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असली रौशनी वाली दीवाली

Posted On: 5 Nov, 2012 Others में

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deewali

दीप पर्व की मंगल कामनाएं आप सभी को.

आज  दीवाली का पर्व होने पर भी रमा को बॉस के कहने से  किसी जरूरी कार्य वश कुछ देर के लिए ऑफिस जाना पड़ा,काम निबटाते काफी समय हो गया .रमा को अभी बाज़ार से सामान  भी खरीदना था और त्यौहार की तैयारी भी करनी थी.जल्दी से कुछ मिठाई तथा अन्य आवश्यक सामान लेकर वह ऑटो लेने के लिए चली ,परन्तु  रमा  के  तेजी से बढते क़दमों को ब्रेक लग गया ,जब उसकी नज़र  चौराहे पर गाड़ी साफ़ करते उस  बच्चे पर पडी जो कभी कपडे से तो कभी अपनी फटी कमीज से एक गाड़ी को चमका रहा था ,इतने में ग्रीन  सिग्नल होते ही ट्रैफिक चालू हो गया और गाड़ी के मालिक से पैसे मांगता वह बच्चा बराबर की गाड़ी से धक्का लगने के कारण नीचे गिर पड़ा ,पैसे तो मेहनत के उसको मिले ही नहीं ,पता नहीं गाड़ी के मालिक को मोबाइल पर बात करने के कारण फुर्सत नहीं थी या उस बच्चे के पैसे मारकर वह और अमीर बनना चाह रहा था,वह आगे बढ़ गया. .इतनी भागमभाग में  किसी के पास फुर्सत नहीं थी, जो उस बच्चे को उठाकर कुछ मरहम पट्टी करा सके परन्तु रमा की मानवता ने उसको अनुमति नहीं दी ,खून बहते बच्चे को छोड़ कर जाने के लिए उसकी अंतरात्मा ने अनुमति नहीं दी. और वह घर बच्चों के पास उड़ कर पहुँच जाने का  अपना अभियान भूल कर उसको डाक्टर के पास ले जाने की सोचने लगी ,उसकी आँखों के सामने वह दृश्य आ गया, जब उसका नन्हा भाई इसी प्रकार एक दुर्घटना का शिकार हो कर असमय ही उनका साथ छोड़ गया था.

