थलों पर नैतिकता व आस्तिकता से भरपूर सन्देश पढ़कर ,प्रभु राम और योगेश्वर कृष्ण से सम्बन्धित प्रसंगों के विषय में जानकर आनन्द प्राप्त हुआ साथ ही जाना कि इसी विरासत के बल पर हम श्रेष्ठ होने का दम्भ भरते हैं,जहाँ प्रभु राम और भरत ऩे विशाल; साम्राज्य को एक ठोकर पर ठुकरा दिया था ,गोविन्द ऩे सत्य का साथ देते हुए महाभारत के युद्ध में सारथी की भूमिका का निर्वाह किया था गीता का दैवी उपदेश प्रदान किया था .
राम, कृष्ण,गुरुनानक ,महावीर स्वामी ,गौतम बुद्ध …………………..आदि महान संतों और महापुरुषों के इस देश में जहाँ देवता भी जन्म ग्रहण करना चाहते हैं ,हमें जन्म लेने का सौभाग्य प्राप्त है .यहाँ पर संस्कारित परिवारों में बच्चों को घुट्टी में सन्देश पिलाये जाते हैं, सत्य बोलो,चोरी मत करो,किसी दुर्बल को सताना पाप है,चींटी को मारना भी पाप है यहाँ तक कि किसी के लिए नकारात्मक सोचना बभी हिंसा का ही स्वरूप है.काम क्रोध ,लोभ मोह आदि विकारों पर विजय प्राप्त करो आदि …………
उत्थान-पतन सृष्टि का नियम है,यही कारण है कि सोने की चिड़िया कहे जाने वाले हमारे देश में ,विश्व गुरु कहे जाने वाले हमारे भारत में (अनगिनत कारणों से) हमारा आर्थिक वैभव तो लुटा ही ,हमारे सिद्धांत भी आज मात्र सिद्धांत ही रह गये हैं
. राजनीति में साम-दाम -दंड-भेद सभी का समावेश होता है,यही कारण है कि महाभारत के युद्ध में श्री कृष्ण ऩे अश्वत्थामा हाथी को मार कर सत्यवादी युधिष्ठर के माध्यम से द्रोणाचार्य को युद्ध से विमुख किया,रेत से पहिया निकलते हुए निहत्थे कर्ण को मारने को अर्जुन को प्रेरित किया, पुत्रघाती जयद्रथ के वध हेतु अर्जुन की प्रतिज्ञा पूर्ण कराने के लिए सूर्य को भी कुछ काल के लिए छुपा दिया ,प्रभु राम ऩे सत्य का साथ देते हुए बाली का वध किया ,विभीषण की सहायता से दशानन का भी अंत किया,समुंदर पर सेतु बाँधने के लिए बल प्रयोग भी किया .परन्तु ये समस्त कार्य सम्पन्न हुए मात्र सत्य की रक्षा के लिए,अन्याय का प्रतिरोध करने के लिए.
आज राजनीति के नाम पर जो दुश्चक्र देश में चल रहा है,उसके कारण हर देशभक्त का मन उद्वेलित है,निराशा है,कारण सिद्धांतों की इतिश्री.शत्रु को मित्र बनाने में कोई दोष नहीं ,परन्तु २ दिन पूर्व तक सिद्धांतों की दुहाई देकर बहुजन समाज पार्टी के बाबू राम कुशवाह तथा रामवीर उपाध्याय को भ्रष्टाचारियों का सरताज बताने वाली भारतीय जनता पार्टी द्वारा उनको अपनी पार्टी में सम्मिलित करना और टिकिट देना किस सिद्धांत का पोषक है? माना राजनीति में लाभ हानि पर विचार किया जाता है,परन्तु जिस व्यक्ति पर हत्या ,घोटाले के आरोप स्वयं ही लगाये गये हों ,उन्ही में २ दिन पश्चात कौन से सुर्खाब के पर लग गये ,कौन से गंगाजल से उनको पवित्र कर लिया गया कि उनको सज्जन का प्रमाणपत्र मिल गया और क्लीन राजनीति की पुकार करने वाली पार्टी ऩे उनको जनप्रतिनिधि के रूप में चुने जाने के लिए अवसर प्रदान करते हुए टिकिट भी थमा दिया..सर्वप्रथम तो इतनी ओछी राजनीति सिद्धांतों की दुहाई देने वाली पार्टी को शोभा नहीं देती और लाभ भी कौन सा जबकि कुशवाह विधान सभा के चुने हुए सदस्य नहीं अपितु विधान परिषद् के सदस्य थे.क्या कुशवाह तथा अन्य अपराधियों को प्रतिनिधि बनाने के लिए टिकिट देकर सरकार बनाने में समर्थ हो पाएगी?जिस भ्रष्टाचारी को मायावती ने अवसर की नाजुकता को भांपते हुए अपने दल से बहिष्कृत कर दिया ,भ्रष्टाचार व अन्य आरोपों को देखते हुए अपनी पार्टी के बहुत सारे प्रतिनिधियों को व सदस्यों को बहिर्गमन के लिए मार्ग दिखा दिया (दुसरे शब्दों में अपनी पार्टी की छवि सुधारने का नाटक कर लिया.नाटक इसलिए कि अब चुनाव के समय मायावती को उनके काले कारनामों की याद आई.) उन्ही सदस्यों का सम्मान के साथ भुजाएं फैला कर स्वागत करना किसी को भी पच नहीं रहा है.ऐसा नहीं कि ये प्रथम बार हुआ हो इससे पूर्व भी समाजवादी पार्टी के डी पी यादव जैसे ही अन्य लोगों को भारतीय जनता पार्टी में सम्मिलित कर बदनामी हो चुकी है. शीर्ष अपराधी शिबू सोरेन का समर्थन लेकर भी अपनी छवि को हानि पहुंचाई है.ये तो बीत चुका था.वर्तमान में जन भ्रष्टाचार विरोधी अभियान सम्पूर्ण देश में सुखियों में है जनता को एक बेहतर विकल्प की तलाश है,स्वयं बी जे पी अन्ना व रामदेव जी के साथ खडी हो चुकी है इस अभियान में ऐसे में !……………………..

