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अमर कर्मयोगी (श्री राजीव दीक्षीत)जयंती एवं पुण्य तिथि ३० नवम्बर पर

Posted On: 28 Nov, 2012 Others में

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(एक दिन किसी विषय पर चर्चा के मध्य जब मेरे द्वारा श्री राजीव दीक्षित जी की चर्चा की गई तो ऐसा लगा कि उनके संदर्भ में कुछ भ्रांतियां हैं,और न ही आम आदमी को  कोई विशेष जानकारी है.ये जानकर दुःख हुआ कि जिस व्यक्ति ने अपनी उच्च शिक्षा ,अपना करियर ,सब कुछ अपने देश के लिए न्यौछावर कर दिया,उनके प्रति इतनी उपेक्षा.यही सोचकर  जन्मतिथि ,उनकी पुण्य तिथि 30 नवम्बर पर कुछ जानकारी साझा कर रही हूँ )

Swadeshi

जन्म -मृत्यु एक तिथि को ही होना क्या विचित्र संयोग है.श्री राधे श्याम जी एवं श्रीमती मिथलेश जी के ज्येष्ठ पुत्र राजीव दीक्षित जी के जीवन का ऐसा ही संयोग रहा.पुत्र के जन्म पर परिवार में जिस दिन  खुशियाँ मनाई जाती रही होंगी,वही दिन इतनी  छोटी सी आयु में ही  उनकी पुण्य तिथि बन जाएगा , ऐसा कभी किसी ने विचार भी नहीं किया होगा. 30  नवम्बर 1967 को अलीगढ में अतरोली तहसील स्थित ग्राम नाह में जन्मे राजीव जी पर  परिवार के संस्कारों का पूर्ण प्रभाव था.स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार में जन्मे राजीव जी   महान क्रांतिकारी भगत सिंह ,उधम सिंह जी ,आज़ाद,बिस्मिल  तथा अन्य क्रांतिकारियों के विचारों से अत्यधिक प्रभावित थे.महात्मा गांधी की स्वदेशी विचारधारा तथा ग्रामीण उत्थान की अवधारणा उनके अंतरतम को स्पर्श करती थी.

ग्रामीण पाठशाला में प्राम्भिक शिक्षा प्राप्त कर फिरोजाबाद से १२ वी की परीक्षा में सफलता प्राप्त करते हुए राजीव जी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी टेक तथा I I T कानपुर से एम् टेक का  सम्मान   प्राप्त कर ये  सुनिश्चित किया कि उच्च शिक्षा में भी ग्रामीण परिवेश के मेधावी विद्यार्थी भी किसी भी शिखर  पर पहुँचने  में सफल हो  सकते हैं,और मेधा किसी परिवेश विशेष की मोहताज नहीं होती .अपने पिता के स्वप्नों को साकार करने के लिए आपने अपनी शिक्षा-दीक्षा के अनुरूप C.S.I.R. तथा फ़्रांस टेलीकम्युनिकेशन सेंटर में कार्य किया.देश के महान राष्ट्रपति तथा मिसाईल पुरुष के नाम से प्रसिद्ध वैज्ञानिक अब्दुल कलाम जी  के साथ कार्य करते हुए देश सेवा वैज्ञानिक के रूप में भी की परन्तु उन्होंने जनता को जागरूक कर देश की समस्याओं को दूर करने तथा स्वदेशी की अलख जगाने का निश्चय किया. ये जूनून उनके ह्रदय में  अत्यधिक प्रबल था .
1984  में  भोपाल गैस कांड का दारुण दुःख जनता को झेलना पड़ा और सरकार द्वारा दोषियों के विरुद्ध कड़ी न तो  ठोस  कार्यवाही  की गई  और न ही  पीड़ितों के प्रति कोई विशेष संवेदनशील व्यवहार रहा ,इस घटना से उनका आक्रोश बहुत बढ़ा और  राजीव जी ने प्राणपण से पीड़ितों की सेवा के लिए कार्य किया..
गांधी जी की कर्मभूमि वर्धा में रहते हुए आपने  इतिहास के प्रकांड पंडित तथा भारतीय सभ्यता और संस्कृति के यथार्थ से देश दुनिया को परिचित करने का निश्चय लिए हुए  धर्मपाल जी के सानिध्य में बहुत कार्य किया  और इसी कार्य को अपना मिशन बनाया.
. सादगी की प्रतिमूर्ति,तथा अपरिग्रही राजीव जी   मात्र दो जोड़ी खादी वस्त्र में ही अपने मिशन स्वदेशी का प्रचार प्रसार तथा भारतीय सभ्यता और संस्कृति के प्रति देश की जनता को परिचित कराने के लिए भ्रमण करते रहे .स्वावलंबन के समर्थक वह अपने समस्त कार्य स्वयं करते थे. होमियोपैथी के चिकित्सक  होने के साथ-साथ उनको स्वदेशी पद्धति  आयुर्वेद का  भी ज्ञान था.
भाई राजीव जी ने मात्र 43  वर्ष की आयु में ही बहुत से ऐसे कार्य किये  जो उनको सबका चहेता बनाते हैं, इनमें प्रमुख हैं
1991 में डंकल प्रस्तावों के खिलाफ घूम घूम कर जन जाग्रति की और रेलियाँ निकाली |

