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सुन लो पुकार आज (विजयादशमी पर)

Posted On: 22 Oct, 2012 Others में

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रावण कुम्भकर्णी विशाल चतुरंगिनी सेना का

कहर धरा के ऋषि-मुनियों पर जब टूट रहा था,

हाहाकार,क्रंदन स्वर चहुँ ओर से गुंज रहा था

अनाचार से भारित यह भूमंडल भी डोल रहा था

पिनाक टंकार स्वर देवों ने अंबर तक गुंजायाथा

दिव्यशस्त्र चला असुरों का नाम निशाँ मिटायाथा

विजय घोष नाद किया सत्य ध्वजा फहरायाथा.

पुनः शान्ति छायी धरा हर मन संतोष आया था.

आज पुनः कलिकाल के दानवों ने फन फैलायाहै,

प्रदूषित कर डाले भूमंडल को ऐसा विष फैलाया है.

इनके घृणित  कृत्य देखो धरा संतुलन डगमगाया है.

पीड़ित मानव मूर्छित सा है निज साहस गंवाया है.


फूंक शंख,गदा,धनुष बल या फिर चक्र घुमाना है,

मूर्छित मानव को भगवन फिरसे होश  में लाना है,

पुकार रही यह धरा प्रभु चमत्कार अब दिखलाना है,

अवतार प्रभु जो राहत दे,अवतरित उस रूप आना है,



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69 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

krishnashri के द्वारा
November 1, 2012

आदरणीय महोदया , सादर , दशहरा के अवसर पर बहुत सुन्दर काव्यात्मक प्रस्तुति . देर से आने के लिए क्षमा चाहूँगा .धन्यवाद .

आर.एन. शाही के द्वारा
October 29, 2012

अपनी मूल विधा से हटकर काव्य के माध्यम से बहुत सराहनीय प्रस्तुति दी है श्रद्धेया निशा जी । लग ही नहीं रहा कि कविता के मामले में नई हैं । आज की दैत्यलीला से त्राण दिलाने हेतु प्रभु के आवाह्न का भाव सराहनीय है । धन्यवाद !

    nishamittal के द्वारा
    October 29, 2012

    परमआदरनीय शाही जी,कुछ न कुछ सहयोग लेकर ही पोस्ट किया क्योंकि लिख तो लिया और फिर उसमें काव्यात्मक सौन्दर्य का समावेश करने की कला नहीं आती.चलिए प्रयास जारी रखूँगी .आभार आपका अचानक आपका कमेन्ट देख कर सुखद लगा.

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 29, 2012

बहुत अद्भुत अहसास…सुन्दर प्रस्तुति बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत ही सुन्दर रचना.बहुत बधाई आपको . मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद . सुखद एहसास की अनुभूति हुई आपकी उपस्थिति मात्र से और आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला –

    nishamittal के द्वारा
    October 29, 2012

    धन्यवाद मदनमोहन जी सुखद प्रतिक्रिया हेतु.

yogi sarswat के द्वारा
October 29, 2012

फूंक शंख,गदा,धनुष बल या फिर चक्र घुमाना है, मूर्छित मानव को भगवन फिरसे होश में लाना है, पुकार रही यह धरा प्रभु चमत्कार अब दिखलाना है, अवतार प्रभु जो राहत दे,अवतरित उस रूप आना है, सुन्दर आह्वाहन ! आपका लिखा , पता नहीं क्यूँ स्वयं ही आकर्षित करता है आदरणीय निशा जी !

    nishamittal के द्वारा
    October 29, 2012

    योगी जी बहुत दिनों से संभवतः आप अनुपस्थित थे मंच से आने पर सुखद प्रतिक्रिया बहुत अच्छी लगी

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय निशा जी, सादर ! “”फूंक शंख,गदा,धनुष बल या फिर चक्र घुमाना है, मूर्छित मानव को भगवन फिरसे होश में लाना है, पुकार रही यह धरा प्रभु चमत्कार अब दिखलाना है, अवतार प्रभु जो राहत दे,अवतरित उस रूप आना है,”" जन-जन की पुकार को आपने शब्द दिए ! यह पुकार सम्पूर्ण भारत कि जनता का है ! सादर !