क्या किरीट सोमैय्या के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के परिश्रम पर पानी नहीं फिर जाएगा?.काले धन को वापस लाने की मांग करते हुए बाबा रामदेव को समर्थन देकर जो लाभ भारतीय जनता पार्टी न अर्जित किया होगा उसकी भरपाई का क्या होगा. .अन्ना हजारे के साथ जन लोकपाल का समर्थन करते हुए एक सशक्त जन लोकपाल की मांग करने पर बी जे पी ने जो साख बनाई थी उसको भी तो क्षति पहुंचेगी ही.अंततः चाहे ये कोई राजनीति का हथकंडा हो या ऐसी नीति जिसको हमारे जैसे देशवासी नहीं समझ पा रहे हैं परन्तु सबसे अलग नीतियों के साथ राजनीति में सक्रिय दल से ऐसी आशा नहीं की जाती.यह सही है कि शेष सभी दलों का इतिहास इसी प्रकार का है,”आया राम गया राम ” सभी दलों का इतिहास रहा है परन्तु प्रबुद्ध अग्रगण्य नेताओं से युक्त भारतीय जनता पार्टी के लिए ये आत्मघाती कदम ही कहा जा सकता है.
आज देश की जो स्थिति है जनता को तलाश है एक सशक्त विकल्प की जो सही दिशा दे,भ्रष्टाचार के पंक में निमग्न व्यवस्था को राह दिखाए ,देश का अरबों रुपया जो स्विस या अन्य बैंकों में व्यर्थ पड़ा है,उसको देश में लाकर हमारे गरीबों को अश्रु पोंछे जाएँ,देश को उसका खोया गौरव लौटाया जाय .ऐसे में एक सशक्त विकल्प प्रदान करने के लिए बी जे पी को फूंक फूंक कर कदम रखना होगा अन्यथा तो टापते रह जायेंगें पुनः देश की अव्यवस्था,दुर्दशा को कोसते हुए.
गुजरात तथा बिहार में अपनी श्रेष्ठ नीतियों के साथ भारतीय जनता पार्टी ने अपना सुदृढ़ आधार तैयार किया है ,समझदारी और कर्मठता ही उत्तरप्रदेश और फिर अन्य प्रदेशों तथा केंद्र का मार्ग प्रशस्त कर सकती है.
लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक मज़बूत विपक्ष ही सत्तारूढ़ पक्ष पर नियंत्रण रख सकता है, इन नीतियों को अपनाकर बी जे पी जनता के विश्वास की रक्षा नहीं कर सकेगी..अभी कुछ नहीं बिगड़ा है,गलती करके उसको सुधार जा सकता है ,बस आवश्यकता है ऐसी त्रुटियों से परहेज कर सन्मार्ग पर चलते हुए अपनी छवि बचाने की ,जनता का विश्वास अर्जित करने की