1991-92 में राजस्थान के अलवर जिले में केडिया कंपनी के शराब कारखानों को बंद करवाने में भूमिका निभाई | 1995-96 में टिहरी बाँध के खिलाफ ऐतिहासिक मोर्चा और संघर्ष किया जहाँ भयंकर लाठीचार्ज में काफी चोटें आई | टिहरी पुलिस ने तो राजीव भाई को मारने की योजना भी बना ली थी| 1987 में सेवाग्राम आश्रम, वर्धा में प्रसिद्ध गाँधीवादी, इतिहासकार श्री धर्मपाल जी के सानिध्य में अंग्रेजो के समय के ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन करके देश को जागृत करने का काम किया | उन्होंने भारतीयों के सहस्त्र वर्षों की   मानसिक, सामाजिक , आर्थिक व राजनीतिक गुलामी के कारण भारतीयों में व्याप्त आत्महीनता की भावना को दूर करने और उनमें दोबारा आत्म-गौरव की जागृति  के लिए , सनातन भारतीय संस्कृति को विदेशी दुष्प्रभाव व देश को विदेशी कंपनियों की लूट से बचाने के लिए ”स्वदेशी बचाओ आन्दोलन” को प्रारंभ किया . साथ ही उन्होंने देश में स्वदेशी जनरल स्टोरों की श्रंखला खोलने पर भी जोर दिया जहाँ केवल भारतीय वस्तुओं की ही बिक्री की जाएगी . देश में सबसे पहली स्वदेशी-विदेशी सूची की सूची तैयार करके स्वदेशी अपनाने पर बल दिया. वह प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने जनता को स्विस बैंकों मे जमा भारतीय काले धन के बारे में बताया और उसे वापस लाने का मार्ग भी बताया . उन्होंने पेप्सी, कोका-कोला,  कोलगेट-पामोलिव, आई.टी.सी. , हिंदुस्तान लीवर जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की पोल खोली. इनके विरुद्ध  उन्होंने  हाई-कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में केस भी लड़े और  इस लड़ाई में उन्हें जेल भी जाना पड़ा लेकिन उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा. स्विस बैंक में जमा काले-धन को वापस लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने के लिए उन्होंने 40,00,000 लोगों के हस्ताक्षर भी एकत्रित किये . उन्होंने जनवरी 2009 में “भारत स्वाभिमान न्यास” कि स्थापना कि तथा इसके राष्ट्रीय प्रवक्ता तथा राष्ठ्रीय सचिव बने | स्वाभिमान ट्रस्ट विश्वविख्यात योग गुरू बाबा रामदेव की योग क्रांति को देश के सभी 638365 गांवों तक पहुंचाने तथा स्वस्थ, समर्थ एवं संस्कारवान भारत के निर्माण के लक्ष्यों को लेकर स्थापित  एक ट्रस्ट है। इसका उद्देश्य भ्रष्टाचार, गरीबी, भूख, अपराध, शोषण मुक्त भारत का निर्माण कराना है उन्होंने ही बताया की हमारे द्वारा खून पसीने की कमी से दिए गए टेक्सों का 80 % हिस्सा तो नेताओं और नौकरशाही के ऊपर ही खर्च हो जाता है और केवल 20 % हिस्सा ही विकास कार्यों में लगता है . यही व्यवस्था अंग्रेज राज के समय से चली आ रही थी, जो अभी तक चल रही है .सबसे दुखद तो ये है कि अंग्रेज तो आये ही लूटने थे परन्तु अब हमको वो लूट रहे हैं,जो हमारे प्रतिनिधि बनकर भाग्य विधाता बने हैं. भारत को विश्व की आर्थिक महाशक्ति बनाने को संकल्पित ‘भारत-स्वाभिमान’ के उद्देश्यों को प्रचारित-प्रसारित करते हुए भ्रमण के समय आप को हृदयाघात हुआ और आपने अपने कर्मक्षेत्र में प्राणों का उत्सर्ग कर भारत मां को आर्थिक गुलामी से मुक्त करवाने हेतु अपना बलिदान कर दिया।   काल के क्रूर पंजो से  उन्हें छीन लिया.जिसकी आवश्यकता भूलोक पर है लगता है ईश्वर भी उन्ही को अधिक प्रेम करते हैं.