रमा को ऑटो  मिल गया था,अतः  बच्चे को लेकर वह चल पडी, रमा अपने घर  भी  खबर नहीं दे पा रही थी,रमा के पति  इस बार छुट्टी न मिलने के कारण दीवाली पर घर नहीं आ सके थे.बेटा 7  वर्ष का 5   वर्ष की बेटी तीन ही सदस्य घर में ,उधर   दीवाली का त्यौहार. डाक्टर का क्लीनिक  थोडा दूर था,बच्चे का खून बह रहा था.रास्ते में उसने रोते  बच्चे से  उसका  नाम पूछा तो उसने बताया कन्हैया नाम है उसका और आज दीवाली पर उसको घर पर बहुत मिठाई और पटाखे ले जाने हैं, पर अभी वह 50 ही कमा सका है.एक बीमार माँ और एक छोटा भाई है उसका.बाप किसी बीमारी से भगवान के घर चला गया ,माँ भी बीमार है,कुछ काम नहीं कर पाती.भाई बहुत छोटा है और उसने अपने भाई से वादा किया था कि बहुत सारे मिठाई और पटाखे लेकर आएगा.अब वह कुछ भी नहीं कर पायेगा.
क्लीनिक  आ गया था,ऑटो वाले की सहायता से रमा कन्हैया को लेकर अंदर पहुँची.डाक्टर ने इंजेक्शन लगाकर,मरहमपट्टी आदि कर उसको खाने की दवाइयां दी .अब रमा कन्हैया को ऑटो में ही उसके घर छोड़ने गई.कन्हैया की बीमार माँ बेटे के पट्टियाँ बंधी देख कर घबरा गई.रमा ने उनको  सब कुछ बताया और अपने साथ लाया  दीवाली का सारा सामान कन्हैया और उसके भाई को देकर आगे के इलाज के पैसे उसको देकर अपने घर पहुँची.कन्हैया की माँ ने  तो आशीर्वाद की झड़ी लगा दी.  रमा की  सारी थकान उड़ गई  . अब वह पुनः ऑटो से घर पहुँचने की जल्दी में थी.
दोनों बच्चे माँ की इंतज़ार कर सो चुके थे ,थोड़ी बहुत तैयारी रमा सुबह ऑफिस जाने से पूर्व करके गई थी,लौटते समय मिठाई भी नहीं ला सकी थी. घर पहुँचते ही रमा के तो होश उड़ गए ये देखकर कि बच्चों ने उसके पीछे  मोमबत्ती जलाई होगी , जिसकी लौ किसी बराबर में रखे एक वस्त्र ने पकड़ ली थी ,थोड़ी दूर पर बच्चे सो रहे थे.बिजली की फुर्ती से उसने उस सुलगते वस्त्र को हटाया ,दृश्य देख कर काँप गई थी रमा.
सामान्य हो कर  थोडा सा हलवा तैयार कर उसने सोते हुए बच्चों को उठाया और दीपक जला कर पूजन किया.बच्चे माँ से चिपट कर रोने लगे उनसे सौरी  कहा  कि वह उनके पटाखे नहीं ला सकी,कल लाने का वादा कर बच्चों को कुछ खिलाकर सुलाया .त्यौहार तो रमा का पति के ना आने के कारण  तथा इस घटना के कारण जोश से नहीं मन सका था परन्तु उसकी आत्मा में शान्ति थी कि उसने किसी परिवार के चिराग को बचाया था और शायद उन्ही दुआओं से उसके घर का चिराग और रौशनी सुरक्षित रहे.बच्चे थोड़ी देर में पुनः सो गए थे. रमा की आँखों की नींद आज के दिन की घटनाओं के कारण उड़ गई थी ,उसका परिवार भले ही दीवाली उल्लास से नहीं मना पाया था परन्तु उसको लगा कि इस बार  की दीवाली पर  अधिक रौशनी है.
(दीवाली का दिव्य पर्व अपने परिवार के साथ धूम धाम से मनाने का आनंद ही कुछ और है,परन्तु किसी को जीवन देना और उसके मुख पर प्रसन्नता लाने का बहुत महत्व है,जो आत्मिक सुख प्रदान करता है.ऐसी ही दीवाली रमा और उसके परिवार की रही)


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69 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

satya sheel agrawal के द्वारा
November 13, 2012

निशा जी .बहुत ही मार्मिक कथा लिख कर,त्यौहार की सार्थकता को उजागर कर दिया है.यही है असली इंसानियत यदि हम अपनी खुशियों के साथ अन्य को भी खुशियाँ दे सकें .बहुत सुन्दर चित्रण

    nishamittal के द्वारा
    October 7, 2013

    आभार आपका

Santosh Kumar के द्वारा
November 13, 2012

आदरणीया ,..सादर प्रणाम बहुत सुन्दर कथा ,..सार्थक सन्देश ,…परहित सरिस धरम नहीं भाई —उत्सव की सच्ची रौशनी यही है ,..कोटिशः अभिनन्दन आपका …आपको दीपपर्व की हार्दिक शुभकामनाएं ,…सादर

seemakanwal के द्वारा
November 12, 2012

फिज़ूलखर्ची छोड़कर अगर किसी की जरूरत पूरी कर दी जाये तो बहुत ख़ास दीपावली हो जाये .बहुत प्रेरक कहानी दीपावली के दीयों से जगमगायें आप के जीवन की राहें.

OM के द्वारा
November 12, 2012

This story is not only a piece of writing but a real source of real light of a human being’s real side of humanity. In each and every human being, there remains two sides of feelings – Good and bad like two sides of a coin and it totally depends on him / her and the then circumstances to choose and apply the side which he / she selects and this story shows the same thing in true and real sense. The Diwali day spent by above mentioned woman was the real and true Diwali celebration. Hats off to this story and story writer.