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46 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajendra singh shekhawat के द्वारा
May 7, 2014

सेवा का फल अच्छा मिलेगा—- राजेन्द्र सिंह शेखावत ( चूरू राष्ट्रदूत )

vishleshak के द्वारा
January 10, 2012

निशा जी,बहुत-बहुत धन्यवाद एक समसामयिक लेख के लिए ।कुछ दिन पूर्व तक समझ में नहीं आ रहा था कि कांग्रेस को क्या हो गया है,लेकिन उसका भी कान काटते हुए भाजपा उससे भी आगे निकलती हुई प्रतीत हो रही है ।अब तो वह वाली कहावत याद आ रही है कि बरबादे गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी है,अन्जामे गुलिस्ताँ क्या होगा जब हर शाख पर उल्लू बैठा है ।ऐसा लगता है कि जैसे कोई कम्पटीशन चल रहा हो सिद्धान्तहीन राजनीति करने की ।शायद ईश्वर ही इस देश को बचा सकते है,अन्यथा पिछले कुछ माहों से भ्रष्टाचार के विरूद्ध सशक्तता से लड़ती हुई दीखती भाजपा थोड़े से जोकि शायद हो भी न,वोटों के लाभ के लिए कुशवाहा जैसे भ्रष्ट आदमी को पार्टी में शामिल थोडे़ करते ।समझ में नहीं आता कि क्या वास्तव में भ्रष्ट लोगों के बिना राजनीति संभव नहीं है ।यद्यपि मुझे लगता है कि इस बार भ्रष्टाचारियों के खिलाफ़ लोग वोट देंगे,लेकिन ईश्वर से प्रार्थना करता हूंँ कि ऐसा हो अवश्य । विश्लेषक ।

    nishamittal के द्वारा
    January 11, 2012

    विश्लेषक महोदय प्रथम प्रतिक्रिया हेतु आभार.सिद्धान्तहीन राजनीति जनता को दिग्भ्रमित करतीहै,विश्वास को चोट पहुँचती है,परन्तु सुखद ये लगा कि पार्टी ने चंद नेताओं के फैसले को आँख मूँद कर स्वीकार नहीं किया और विरोध हुआ और टिकिट नहीं दिया गया.शेष ईश्वर देश हित में सद्बुद्धि दे नेताओं को

dineshaastik के द्वारा
January 9, 2012

निशा जी नमस्कार, आपका आलेख सचमुच विचारों में क्रांति लाने वाला है। इस समय वोटर भ्रमित है,किसे वोट दें। कोई साँपनाथ कोई नागनाथ। “जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़ियाँ करती हैं बसेरा” की जगह अब हमें यह गीत गाना चाहियेः जहाँ विधायक मंत्री सांसद बना है चोर लुटेरा, वह भारत देश है मेरा, वह भारत देश है मेरा।

    nishamittal के द्वारा
    January 9, 2012

    दिनेश जी आपकी प्रतिक्रिया प्राप्त कर अच्छा लगा,सच में जनता के दिग्भ्रमित होने की स्थिति है,देल्खिये क्या परिणाम होता है.धन्यवाद.