अपनी     मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त कर तथा उसको सम्मान प्रदान कर जितनी उपलब्धियों से हम लाभान्वित हो सकते  हैं उतना विदेशी भाषाओँ के आधार पर नहीं.स्वदेशी की महत्ता को उन्होंने विविध दृष्टान्तों से समझाया  , इस संदर्भ में उन्होंने भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम तथा अन्य वैज्ञानिकों के   भी उदाहरण दिए  और कहा,.……………. उच्च तकनीकी क्षेत्र जैसे उपग्रह निर्माण, जिसे उच्च तकनीक कहा जाता जो बहुत कठिन एवं क्लिष्ट तकनीक होती है, उसमें आज तक कोई विदेशी कंपनी इस देश में नहीं आई. भारत जिसने  1995 में  एक आर्यभट्ट नामक  उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़ा एवं उसके उपरांत हमारे अनेकों उपग्रह अंतरिक्ष में गए है . अब तो हम दूसरे देशों के उपग्रह भी अंतरिक्ष में छोड़ने लगे है इतनी तकनीकी का विकास इस देश में हुआ है यह संपूर्ण स्वदेशी पद्दति से हुआ है, स्वदेशी के सिद्धांत पर हुआ है एवं स्वदेशी आंदोलन की भावना के आधार पर हुआ है . इसमें जिन वैज्ञानिकों ने कार्य किया है वह स्वदेशी, जिस तकनीकी का उपयोग किया गया है वह स्वदेशी, जो कच्चा माल उपयोग किया गया है वह स्वदेशी, इसमें जो तकनीक एवं कर्मकार लोगों का सहयोग प्राप्त हुआ वह सब स्वदेशी, इनको अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करने हेतु जो कार्य हुआ है वह भी हमारी प्रयोगशालाएं स्वदेशी इनके नियंत्रण का कार्य होता है वह प्रयोगशालाएं भी स्वदेशी तो यह उपग्रह निर्माण एवं प्रक्षेपण का क्षेत्र स्वदेशी के सिद्धांत पर आधारित है .एक और उदाहरण है ” प्रक्षेपास्त्रों के निर्माण ” (मिसाइलों को बनाने) का क्षेत्र आज से तीस वर्ष पूर्व तक हम प्रक्षेपास्त्रों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर थे या तो रूस के प्रक्षेपास्त्र हमे मिले अथवा अमेरिका हमको दे किंतु पिछले तीस वर्षों में भारत के वैज्ञानिकों ने विशेष कर ” रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ” (डी.आर.डी.ओ.) के वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम कर प्रक्षेपास्त्र बनाने की स्वदेशी तकनीकी विकसित की 100,200 500  … से आगे बढ़ते हुए आज हमने 5000 किमी तक मार करने की क्षमता वाले प्रक्षेपास्त्रों को विकसित किया है . जिन वैज्ञानिकों ने यह पराक्रम किया है, परिश्रम किया है वह सारे वैज्ञानिक बधाई एवं सम्मान के पात्र है, विदेशों से बिना एक पैसे की तकनीकी लिए हुए संपूर्ण स्वदेशी एवं भारतीय तकनीकी पद्दति से उन्होंने प्रक्षेपास्त्र बना कर विश्व के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया . महत्व की बात उनके बारे में यह है की वह सब यहीं जन्मे, यहीं पले-पढ़े, यहीं अनुसंधान (रिसर्च) किया एवं विश्व में भारत को शीर्ष पर स्थापित कर दिया .