Madan Mohan saxena के द्वारा
November 12, 2012

बेह्तरीन अभिव्यक्ति .दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये आपको और आपके समस्त पारिवारिक जनो को !

shashibhushan1959 के द्वारा
November 11, 2012

आदरणीय निशा जी, सादर ! एक प्रेरणा दायक कहानी ! ह्रदय को छूने वाली ! कन्हैया के माता के आशीर्वाद और उन बेबसों से मिले आशीर्वाद के आनंद का जो अनुभव रमा को हुआ होगा, वह अद्वितीय होगा ! ऐसे सद्कार्यों का प्रतिफल जीवन में अवश्य मिलता है ! सादर !

    nishamittal के द्वारा
    November 11, 2012

    शशि भूषण जी ,सकारात्मक प्रतिक्रिया हेतु आभार .दीवाली मंगलमय हो आपको और आपके परिवार को.

manjusharma के द्वारा
November 11, 2012

Nisha यह सत्य हा जो दूसरों की मददकरता है भगवन उसकी. मदद करता है. तभी उसका घर बच गया सुंदर लेख Manju Sharma

    nishamittal के द्वारा
    November 11, 2012

    आदरनीय मंजू जी ,आपका धन्यवाद और आपको व आपके परिवार को दीप पर्व की मंगलकामनाएं

yamunapathak के द्वारा
November 9, 2012

निशाजी. नमस्कार यह बहुत सुन्दर ब्लॉग है .पर्व का असली अर्थ

    nishamittal के द्वारा
    November 9, 2012

    धन्यवाद यमुना जी,प्रतिक्रिया बता रही है की आप अत्यधिक व्यस्त हैं धन्यवाद ,मंगलकामनाएं

Alka के द्वारा
November 9, 2012

आदरणीय निशा जी सादर अभिवादन | भावपूर्ण कहानी के माध्यम से दिया गया एक सार्थक सदेश | आपको ज्योतिपर्व की मंगल कामनाएं

    nishamittal के द्वारा
    November 9, 2012

    अलका जी प्रथम प्रतिक्रिया हेतु आभार आपको मंगलकामनाएं

Sushma Gupta के द्वारा
November 9, 2012

आदरणीय निशा जी दीपावली के शुभ -अवसर पर ,आपका सन्देश-प्रधान आलेख ”सोने में सुहागा’ ही प्रतीत हो रहा है, बधाई सहित दीपावली की शुभकामनाएं |

    nishamittal के द्वारा
    November 9, 2012

    सुषमा जी आपकी प्रथम प्रतिक्रिया हेतु आभार

ashishgonda के द्वारा
November 8, 2012

प्रणाम माँ जी!  मैं ये तो नहीं जानता कि इसे कहानी कहे या कोई घटना. पर आज के समय में ऐसे बहुत से लड़के हैं जिनकी माँ बीमार है और वो लेखनी की जगह हथौड़ा उठाने पर विवश हैं. और देश के सत्ताधारी खामोश हैं. श्रीमती रमा जी से सभी को शिक्षा लेनी चाहिए. बहुत सुन्दर सन्देश देती कहानी. ऐसी मार्मिक और शिक्षाप्रद कहानी के लिए ह्रदय से आभार………. आपका पुत्र आशीष

    nishamittal के द्वारा
    November 9, 2012

    धन्यवाद आशीष तुम्हारी प्रतिक्रिया के लिए.

Lahar के द्वारा
November 8, 2012

प्रिय निशा जी सप्रेम नमस्कार हमेसा की तरह इस बार भी अच्छी प्रस्तुति | समय के आभाव के चलते नियमित रूप से आपके ब्लॉग को नहीं पढ़ पता हूँ , लेकिन आपकी लेखनी प्रभावित करती है |

    nishamittal के द्वारा
    November 8, 2012

    लहर महोदय बहुत लम्बे समय बाद आपको मंच पर देखना अच्छा लगा धन्यवाद.शुभकामनाएं दीवाली की.