lata kamal के द्वारा
January 8, 2012

नमस्कार निशा जी ,हमेशा की तरह एक विचारशील लेख .भाजपा कांग्रेस का एक ठोस विकल्प नहीं रही .लग रहा था की बसपा का तो ठोस विकल्प बनेगी पर अपने लचीले औए विचारहीन निर्णयों के कारण यहाँ भी निराशा ही हाथ लगी .भाजपा और बसपा की बात छोड़ भी दें तो भी क्या कुशवाह जो कल तक मायावती और बसपा के पक्ष मैं बोल रहे थे वो आज भाजपा के साथ उसी विश्वास के साथ खड़े रह पायंगे ,क्या वो चुनाव प्रचार मैं भाजपा के पक्ष में बोल पायंगे ?और क्या आम आदमी उनकी बात का विश्वास कर पायगा .पिछले कुछ आन्दोलनों से जुड़ कर संभालती हुई भाजपा ने स्वंम अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है .भाजपा में साफ़ सुथरे नेताओं की गिनती तुलनात्मक रूप से ज्यादा है .इसलिए उससे आशाएं भी ज्यादा हैं .

    nishamittal के द्वारा
    January 8, 2012

    लता जी नमस्कार, कांग्रेस की दादागिरी का कारण विपक्ष का मज़बूत न होना ही है,और अब जब कांग्रेस की नैय्या भंवर में है बी जे पी ठोस नीतियों के आधार पर जनता का विश्वास अर्जित कर सकती है.अच्छी बात है कि पार्टी के कुशवाह विषयक मामले में अन्तर्विरोध से पार्टी का संगठनात्मक ढांचे से आश्जा जगती है.ईश्वर सद्बुद्धि दें.

के एल परुथी के द्वारा
January 6, 2012

आपका बहुत बहुत धन्यवाद। मैं तो लेखन में नौसिखिया हूँ। आप जैसी लेखिका के लेख पर मैं क्या टिप्पणी कर सकता हूँ। आपने वस्तुस्थिति का सही चित्रण किया है। मैं केवल इतना ही कहना चाहता हूँ कि हमाम में सभी नंगों की तरह आजकल के सभी राजनितिज्ञ बाहर से चाहे  अलग अलग पार्टी में हों, अन्दर से सभी एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। सभी थाली के बैंगन। बी जे पी में भी सभी तरह के लोग हैं। 

    nishamittal के द्वारा
    January 7, 2012

    नौसिखिये तो सभी होते हैं परूथी जी,आपका स्तर नौसिखियों वाला नहीं है,धन्यवाद.

alkargupta1 के द्वारा
January 6, 2012

निशा जी , सर्वप्रथम तो आलेख के टॉप ब्लॉग में पहुँचने के लिए हार्दिक बधाई ! सत्ता में आने वाले वाले व विपक्ष सभी नेता अपने अपने काले कारनामे कर रहे हैं और ये सभी निश्चिन्तता से घूम रहे हैं इनकी बुद्धि पर अविवेक का आवरण पड़ा हुआ है न जाने कब सद्बुद्धि आएगी……

    nishamittal के द्वारा
    January 7, 2012

    अलका जी धन्यवाद आपका बधाई +प्रतिक्रिया के लिए.आपके स्नेह के लिए आभारी हूँ.ईश्वर से सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना ही की जा सकती है.

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
January 6, 2012

राजनीति में साम-दाम -दंड-भेद सभी का समावेश होता है,यही कारण है कि महाभारत के युद्ध … आदरणीया निशा जी अभिवादन ,,,,आप के विचार से कौन सहमत नहीं होगा लेकिन अब तो अति है कुछ नियम कानून ही पहले टूटते थे वो भी जब सब चाह लेते थे और कोई उपाय नहीं होता था जन कल्याण के लिए जब तब … गन्दी राजनीति …अब अगर सब शिखंडी या घटोत्कच ही दिखें तो कैसे चले ….अब अपने मुखिया को सच साबित करना है चाहे जो करना पड़े धर्म अधर्म …. सार्थक लेख भ्रमर ५

    nishamittal के द्वारा
    January 6, 2012

    शुक्ल जी एक लम्बे अंतराल के पश्चात आपकी सुखद प्रतिक्रिया प्राप्त हुई धन्यवाद.राजनीति में सबकुछ अपेक्षित है,परन्तु शिकायत भी शुक्ल जी वहीँ की जाती है जिनसे आशा होती है.