श्री ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, भारत में प्रक्षेपास्त्रों की जो परियोजना चली उसके पितामहः माने जाते है . श्री ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी से जब एक दिवस पूछा गया  कि  आप इतने महान वैज्ञानिक बन गए, इतनी उन्नति आपने कर ली, आप इसमें सबसे बड़ा योगदान किसका मानते है, तो उन्होंने उत्तर दिया था कि  ” मेरी पढ़ाई मातृभाषा में हुई है अतः  मैं इतना ऊँचा वैज्ञानिक बन सका हूँ “, आपको ज्ञात होगा कलाम जी की १२ वीं तक की पढ़ाई तमिल में हुई है , उसके उपरांत उन्होंने थोड़ी बहुत अंग्रेजी सीख स्वयं को उसमें भी दक्ष बना लिया किंतु मूल भाषा उनकी पढ़ाई की तमिल रही . कलाम जी के अतिरिक्त इस परियोजना में जितने और भी वैज्ञानिक है उन सभी की मूल भाषा मलयालम, तमिल, तेलगु, कन्नड़, बांग्ला, हिंदी, मराठी, गुजराती आदि है अर्थात हमारी मातृभाषा में जो वैज्ञानिक पढ़ कर निकले उन्होंने स्वदेशी तकनीकी का विकास किया एवं देश को सम्मान दिलाया है . परमाणु  अस्त्र  निर्माण एवं परीक्षण  भी श्री होमी भाभा द्वारा स्वदेशी तकनीकी विकास के स्वप्न, उसको पूर्ण करने हेतु परिश्रम की ही देन है . अब तो हमने परमाणु अस्त्र निर्माण एवं परीक्षण  के अतिरिक्त उसे प्रक्षेपास्त्रों पर लगा कर अंतरिक्ष तक भेजने में एवं आवश्यकता पढ़ने पर उनके अंतरिक्ष में उपयोग की सिद्धि भी हमारे स्वदेशी वैज्ञानिकों ने अब प्राप्त कर ली है . यह भी संपूर्ण स्वदेशी के आग्रह पर हुआ है . अब तो हमने पानी के नीचे भी परमाणु के उपयोग की सिद्धि प्राप्त कर ली है ,संपूर्ण स्वदेशी तकनीकी से निर्मित अरिहंत नामक परमाणु पनडुब्बी इसका ज्वलंत प्रमाण है | जल में, थल में, अंतरिक्ष में हमने विकास किया | यह सारी विधा का प्रयोग स्वदेशी वैज्ञानिकों ने किया, स्वदेशी तकनीकी से किया, स्वदेशी आग्रह के आधार पर किया एवं स्वदेशी का गौरव को संपुर्ण विश्व में प्रतिष्ठापित किया | यह कार्य उच्च तकनीकी के होते है प्रक्षेपास्त्र, उपग्रह, परमाणु विस्फोटक पनडुब्बी, जलयान, जलपोत महा संगणक (सुपर कंप्यूटर) निर्माण आदि एवं इन सब क्षेत्रों में हम बहुत आगे बढ़ चुके है स्वदेशी के पथ पर | स्वदेशी के स्वाभिमान से ओत प्रोत भारत के महा संगणक यंत्र ” परम 1000 (super 1000) ” के निर्माण के जनक विजय भटकर (मूल पढ़ाई मराठी ) की कथा सभी भारतियों को ज्ञात है, उनके लिए प्रेरक है . इतने सारे उदाहरण देने के पीछे एक ही कारण है वह यह की भारत में तकनीकी का जितना  विकास हो रहा है वह सब स्वदेशी के बल से हो रहा है, स्वदेशी आग्रह से हो रहा, स्वदेशी गौरव एवं स्वदेशी अभिमान के साथ हो रहा है ..नवीन तकनीकी हमको कोई ला कर नहीं देने वाला, विदेशी देश हमे यदि देती है तो अपनी 20 वर्ष पुरानी तकनीकी जो उनके देश में अनुपयोगी, फैकने योग्य हो चुकी है . इसके उदाहरण है जैसे कीटनाशक, रसायनिक खाद निर्माण की तकनीकी स्वयं अमेरिका में बीस वर्ष पूर्व से जिन कीटनाशकों का उत्पादन एवं विक्रय बंद हो चुका है, एवं उनके कारखाने उनके यहाँ अनुपयोगी हो गए है . अमेरिका 142  विदेशी कंपनियों के इतने गहरे गहरे षड्यंत्र चल रहे है ,इन्हें समझना हम प्रारंभ करे अपनी आंखे खोले, कान खोले दिमाग खोले एवं इनसे लड़ने की तैयारी अपने जीवन में करे भारत स्वाभिमान इसी के लिए बनाया गया एक मंच है जो इन विदेशी कंपनियों की पूरे देश में पोल खोलता है एवं पूरे देश को इनसे लड़ने का सामर्थ्य उत्पन्न करता है , हमे इस बात का स्मरण रखना है की इतिहास में एक भूल हो गई थी जहांगीर नाम का एक राजा था उसने एक विदेशी कंपनी को अधिकार दे दिया था, इस देश में व्यापार करने का परिणाम यह हुआ की जिस कंपनी को जहांगीर ने बुलाया था उसी कंपनी ने जहांगीर को गद्दी से उतरवा दिया एवं वह कंपनी इस देश पर अधिकार कर लिया 06  लाख 32  सहस्त्र 781 क्रांतिकारियों ने अपने बलिदान से उन्हें भगाया था .