Madan Mohan saxena के द्वारा
November 8, 2012

बहुत अद्भुत अहसास…सुन्दर प्रस्तुति .पोस्ट दिल को छू गयी…….कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने……….बहुत खूब,

    nishamittal के द्वारा
    November 8, 2012

    धन्यवाद मदनमोहन जी मंगलकामनाएं दीवाली की

    nishamittal के द्वारा
    November 8, 2012

    सिद्दीकी जी आपकी सुन्दर शुभकामनाओं और प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद.दीवाली की मंगलकामनाएं आपको भी

आर.एन. शाही के द्वारा
November 8, 2012

भावपूर्ण, सम्मोहक और मार्मिक कथा के माध्यम से दिया गया संदेश एक दिव्य रौशनी से स्वयं आलोकित है निशा जी । दीवाली का अच्छा तोहफ़ा दिया आपने । गौरीपुत्र गणेश और माँ लक्ष्मी के आशीष से युक्त आपकी दीपावली सपरिवार मंगलमय हो, यही शुभकामना है । धन्यवाद !

    nishamittal के द्वारा
    November 8, 2012

    आदरनीय शाही जी,दीवाली पर बहुत सुन्दर मंगलकामनाओं और प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ.ईश्वर से आपके तथा आपके परिवार के लिए सुख,समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करती हूँ.

jlsingh के द्वारा
November 8, 2012

(दीवाली का दिव्य पर्व अपने परिवार के साथ धूम धाम से मनाने का आनंद ही कुछ और है,परन्तु किसी को जीवन देना और उसके मुख पर प्रसन्नता लाने का बहुत महत्व है,जो आत्मिक सुख प्रदान करता है.ऐसी ही दीवाली रमा और उसके परिवार की रही) आदरणीया महोदया , सादर अभिवादन! बहुत ही कारुणिक, ह्रदय स्पर्शी, और प्रेरक रचना!

    nishamittal के द्वारा
    November 8, 2012

    धन्यवाद सिंह साहब आपकी सुखद प्रतिक्रिया हेतु.

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
November 7, 2012

दीपावली का मतलब केवल घर को रोशन करना नहीं बल्कि हर दिल, हर घर को रोशन करना है। यह कथा निश्चित तौर प्रेरणादायी है। अगर किसी के घर का सुख छिन रहा है तब आप कैसे दीपावली मना सकते हैं। अगर हर कोई यह सोच ले तो फिर हमें मदद मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही इतनी ज्यादा चिंता अपनों के लिए करनी पड़ेगी क्योंकि जब आप कहीं पर किसी की मदद करेंगे तो कोई न कोई आपकी, आपके परिवार की मदद करेगा। ……साभार

    nishamittal के द्वारा
    November 8, 2012

    यही सामजिक जीवन और सौहार्द है,धन्यवाद मंगलकामनाएं दीवाली की

yatindranathchaturvedi के द्वारा
November 7, 2012

अद्भुत,,बधाई स्वीकार करें आदरणीय

    nishamittal के द्वारा
    November 8, 2012

    धन्यवाद चतुर्वेदी जी मंगलकामनाएं

rekhafbd के द्वारा
November 7, 2012

आदरणीया निशा जी दीवाली का दिव्य पर्व अपने परिवार के साथ धूम धाम से मनाने का आनंद ही कुछ और है,परन्तु किसी को जीवन देना और उसके मुख पर प्रसन्नता लाने का बहुत महत्व है,जो आत्मिक सुख प्रदान करता है.ऐसी ही दीवाली रमा और उसके परिवार की रही,,सुंदर सन्देश देती हुई बढ़िया रचना ,दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

    nishamittal के द्वारा
    November 8, 2012

    बिलकुल सही कहा रेखा जी आपने .धन्यवाद मंगलकामनाएं

krishnashri के द्वारा
November 7, 2012

आदरणीय महोदया सादर , सुन्दर सन्देश देती रचना एवं दीपोत्सव की हार्दिक बधाई .