Vasudev Tripathi के द्वारा
January 6, 2012

आदरणीय निशा जी, आपके विचारों से पूर्णतः सहमत हूँ, कभी भारत में राज्य सेवा का माध्यम मात्र होता था और आज वही स्वार्थपूर्ति का तंत्र! यह भी सत्य है कि परिवर्तित समय के साथ सम्पूर्ण आदर्शों का निर्वहन संभव नहीं रह पाया है किन्तु अपने भाजपा द्वारा कुशवाहा जैसों की भर्ती अपने ही स्वर के विरोध जैसा है किन्तु फिर भी यह संतोषजनक रहा कि गडकरी के इस अकेले फैसले का आडवानी से लेकर उमा भारती व योगी आदित्यनाथ तक शेष भाजपा ने कड़ा विरोध किया| अन्यथा कांग्रेस जैसे अन्य दलों के नेता तो कुत्ते को भी शेर सिद्ध करने पर लग जाते हैं किन्तु अपने सुप्रीमो के विरुद्ध मुंह नहीं खोल पाते…!!! आशा है भाजपा के कुछ नेता पार्टी व देश की भावनाओं को समझेंगे|

    nishamittal के द्वारा
    January 6, 2012

    वासुदेव जी ,आप उनके नाम राशि हैं जिनकी कुशल राजनीति का उल्लेख किया है ऊपर .आपने सही कहा है,संतोष की बात यही है,कि पार्टीमें इसका विरोध हुआ है,परन्तु वासुदेव त्रिपाठी जी जैसा कि मैंने कहा है,आशा उन्ही से की जाती है,जो सन्मार्ग पर अग्रसर हों परन्तु उनको संभल कर चलना सर्वाधिक आवश्यक है.कांग्रेस,समाजवादी या बसपा आदि दलों से ऐसी अपेक्षा नहीं कीजाती.धन्यवाद.

Amita Srivastava के द्वारा
January 6, 2012

निशा दी नमस्कार देश ke वर्तमान हालात मे न सत्ता पक्ष मजबूत रहा न विपक्ष , इन नेताओ व पार्टी की न koi साफसुथरी छवि है न इन्हें इनकी चिंता , सब अवसरवादी और कुर्सी की होड़ मे भाग रहे है | बीजेपी का चेहरा भी जो सामने आ रहा है ,उससे जनता का विश्वास खोयेगे ही |