    nishamittal के द्वारा
    October 27, 2012

    आपका आभार शशिभूषण जी.

yamunapathak के द्वारा
October 25, 2012

निशाजी पुकार रही यह धरा प्रभु चमत्कार अब दिखलाना है, अवतार प्रभु जो राहत दे,अवतरित उस रूप आना है, आपके इस पुकार पर हम सब आपके साथ हैं

    nishamittal के द्वारा
    October 25, 2012

    आपका साथ मुझको सदा मिलता रहा है,धन्यवाद यमुना जी.

harirawat के द्वारा
October 25, 2012

अति सुन्दर रस उर अलंकारों के साथ सजी हुई कृति के लिए साधुवाद !

    nishamittal के द्वारा
    October 25, 2012

    बहुत ब्बहुत धन्यवाद रावत जी.

इंसान के द्वारा
October 25, 2012

कुम्भकर्णी निशाचर नहीं, हैं भारतीय वसुंधरा पर बैठे नेता कल का कलिकाल नहीं, है वैश्विक उपभोक्तावाद पिशाचसभा क्रंदन, होता हाहाकार नहीं, हैं सब हा हा हँसते नेता मिल संगी अनाचार कारण भारित नहीं, हैं भ्रष्टाचार-ग्रस्त अराजकता चंगी गाँव गाँव में गरीब गवांर को लोकतंत्र का जामा पहनाया| फुसला बहला, उस विद्याहीन गरीब ने अपना वोट गंवाया| अपना भला जाने न मस्त कलंदर; हँसते हँसते चढ़ गया सूली पर बंदर| डूबा अपने साथ ले औरों को लाला; एक एक खा गया देश का रखवाला| आओ कोई गंवार को कुछ सबक सिखाओ, अपने जैसा समझदार तुम उसे बनाओ| विद्या दो उसे खड़ा करो अपने पैरों पर, कोई मक्कार न ठगे उसे भोला समझ कर| घोर अन्याय देख अरविंद है आता, उठे रोकने उसे चोरों के भ्राता| राष्ट्रवाद का गीत सिखाओ, साथ हम अरविंद चोरों को दूर भगाओ|

    nishamittal के द्वारा
    October 25, 2012

    काव्यात्मक विचारपूर्ण प्रथम प्रतिक्रिया हेतु आपका धन्यवाद देश हित में जो सर्वोत्कृष्ट हो उसके लिए हम हर पल तैयार हैं.

Ravinder kumar के द्वारा
October 24, 2012

आदरणीया निशा जी, राम राम जी, आपने बहुत अच्छी कविता लिखी है. आज देश की ऐसी हालत है के भगवान के अवतार ही कुछ सुधार ला सकते हैं. फूंक शंख,गदा,धनुष बल या फिर चक्र घुमाना है, मूर्छित मानव को भगवन फिरसे होश में लाना है, पुकार रही यह धरा प्रभु चमत्कार अब दिखलाना है, अवतार प्रभु जो राहत दे,अवतरित उस रूप आना है, विजयदशमी की आप को शुभकामनाएं. नमस्ते जी.

    nishamittal के द्वारा
    October 25, 2012

    रविन्द्र जी काव्य में चाह कर भी नहीं लिख पाती परन्तु प्रयास करती हूँ शायद सीख जाऊंगी कभी धन्यवाद.मंगलकामनाएं.

seemakanwal के द्वारा
October 24, 2012

फूंक शंख,गदा,धनुष बल या फिर चक्र घुमाना है, मूर्छित मानव को भगवन फिरसे होश में लाना है, पुकार रही यह धरा प्रभु चमत्कार अब दिखलाना है, अवतार प्रभु जो राहत दे,अवतरित उस रूप आना है, हम सबकी यही प्रार्थना है .

    nishamittal के द्वारा
    October 25, 2012

    सीमा जी धन्यवाद .आपके सदा मिलने वाले सहयोग के लिए आभार.

vinitashukla के द्वारा
October 24, 2012

दशहरे के अवसर पर बहुत सुन्दर और शुभ आह्वान. आपको भी विजयदशमी की शुभकामनाएं निशा जी.

    nishamittal के द्वारा
    October 25, 2012

    धन्यवाद विनीता जी पुनः मंगलकामनाएं

vaidya surenderpal के द्वारा
October 24, 2012

निशा जी नमस्कार, सुन्दर रचना के लिए बधाई ।

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद सुरेन्द्र पाल जी.

omdikshit के द्वारा
October 24, 2012

आदरणीय निशा जी ,नमस्कार. बहुत अच्छा प्रयास.बधाई.