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    आभार श्री कृष्ण जी,आपको भी मंगल कामनाएं

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
November 7, 2012

आदरणीया निशा जी नमस्कार , बहुत सुन्दर कहानी.सचमुच दीपावली में फिजूल खर्ची और प्रदूषण फ़ैलाने से ज्यादा सूकून किसी और जरूरतमंद के जीवन में खुशियाँ देने से मिलता है

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    धन्यवाद भूपेश जी.मंगलकामनाएं दीवाली की

akraktale के द्वारा
November 6, 2012

आदरेया निशा जी                   सादर, बहुत ही सार्थक उद्देश्य को लेकर लिखी गये लघुकथा के लिए धन्यवाद. हाँ कुछ घटनाओं को अनावश्यक जोड़ा गया प्रतीत होता है. विशेषतः घर पर कपड़ों में सुलगती चिंगारी.                    हमें दीपावली तो अवश्य धुम से मनानी चाहिए किन्तु हमारे कारण कुछ और लोग भी दीपावली मना सकें तो यह अधिक आनंददायक होगा. आपको इस लघुकथा कि बधाई और दीपोत्सव के पावन पर्व दीपावली कि हार्दिक शुभकामनाएं.

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    शुभकामनाओं और प्रतिक्रिया हेतु आभार आदरनीय अशोक जी.

phoolsingh के द्वारा
November 6, 2012

निशा जी प्रणाम…… बहुत ही सुंदर कहानी………..बधाई…. फूल सिंह

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    फूल सिंह जी धन्यवाद और मंगलकामनाएं

Rajesh Dubey के द्वारा
November 6, 2012

रमा ने गरीब बच्चे का जीवन बचा कर सचमुच में असली दिवाली मनाई.व्यक्ति को जीवन में असली दीवाली ही मनानी चाहिए.

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    धन्यवाद राजेश जी मंगलकामनाएं दीवाली की

Santlal Karun के द्वारा
November 5, 2012

“इतनी भागमभाग में किसी के पास फुर्सत नहीं थी, जो उस बच्चे को उठाकर कुछ मरहम पट्टी करा सके परन्तु रमा की मानवता ने उसको अनुमति नहीं दी ,खून बहते बच्चे को छोड़ कर जाने के लिए उसकी अंतरात्मा ने अनुमति नहीं दी. और वह घर बच्चों के पास उड़ कर पहुँच जाने का अपना अभियान भूल कर उसको डाक्टर के पास ले जाने की सोचने लगी ,उसकी आँखों के सामने वह दृश्य आ गया, जब उसका नन्हा भाई इसी प्रकार एक दुर्घटना का शिकार हो कर असमय ही उनका साथ छोड़ गया था.” प्रेरक तथा दीपावली पर प्रासंगिक लघु कथा; ज्योति पर्व की मंगल कामनाएँ !

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    हार्दिक आभार एवं पर्व की मंगलकामनाएं

Madan Mohan saxena के द्वारा
November 5, 2012

शब्दों की जीवंत भावनाएं… सुन्दर चित्रांकन पोस्ट दिल को छू गयी…….कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने……….बहुत खूब

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    धन्यवाद, मंगलकामनाएं

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
November 5, 2012

आदरणीया निशा जी, सादर अभिवादन अच्छा करोगे तो अच्छा ही मिलेगा दिवाली की सपरिवार हार्दिक शुभ कामनाएं.

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    सही कहा आपने धन्यवाद और मंगलकामनाएं

vikramjitsingh के द्वारा
November 5, 2012

आदरणीया मातेश्वरी……. जय हो……….दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें…….. ”सियावर रामचंद्र की जय…..पवनसुत हनुमान की जय……

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    विक्रम जी धन्यवाद दीपपर्व मंगलमय हो

bhanuprakashsharma के द्वारा
November 5, 2012

सदभावना का संदेश देती सुंदर कहानी। साथ ही दीपावली की बधाई। 

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    धन्यवाद पर्व की बधाई आपको

sudhajaiswal के द्वारा
November 5, 2012

आदरणीया निशा जी, सादर अभिवादन, इस कहानी के माध्यम से आपने बहुत ही सार्थक सन्देश दिया| किसी को जीवन देकर जो आत्मिक सुख की रौशनी मिलती है वो अनमोल होती है, अच्छे आलेख के लिए बहुत बधाई| साथ ही मेरे करवा चौथ लेख पर आपकी प्रतिक्रिया चाहती हूँ, धन्यवाद|

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    सुधा जी ढ न्य्वाद आपकी प्रतिक्रिया हेतु.मंगलकामनाएं