    nishamittal के द्वारा
    January 6, 2012

    अमिता जी प्रभु इनको सद्बुद्धि दें ऐसी ही कामना कर सकते हैं हम.धन्यवाद

s.p. singh के द्वारा
January 6, 2012

आदरणीय निशा जी आपका लेक अति सारगर्भित और सुन्दर है लेकिन यह वैसे ही है जैसे– ” भैंस के आगे बीन ,,,,,,,,,,,,” सामान ही है —जहाँ हमारे सविंधान के निर्माताओं ने बहुत मेहनत करके एक साफ़ सुथरे लोकतान्त्रिक सविंधान की रचना देश की शासन व्यस्था को चलाने के लिए निर्धारित की जिसकी भावना के अनुसार किसी भी कलंकित व्यक्ति को शासन व्यस्था में ( प्रशासनिक – कार्यपालिका – न्यायपालिका ) कोई भी शाखा हो भाग लेने का अधिकार नहीं होना चाहिए लेकिन यह भूल संविधान के निर्माताओं से हो चुकी है जिसका खामियाजा आज हम और कल हमारे बच्चे भुगतेगें — यह इस लिए हमारे नेता गण जो लोक सभा,या विधान सभाओं में विराजमान हैं या शासन कर रहे हैं डंडा लेकर विरोध पक्ष का फर्ज निभा रहे है, वह लोग सबकुछ लोकतंत्र की व्यस्था में करते है और अपने कुकर्मो को चाणक्य के राजनितिक शास्त्र ओट में छिपाते हैं यह दोहरा मापदंड जब तक रहेगा जब तक लोकतंत्र के आधार पर देश के सारे कानून नहीं बदल जाते क्योंकि की अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार जब तक किसी भी अपराधी को सजा कोर्ट के द्वारा सजा न मिल जाए उसे अपराधी नहीं कह सकते जब तक की सर्वोच्च न्यायालय से फैसला न हो जाय – अगर ऐसा न होता तो आज सरेआम लोगो को मौत के घाटउतारने वाला विदेशी अजमल कसाब मजे से कबाब न खा रहा होता और अफजल गुरु भी आराम से न रह रहा होता — यह सारा दोष हमारे संविधान का ही है और इसके रचियता को और क्या कहा जा सकता है क्योंकि वह तो यही समझते थे की शायद अंग्रेज कौम सबसे अधिक सभ्य और समझदार है इस लिए उनके द्वारा बनाये गए किसी भी कानून को बदलने की आवश्यकता नहीं समझी. इस लिए जब तक हमारे क़ानून लोकतान्त्रिक आधार पर नहीं बनेगें तब तक हम यही सब कुछ देखते रहने के लिए मजबूर रहेंगे — इस लिए इसमें राजनितिक पार्टियों का कोई दोष नहीं है आखिर उन्हें भी तो देश का शासन करना है जो की बिना जोड़ – तोड़ के संभव हो ही नहीं सकता. अच्छे लेख के लिए बधाई =— एस पी सिंह. मेरठ

    akraktale के द्वारा
    January 6, 2012

    निशा जी नमस्काए, आदरणीय एस पी.सिंह जी ने सही ही कहा है की हमारे संविधान में कई त्रुटियाँ रह गयी है. जिसका खामियाजा देश लगातार भुगत रहा है.

    nishamittal के द्वारा
    January 6, 2012

    सिंह साहब बहुत दिन पश्चात आपकी सारगर्भित सटीक [प्रतिक्रिया प्राप्त करना सुखद लगा.समय के साथ परिवर्तन हर संस्था और व्यवस्था में परमावश्यक है,अमेरिका का संविधान विश्व का जटिलतम संविधान है,परन्तु वहां भी संशोधन होते हैं,हमारे यहाँ संशोधन तो होते हैं,परन्तु वो देशहित को दृष्टिगत रखते हुए नहीं अपितु व्यक्तिगत सरकारी हितों को ध्यान में रख कर होते हैं,देश हित को सर्वोपरि माने बिना सम्पूर्ण कवायद व्यर्थ है.धन्यवाद

    nishamittal के द्वारा
    January 6, 2012

    अशोक जी धन्यवाद आपकी प्रतिक्रिया का.

Tufail A. Siddequi के द्वारा
January 6, 2012

निशा जी सादर अभिवादन, एक समय था जब बीजेपी कांग्रेस का विकल्प बनकर उभरी थी. लोगों को बहुत आशाएं थी. लेकिन बीच में दृष्टिकोण परिवर्तन और अब उठाये गए क़दमों ने जनता के सामने प्रश्नवाचक चिन्ह तो खड़े किये ही हैं. पार्टी को तो सोचना ही चाहिए लेकिन सच तो ये है की ‘पार्टी विद डिफ़रेंस’ के बारे जनता भी सोच रही है. भटकाव छिप नहीं रहा है. पोस्ट पर आपको हार्दिक मुबारकबाद. http://siddequi.jagranjunction.com

    nishamittal के द्वारा
    January 6, 2012

    सिद्दीकी जी आप मंच पर अवतरित होकर गायब हो जाते हैं,सर्वप्रथम तो धन्यवाद दे दूं आपके प्रतिक्रिया हेतु समय देने के लिए.भटकाव संक्रमण काल में अनापेक्षित नहीं आवश्यकता है,संभलने की.ईश्वर करे समय रहते चेत जाएँ.