30 नवम्बर को उनकी जयंती तथा पुण्य तिथि पर उनको सच्ची  श्रद्धांजली यही हो सकती है कि हम मानसिक गुलामी से मुक्त हो कर अपनी गौरवपूर्ण संस्कृति और सभ्यता के महत्व को समझें ,उस पर गर्व करें तथा समाविष्ट विकृतियों को दूर करते हुए भारत को पुनः विश्व गुरु के पद पर आसीन करें.अपनी भाषा हिंदी को अपनाएँ,तथा मैकाले के षड्यंत्र को समझें और विदेशी मकडजाल से मुक्त हों ,भ्रष्टाचारमुक्त भारत का निर्माण हो तथा .सम्पूर्ण भारत में यही दृश्य हो

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत् ।।

(राजीव जी  से सम्बन्धित समस्त जानकारी नेट पर उपलब्ध है., नेट से  तथा पुस्तकों से ही ली गई है  एक विनम्र आग्रह कि इस विचारधारा को किसी  व्यक्ति विशेष  या पार्टी विशेष से न जोड़ते हुए देश  हित के दृष्टिकोण से विचार  करें )

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56 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Santosh Kumar के द्वारा
December 8, 2012

आदरणीया ,..सादर प्रणाम लेख पहले भी पढ़ा था ,.तब प्रतिक्रिया नहीं दे पाया था ,.आज दुबारा आया तो बढ़ी सार्थकता मिली ,…जागरूक करती पोस्ट के लिए हार्दिक अभिनन्दन ,..भाई राजीव जी का त्याग समर्पण और देशप्रेम हमारे लिए प्रेरणादायक है ,..उनके असमय निधन से अपूरणीय क्षति हुई है ,..उनको शत शत अभिनन्दन !

    nishamittal के द्वारा
    December 8, 2012

    धन्यवाद संतोष जी,ऐसी विभूतियों पर क्या लिखा जा सकता है,एक प्रयास श्र्द्धापुष्प समर्पण का

December 6, 2012

आधुनिक भारत के प्रेरणाश्रोत भाई राजीव दीक्षित जी की जय !

    nishamittal के द्वारा
    December 6, 2012

    वन्दे मातरम् और आभार पढने के लिए ,पहली बार

lokesh singh के द्वारा
December 6, 2012

आदरणीय राजीव जी युग पुरुष थे ,जिनके विचारो की ज्योति से विदेशी कम्पनियों के तथा काले धन के संरक्षक कांपते थे कांपते है कांपते रहेंगे ,ये ज्योति कब बन्वाग्नी बनके इनको नष्ट कर देगी इन्हे पता भी नहीं चलेगा , एक क्रांति का सूत्रपात हो चुका है विजय स्वदेशी राष्ट्रवादियो की ही होगी , जय माँ भारती ……

    nishamittal के द्वारा
    December 6, 2012

    अवश्य होगी देशवासियों को जगाने का प्रयास जारी रखने पर .धन्यवाद

snsharmaji के द्वारा
December 5, 2012

 आप का लेख काफी ज्ञान वर्धक लगा   कर्म योगी को नमन

    nishamittal के द्वारा
    December 6, 2012

    सादर आभार शर्मा जी

vinitashukla के द्वारा
December 3, 2012

एक महान और कर्मठ शख्सियत से रूबरू करने के लिए आभार निशा जी.

    nishamittal के द्वारा
    December 3, 2012

    आपका धन्यवाद विनीता जी

Sushma Gupta के द्वारा
November 30, 2012

निशा जी, राजीव दीक्षित जी की पुण्य-तिथि पर आपके द्वारा दी गई जानकारियाँ अत्यंत बहुमूल्य है,उनकी पुण्य -तिथि पर शत -शत नमन..

    nishamittal के द्वारा
    November 30, 2012

    धन्यवाद सुषमा जी.