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद दीक्षित जी

R K KHURANA के द्वारा
October 24, 2012

प्रिय निशा जी, दशहरा के पवन पर्व पर आपको यह अभिवक्ति सुंदर बन पड़ी है ! राम कृष्ण खुराना

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    आभार आदरनीय खुराना जी.

Rudra के द्वारा
October 24, 2012

निशा मैडम, ६ महीने बाद जागरण पे आया और फिर से सबसे पहला आप का ही ब्लॉग पढ़ा. बाकी क्या कहने, इतनी थो मेरी औकात नही की आपकी लेखनी पे टिपण्णी कर सकूं. बस अच्छा लगा अपढ़ के :) रूद्र

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    रूद्र जी बहुत दिन पश्चात आपको मंच पर देख कर सुखद लगा प्रतिक्रिया के लिए समय निकाला धन्यवाद

Rajesh Dubey के द्वारा
October 24, 2012

अब दुर्गा मां को फिर एक बार भू मंडल पर अत्याचार कर रहे दानवों का संहार करने के लिए अवतरित होना पड़ेगा. दुर्गा पूजा की हार्दिक शुभकामनायें आपको भी.

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद राजेश जी,मंगलकामनाएं

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
October 24, 2012

फूंक शंख,गदा,धनुष बल या फिर चक्र घुमाना है, मूर्छित मानव को भगवन फिरसे होश में लाना है निशाजी, निश्चित तौर पर आपने काफी हद वर्तमान परिवेश में उबलती जिंदगी के बीच यह सुंदर प्रार्थना की है। काश यह स्वीकार हों। इसमें कोई संदेह नहीं कि मानव ही अब मानवता को भूल रहा है तो क्या किया जाए…बधाई के साथ ही विजयादशमी की शुभकामनाएं

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    शुभकामनाओं और प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद .आपको भी मंगलकामनाएं

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
October 23, 2012

निशा जी, सादर !…………..सुन्दर काव्यानुभूति के लिए हार्दिक आभार !!

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    आभार आचार्य जी.

rekhafbd के द्वारा
October 23, 2012

आदरणीया निशा जी , पुकार रही यह धरा प्रभु चमत्कार अब दिखलाना है, अवतार प्रभु जो राहत दे,अवतरित उस रूप आना है,बहुत सुंदर ,दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद रेखा जी आपको भी विजयदशमी मंगलमय हो

sudhajaiswal के द्वारा
October 23, 2012

आदरणीया निशा जी, सादर अभिवादन, प्रभु को भक्ति-भाव करुण पुकार करती हुई रचना, बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बहुत-बहुत बधाई|

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद सुधा जी

yatindranathchaturvedi के द्वारा
October 23, 2012

सत्य के विजय दिवस ‘विजय दशमी’ की हार्दिक शुभकामनाये

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    आपको भी मंगल मय हो विजयदशमी

satya sheel agrawal के द्वारा
October 23, 2012

निशा जी, आपने प्रमाणित कर दिया है की आप अपनी अभिव्यक्ति को काव्य रूप में भी कर सकती हैं.साधुवाद की पात्र हैं आप

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    सत्यशील जी आभार ,प्रयास किया मित्रों का सहयोग भी लिया संभवतः सीख जाऊं करत करत अभ्यास ……..धन्यवाद

MAHIMA SHREE के द्वारा
October 23, 2012

फूंक शंख,गदा,धनुष बल या फिर चक्र घुमाना है, मूर्छित मानव को भगवन फिरसे होश में लाना है, पुकार रही यह धरा प्रभु चमत्कार अब दिखलाना है, अवतार प्रभु जो राहत दे,अवतरित उस रूप आना है,……. आदरणीया निशा मैम, सादर नमस्कार बहुत ही सुंदर काव्य अभिवयक्ति …. .. मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद महिमा जी मंगलकामनाएं आपको भी

bhanuprakashsharma के द्वारा
October 23, 2012

निशा जी, सुंदर रचना। साथ ही दहशहरे के त्योहार की शुभ कामनाएं और एक उम्मीद कि हम अपने भीतर के रावण को मारने का संकल्प लें।