yogi saraswat के द्वारा
January 6, 2012

निशा जी , भारतीय जनता पार्टी ने अपनी जो एक अलग पहिचान बने थी वो धीरे धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रही है ! बहुत सारे लोग खुद को इस पार्टी से जोड़ कर देखते हैं , न केवल एक मजबूत विकल्प के रूप मैं बल्कि एक साफ़ सुथरी और सिधान्तो पर चलने वाली पार्टी के रूप मैं भी ! हालिया कदमों से निश्चित ही उन्हें ठेस पहुंची है

    nishamittal के द्वारा
    January 6, 2012

    ईश्वर ऐसे संवेदनशील अवसर पर सद्बुद्धि प्रदान करें और ऐसे आत्मघाती क़दमों से बचें.धन्यवाद

    nishamittal के द्वारा
    January 7, 2012

    योगी जी,जनता को ठेस अवश्य लगी है,परन्तु अभी भी संभलने का समय है.धन्यवाद प्रतिक्रिया हेतु

sadhana thakur के द्वारा
January 6, 2012

आदरणीय निशा जी ,बहुत सही कहा आपने ,ये जीवन ही माया मोह लगता है जब आप अपने देश के महामुनाभावो की बातें सुनते हो या उनके विचार को पढ़ते हो ..काश हमारे देश के राजनीतिज्ञ इस यथार्थ को समझ पाते तो देश का कल्याण अवश्य होता ,बहुत अच्छा लेख ………..

    nishamittal के द्वारा
    January 6, 2012

    धन्यवाद साधना जी आपकी प्रतिक्रिया हेतु.

satya sheel agrawal के द्वारा
January 6, 2012

निशा जी ,यह देश का दुर्भाग्य ही जो देश में सभी पार्टियाँ अवसरवादी निति अपना कर राजनीती कर रही हैं देश की और देश की जनता की किसी को परवाह नहीं है.

    nishamittal के द्वारा
    January 6, 2012

    अग्रवाल साहब बहुत समय पश्चात आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई धन्यवाद.

jlsingh के द्वारा
January 6, 2012

निशा जी, नमस्कार! भाजपा में भी बाबु सिंह कुशवाहा पर दो धड़े हो गए है. सभी लोग भाजपा के इस कृत्य को आत्मघाती कदम ही मान रहे हैं. हम सबकी दुआएं हैं की समय रहते भाजपा चेत जाय नहीं तो, क्या वर्षा जब कृषि सुखाने!

    nishamittal के द्वारा
    January 7, 2012

    आपके विचार से सहमत हूँ सिंह साहब ,धन्यवाद

rahulpriyadarshi के द्वारा
January 5, 2012

बर्बाद गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफी है, अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा,जहां हर शाख पे उल्लू बैठे हैं. आपका लेख उचित कारणों को उठाता है,अगर भाजपा को बदलाव की राजनीति करनी है तो बदलाव नजर आना चाहिए,जब सभी दल एक जैसे ही दिखने लगेंगे तो कौन भला कौन बुरा.भाजपा या और किसी भी दल को भ्रष्टाचार के समर्थन में छद्म रूप से खड़ा देखकर कोफ़्त होती है.

    nishamittal के द्वारा
    January 7, 2012

    धन्यवाद राहुल जी आपकी अपने विचार सहित प्रतिक्रिया देने के लिए.

Santosh Kumar के द्वारा
January 5, 2012

आदरणीय निशाजी ,.सादर प्रणाम राजनीती पूरी तरह मुनाफे का सौदा बन गयी है ,..भाजपा अपने दोगले कारनामो से आजतक देश को सशक्त विकल्प नहीं दे सकी है ,…धीरे धीरे कांग्रेस की बी टीम बन चुकी पार्टी से ज्यादा उम्मीद करना बेमानी सा लगने लगा है ,……विकल्पहीनता की स्थिति में ही नया विकल्प मिलना नियति द्वारा निर्धारित होता है ,…देखना है कि भाजपा इस कैंसर से खुद को बचा पाती है या नहीं….सार्थक लेख के लिए हार्दिक आभार आपका

    nishamittal के द्वारा
    January 7, 2012

    आपने सही कहा है समय रहते ,चेतना आवश्यक है,वैसे पार्टी में हो रहा विरोध आशा को जाग्रत करता है.धन्यवाद