Santlal Karun के द्वारा
November 30, 2012

आदरणीया निशा जी, श्री राजीव जी दीक्षित को आस्था चैनल पर स्वामी रामदेव के सहयोगी के रूप में मैंने कई बार सुना है, किन्तु मेरा स्थानान्तरण हुआ और वह क्रम टूट गया | आज सहसा आप के लेख से उनके देहांत हो जाने की जानकारी से दिल को बड़ा धक्का लगा | उनका सप्रमाण, विद्वातापूर्वक बोलने वाला स्वाभिमानी व्यक्तित्व आखों के सामने घूम गया | निश्चित ही वे हमारे देश के रत्न-व्यक्तित्व थे | उन पर लिखा गया आप का यह लेख मुझ-जैसे अनभिज्ञ के लिए अत्यंत पठनीय है | I इस पुनीत लेख के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सदभावनाएँ !

    nishamittal के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरनीय संतलाल जी,यदि वो कोई सरकारी हस्ती होते तो निश्चित रूप से मीडिया और सरकारी स्त्रोत उनको भगवन बना देते परन्तु उन्होंने स्वदेशी और काले धन के विरुद्ध आवाज बुलंद की थी तो चर्चित कैसे हो सकते थे.आभार

satish mittal के द्वारा
November 30, 2012

नमस्कार मैडम / मेने भी आस्था चेनल पर रामदेव के साथ स्वदेशी पर राजीव जी को बोलते सूना हें / जब भी वो आंकड़े देते थे तो सचमुच आश्चर्य होता था / अभी हाल ही में आस्था चेनल से ही पता लगा की उनकी म्रत्यु हो गयी हें / उनकी शिक्षा के बारे में आपसे पता लगा / और भी कई रोचक जानकारी आपके इस पोस्ट में हें / ऐसी विभूति बिरली ही होती हें / मेरी और से उनको नमन

    nishamittal के द्वारा
    November 30, 2012

    सतीश जी,असलियत ये है कि आधुनिक पीढ़ी में ऐसे महान संकल्पित ,विद्वान् लोग बिरले ही होते हैं,उनकी क्षति अपूर्णीय है.धन्यवाद

yogi sarswat के द्वारा
November 30, 2012

आदरणीय निशा जी मित्तल , पहले एक बात की श्री राजीव भाई मेरे अपने गृह जनपद से हैं तो निश्चित रूप से इस बात का गर्व होता है की अलीगढ की जमीन सिर्फ शिक्षा शास्त्रियों को ही जन्म नहीं देती वरन कर्मयोगी भी उस जगह से पैदा होकर विश्वभर में नाम कमाते हैं ! पहले मैं राजीव जी को नहीं जानता था , पहले करीब २ साल पहले ! मेरे एक मित्र ने इस विषय पर बात करी थी लेकिन कोई रूचि नहीं थी ! एक दिन उसी मित्र ने अपने मोबाइल में उनके व्याख्यान सुनाये और सच मानिए वो व्याख्यान इतने प्रभावित करने वाले थे की मन हुआ की पूरा सुनूं ! और मैं हमेशा उन्हें बस में आते जाते सुनता हूँ ! मैं लेख के माध्यम से उनके विषय में बहुत कुछ जान पाया ! ऐसे कर्मयोगी की आज पुन्य्थिथि है , ऐसे में हम सिर्फ यही कर सकते हैं की विदेशी माल से जितना हो सके , तौबा कर लें ! यह भी एक तरह की राष्ट्रभक्ति ही होगी ! मैंने आपका लेख कल ही पढ़ liya था लेकिन प्रतिक्रिया के लिए आज का दिन जान बूझकर चुना !

    nishamittal के द्वारा
    November 30, 2012

    योगी जी मुझको तो ढंग से पता ही उनकी मृत्यु के बाद चला/आई आई टी कानपुर से एम् टेक कर इतने प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करके स्वयं को देश के लिए न्यौछावर कर दे.आश्चर्य.और व्याखानों का तो कोई जवाब ही नहीं/धन्यवाद उत्तर देने के लिए.

bhanuprakashsharma के द्वारा
November 30, 2012

हम मानसिक गुलामी से मुक्त हो कर अपनी गौरवपूर्ण संस्कृति और सभ्यता के महत्व को समझें ,उस पर गर्व करें तथा समाविष्ट विकृतियों को दूर करते हुए भारत को पुनः विश्व गुरु के पद पर आसीन करें.अपनी भाषा हिंदी को अपनाएँ,तथा मैकाले के षड्यंत्र को समझें और विदेशी मकडजाल से मुक्त हों ,भ्रष्टाचारमुक्त भारत का निर्माण हो तथा .सम्पूर्ण भारत में यही दृश्य हो। आदरणीय निशा जी, राजीव जी के बारे में जानकारी देने पर आपका आभार। साथ ही ऐसी विभूति को नमन। 

    nishamittal के द्वारा
    November 30, 2012

    पोस्ट को समय देने के लिए धन्यवाद भानु जी.