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    कृपया धन्यवाद पढ़ें

alkargupta1 के द्वारा
November 5, 2012

निशाजी ,इतनी सुन्दर भावनाओं व मानवता पूर्ण कार्यों से दीवाली किसी के अँधेरे जीवन में रोशनी भर दे तो यही उसके लिए त्यौहार का सबसे बड़ा तोहफा है जो रमा को मिला….. दिवाली पर्व पर प्रेरणास्पद कहानी के लिए बधाई ……. दीपावली की असंख्य मंगलकामनाएं

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    धन्यवाद अलका जी,सही कहा त्यौहार का उद्देश्य ही भरपूर खुशियाँ है.जो सबके जीवन में आनी चाहिए,मंगल कामनाएं

vijay के द्वारा
November 5, 2012

आदरणीय माता जी नमस्ते अगर ऊपर वर्णित तरीके से हम सब दिवाली मनाने लग जाये’ तो निश्चित ही समाज से बुराई ख़त्म हो जाये पर आज कल हर त्यौहार पैसे और दिखावे का साधन मात्र बन कर रह गया है दिवाली पर तो लोग अपने अहकार में प्रकर्ति को भी नहीं छोड़ते इतना प्रदूषण की साँस लेने में दिक्कत होने लग जाती है निश्चित ही आपके लेख से लोग त्यौहार की सच्ची ख़ुशी के बारे में चिन्तन करेगे …सुंदर लेख के लिए बधाई

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    आपने सही कहा है,आज त्यौहार प्रदर्शन का साधन रह गए हैं.

vinitashukla के द्वारा
November 5, 2012

दीप- पर्व पर सुन्दर और प्रेरक कथा प्रस्तुत करने के लिए बधाई निशा जी. दीवाली की अनेकानेक शुभकामनाएं.

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    आभार विनीता जी.पर्वकी मंगलकामनाएं

yogi sarswat के द्वारा
November 5, 2012

ये करोड़ों रुपये फूंक कर मनाई जाने वाली दीवाली से भी कीमती और जोश की दीवाली रही रमा और उनके परिवार के लिए ! ये वक्त है – दीवाली आगे भी आएगी , लेकिन ऐसा मानवता का कार्य जीवन के उद्देश्य को पूरा कर देता है ! दीवाली अगर , हर कोई इस तरह से मनाना शुरू कर दे तो लोगों के जीवन में खुशियाँ ही खुशिया बिखरती रहेंगी ! शुभ त्यौहार दीपावली के अवसर पर आपने सुन्दर कथा का उपहार दिया आदरणीय निशा जी मित्तल ! सादर

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    योगी जी,सर्वप्रथम धन्यवाद सकारात्मक प्रतिक्रिया हेतु और मंगलकामनाएं पर्व की

sumit के द्वारा
November 5, 2012

सुंदर प्रस्तुती …साथ में दीपावली की शुभ कामनाएं

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    धन्यवाद सुमित जी.मंगलकामनाएं

November 5, 2012

ममता मयी प्रणाम ,बहुत ही अच्छी प्रस्तुति ,बहुत ही अच्छे भाव, शुभ दीपावली की हार्दिक शुभकामना सहित बधाई ,,,,,,,,,,,दोनों बच्चे माँ की इंतज़ार कर सो चुके थे ,थोड़ी बहुत तैयारी रमा सुबह ऑफिस जाने से पूर्व करके गई थी,लौटते समय मिठाई भी नहीं ला सकी थी. घर पहुँचते ही रमा के तो होश उड़ गए ये देखकर कि बच्चों ने उसके पीछे मोमबत्ती जलाई होगी , जिसकी लौ किसी बराबर में रखे एक वस्त्र ने पकड़ ली थी ,थोड़ी दूर पर बच्चे सो रहे थे.बिजली की फुर्ती से उसने उस सुलगते वस्त्र को हटाया ,दृश्य देख कर काँप गई थी

    nishamittal के द्वारा
    November 7, 2012

    धन्यवाद हिमांशु जी कहानी पसंद करने के लिए मंगलकामनाएं


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