आर.एन. शाही के द्वारा
January 5, 2012

निशा जी, अन्त में एक पार्टी विशेष की ओर आशा भरी नज़रों से देखती आपकी लेखनी से विवशता टपकी पड़ रही है । क्योंकि कोई अन्य विकल्प जो नज़र नहीं आ रहा ! पिटारे में नागनाथ और साँपनाथ के अतिरिक्त कोई विषविहीन प्राणी है ही नहीं, इसलिये कम जहरीले पर ऐतबार करने की विवशता ही आज का सबसे बड़ा विकल्प बन चुका है । विगत कई दशकों से हम सिर्फ़ आजमाने का खेल ही खेल रहे हैं, क्योंकि क्रीड़ांगन में कोई और गेम है ही नहीं । आने वाले दो वर्षों में कोई खास चमत्कार घटित हो जाएगा, इसकी सम्भावना भी कम ही दिख रही है, इसलिये आपकी पीड़ा स्वाभाविक है । साभार !

    nishamittal के द्वारा
    January 7, 2012

    आदरनीय शाही जी,आपकी सहमती युक्त प्रतिक्रिया के लिए आभार ,थोडा सा संतोष यही दिख रहा है,कि पार्टी ने आँख मूँद कर समर्थन न कर अपना विरोध प्रदर्शित किया अब पार्टी नेतृत्व पर निर्भर है सारा दारोमदार + ऐसे अनावश्यक जल्दबाजी वाले क़दमों से बचने की.

minujha के द्वारा
January 5, 2012

आदरणीय निशा जी प्रणाम राजनीति का यही खेल ही है,ना कोई दुसरे पर कीचङ उछालने से चुकता है,ना अपने का दूध का धुला साबित करने से,जबकि सबके बारे में आम जनता को पता है,

    nishamittal के द्वारा
    January 7, 2012

    जनता का जागरूक होना एक सकारात्मक लक्षण है मीनू जी परन्तु जनता के पास विकल्प तो हो.धन्यवाद

meenakshi के द्वारा
January 5, 2012

वास्तव में , निशा जी ..सच कहा आपने ..अपने देश की दशा बड़ी सोचनीय हो गई है .मिश्रा देश में तो परिवर्तन हो गया भारत का नंबर कब आएगा..? पर जब तक सफलता न मिले हर बुद्धजीवी को मन-कर्म-वचन से प्रयासरत रहना होगा.. मीनाक्षी श्रीवास्तव

    nishamittal के द्वारा
    January 7, 2012

    आपके विचार से सहमत हूँ ,मीनाक्षी जी.धन्यवाद

Deepak Sahu के द्वारा
January 5, 2012

आदरणीय निशा जी! भाजपा का दगियों का अपनी पार्टी मे लेने का निर्णय मेरी भी समझ के परे है! खुद को भृष्टाचार विरोधी पार्टी कहने वाली पार्टी को आखिर ये क्या हो गया? अगर पार्टी सोचती है की उनको विभीषण की तरह प्रयोग करके विजय हासिल करेंगे, तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल है! अच्छा हो समय रहते वह अपनी भूल सुधार ले! दीपक

    nishamittal के द्वारा
    January 7, 2012

    पार्टी में हो रहा विरोध सकारात्मक सन्देश देता है,दीपक जी.प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद

Tamanna के द्वारा
January 5, 2012

नमस्कार निशा जी, बहुत दिनों बाद आपको मंच पर देखकर खुशी हुई. आप जैसी लेखिका का इस मंच की अनिवार्यता बन गया है…   http://tamanna.jagranjunction.com/2012/01/05/importance-of-post-cards-and-letters-in-old-times-changing-scenario-and-relevance-of-greeting-cards-old-memories/

    nishamittal के द्वारा
    January 6, 2012

    आपके स्नेह केलिए आभार साथ ही प्रतिक्रिया हेतु


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