mayankkumar के द्वारा
November 30, 2012

आपका लेखन पढ़ कृतज्ञ हुआ …….. सधन्यवाद !!

    nishamittal के द्वारा
    November 30, 2012

    DHNYVAD MAYANK

rekhafbd के द्वारा
November 29, 2012

आदरणीया निशा जी 30 नवम्बर को उनकी जयंती तथा पुण्य तिथि पर उनको सच्ची श्रद्धांजली यही हो सकती है कि हम मानसिक गुलामी से मुक्त हो कर अपनी गौरवपूर्ण संस्कृति और सभ्यता के महत्व को समझें ,उस पर गर्व करें तथा समाविष्ट विकृतियों को दूर करते हुए भारत को पुनः विश्व गुरु के पद पर आसीन करें.अपनी भाषा हिंदी को अपनाएँ,तथा मैकाले के षड्यंत्र को समझें और विदेशी मकडजाल से मुक्त हों ,भ्रष्टाचारमुक्त भारत का निर्माण हो तथा .सम्पूर्ण भारत में यही दृश्य हो,आदरनीय राजीव जी को नमन ,उनके बारे जानकारी देने पर हार्दिक आभार

    nishamittal के द्वारा
    November 30, 2012

    आभार रेखा जी.

Ravindra K Kapoor के द्वारा
November 29, 2012

निशाजी श्री राजीव दीक्षीतजी का देश प्रेम और उनके कार्यों को जनमानस में उजागर कर आपने एक बहूत ही उत्कृष्ट कार्य किया है. मैं इस पुण्यआत्मा को नमन करता हूँ और आशा करता हूँ की देश की युवा पीढ़ी जिनके ऊपर आने वाले भारत के भविष्व की नींव हम रख रहे हैं, ऐसे कर्मठ और साचे भारतीय से प्रेरणा लेगी. आपने श्री राजीवजी दीक्षीत के कार्यों और प्रयासों को इस मंच पर रख कर जो सुन्दर कार्य किया है उसके लिए हम सभी आपके आभारी हैं. उनके परिवार के लोगों के दुःख को समझना इतना आसान भलेही न हो, पर ऐसे होनहार पुत्र के असमय निधन पर हम सभी अपनी संवेदना व्यक्त कर उन्हें देश के इस होनहार पुत्र के कार्यों पर गर्व करने का अहसास भी दिलाना चाहते हैं. सुभकामनाओं के साथ …रवीन्द्र

    nishamittal के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरनीय रविन्द्र जी अपने लिए सभी जीते हैं परन्तु देश के लिए जीने वाले बिरले होते हैं.धन्यवाद

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
November 29, 2012

आदरणीया निशा जी, सादर अभिवादन में आपका व्यक्तिगत तौर पर अत्यंत आभारी हूँ . एक दो बार नाम सुना था . इनका काम नहीं मालूम था. आपने ध्यान दिलाया और ये जानकारी मुझे प्रथम बार हुई, इसे स्वीकार करने में मुझे कोई शर्म नहीं. धन्यवाद, बधाई. नमन दोनों को. सादर

    nishamittal के द्वारा
    November 30, 2012

    आदरनीय कुशवाह जी ,कोई आश्चर्य की बात नहीं ,मुझको भी उनके दुखद निधन के पश्चात इस विषय में जानकारी मिली थी.आभार आपका

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
November 29, 2012

श्रद्धेया निशा जी , सादर अभिवादन !….. बस इतना ही कहूंगा …… आपने बड़ा ही पुण्य का काम किया , यह अत्यंत ही श्लाघनीय और प्रशंसनीय कार्य है ! टी.वी. पर मैं भी इनका कार्यक्रम देखा करता था ! बहुत-बहुत आभार !!

    nishamittal के द्वारा
    November 29, 2012

    आभार आचार्य जी.