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद भानु जी.

vijay के द्वारा
October 23, 2012

आदरणीय माता जी नमस्ते , वर्तमान हालात भी उपर वर्णित जैसे ही है ,सुंदर प्रस्तुति के लिए बधाई, विजयदशमी की शुभकामनाएं 

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद विजय जी.आज के रावण को जीतना अधिक कठिन है

ANAND PRAVIN के द्वारा
October 23, 2012

आदरणीय निशा मैम, सादर प्रणाम सुन्दर आवाहन ……….माँ को अवतरित होना ही होगा………….

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद आनन्द जी.

Santlal Karun के द्वारा
October 22, 2012

आदरणीय निशा जी, मनुष्य जब हर तरह से पराजित हो जाता है, तब भक्तिभाव का जन्म होता है | जैसा कि मानव जीवन के इर्द-गिर्द धरती का वातावरण है, उस दृष्टि से प्रभु-पुकार के इस भक्तिगीत के लिए हार्दिक साधुवाद व सद्भावनाएँ !

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    आभार संतलाल जी.

manjusharma के द्वारा
October 22, 2012

आपकी कविता अति सुंदर

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद मंजू जी.

vasudev tripathi के द्वारा
October 22, 2012

आदरणीय निशा जी, दशहरा के महान पर्व पर आपकी प्रभु से यह प्रार्थना सुन्दर कामना पिरोये हुए है| दशहरा की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ प्रार्थना है कि आपकी भावनाएं साकार हों.!

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    शुभकामनाओं हेतु आभार वासुदेव जी.

jlsingh के द्वारा
October 22, 2012

फूंक शंख,गदा,धनुष बल या फिर चक्र घुमाना है, मूर्छित मानव को भगवन फिरसे होश में लाना है, पुकार रही यह धरा प्रभु चमत्कार अब दिखलाना है, अवतार प्रभु जो राहत दे,अवतरित उस रूप आना है, आदरणीय महोदया, भगवन आपकी और हम सबकी प्रार्थना अवश्य सुनेंगे!

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    ईश्वर करे ऐसा ही हो सिंह साहब ,धन्यवाद

akraktale के द्वारा
October 22, 2012

अवतार प्रभु जो राहत दे,अवतरित उस रूप आना है,                                     अवश्य ही आज पुनः भारतभूमि दानवों से परेशान नजर आती है और जन  खामोश है अब भगवान का ही आसरा नजर आता है. बहुत दिनों बाद आपकी सुन्दर कल्पना पर आधारित  काव्य रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें आद. निशा जी.                   

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद अशोक जी आपके सहयोग हेतु आभार.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 22, 2012

पुकार रही यह धरा प्रभु चमत्कार अब दिखलाना है, अवतार प्रभु जो राहत दे,अवतरित उस रूप आना है, aadarniyaa nisha ji, saadar abhivaadan aapko bhi shubh kaamnayen. prabhu ko aana hi hoga.

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद आदरनीय कुशवाह जी.

alkargupta1 के द्वारा
October 22, 2012

निशाजी,आपकी यह गुहार अवश्य प्रभु जी सुनेंगे इस ओजस्वी आह्वान व काव्यात्मक रचना के लिए हार्दिक बधाई

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद अलका जी.

niteshjha के द्वारा
October 22, 2012

बहुत सुन्दर

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद नीतेश जी प्रतिक्रिया हेतु

Santosh Kumar के द्वारा
October 22, 2012

आदरणीया ,..सादर प्रणाम फूंक शंख,गदा,धनुष बल या फिर चक्र घुमाना है, मूर्छित मानव को भगवन फिरसे होश में लाना है,…………बहुत भावपूर्ण करुण प्रार्थना ,..भक्तवत्सल अवश्य पुकार सुनेंगे ,….कोटिशः अभिनन्दन

    nishamittal के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद संतोष जी.


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