Tufail A. Siddequi के द्वारा
November 29, 2012

आदरणीय निशा जी सादर अभिवादन, बहुत ज्ञानवर्धक पोस्ट. आज हमारे देश को दीक्षित जी जैसे लोगों की खासी जरुरत है. मैंने इन्हें टी.वी. पर देखा और सुना है. जब भी इनके कार्यक्रम आते, तो फिर वहां से उठने या फिर दूसरा चैनल बदलने को बिलकुल मन नहीं होता था. दुनिया से विदाई की बात सुनकर यकीन ही नहीं हुआ था. लेकिन नियति के आगे तो किसी की नहीं चली है. इनके व्यक्तित्व की जितनी प्रशंसा की जाये, कम है. आपको बहुत बधाई. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

    nishamittal के द्वारा
    November 29, 2012

    आपने सही कहा है,लगता है जिनकी पृथ्वी पर जरूरत होती है उन्ही को ऊपर वाला बुला लेता है.धन्यवाद सिद्दीकी जी.

Mohinder Kumar के द्वारा
November 29, 2012

निशा जी, मुझे भी आपके लेख के माध्यम से ही यह जानकारी मिल पाई. सार्थक सारग्रभित लेख के लिये आभार.

    nishamittal के द्वारा
    November 29, 2012

    मोहिन्दर जी ऐसे व्यक्ति के विषय में जानकारी होना जरूरी है,जिस युवक ने आई आई टी कानपूर से एम् टेक किया हो ,इतनी सारी अतिरिक्त योग्यताएं जिसके पास हों वह देश के लिए स्वयं को समर्पित कर दे,अविवाहित रहते हुए वास्तव में धन्य है.धन्यवाद

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
November 29, 2012

निशा जी .मुझे ख़ुशी है आपके माध्यम मैं देश के अच्छे सपूत (राजीव जी ) के बलिदानों के बारे में जान पाया उसके लिए आपका आभारी हूँ.उनके विचार वास्तव में अनुकरणीय हैं.जिस व्यक्ति को दुनिया की समस्त वस्तुएं मात्र एक इशारे पर उपलब्ध हों, उसमे त्याग की भावना हो यह अविश्वसनीय सा लगता है.

    nishamittal के द्वारा
    November 29, 2012

    सही कहा आपने परन्तु ये वास्तविकता है,आज के युग में ऐसी हस्तियाँ दुर्लभ हैं.धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
November 29, 2012

आदरणीया निशा महोदया, सादर अभिवादन! आदरणीय राजीव जी भारत स्वाभिमान आंदोलन से जुड़े एक महान सदस्य थे. जिनके कहे को आज भी सुनकर देश प्रेम कि भावनाएं प्रबल हो उठती है. ऐसे व्यक्ति को उसकी जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित हैं. बाबा रामदेव के शिविर एवं भारत स्वाभिमान न्यास के मंच से उन्हें सुना करता था. भगवन ऐसे लोगों को बहुत जल्द अपने पास बुला लेता है! दुःख इसी बात का होता है की हमारे देश में एक से बढ़कर एक प्रतिभाशाली महापुरुष हुए, पर हमारा देश उनसे सही लाभ नहीं ले पा रहा है दोषी चाहे जो भी हो!…… जानकारी साझा करने के लिए आभार.

    nishamittal के द्वारा
    November 29, 2012

    बिलकुल सही कहा आपने ,दुर्भाग्य से मैंने उनको नहीं सुना,परन्तु पता चलने पर वेबसाईट पर देखा,पता चला आज भी ऐसे कर्मयोगी जन्म लेते हैं.धन्यवाद

meenakshi के द्वारा
November 28, 2012

निशा जी सप्रेम अभिवादन ! आपके सभी विचार सभी आलेख ज्ञान के भण्डार होतें है | श्री राजीव दीक्षित जी के बारे में आपने महत्वपूर्ण जानकारी देकर नेक कार्य किया है . बहुत-२ बधाई ! मीनाक्षी श्रीवास्तव

    nishamittal के द्वारा
    November 29, 2012

    आपको लेख पसंद आया, धन्यवाद मीनाक्षी जी.

akraktale के द्वारा
November 28, 2012

आदरेया निशा जी                      सादर, आदरणीय राजीव जी भारत स्वाभिमान आंदोलन से जुड़े एक महान सदस्य थे. जिनके कहे को आज भी सुनकर देश प्रेम कि भावनाएं प्रबल हो उठती है. ऐसे व्यक्ति को उसकी जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित हैं. जानकारी साझा करने के लिए आभार.

    nishamittal के द्वारा
    November 29, 2012

    धन्यवाद आदरनीय अशोक जी.

Rajesh Dubey के द्वारा
November 28, 2012

श्री राजीव दीक्षीत जी के बारे में जानकारी के लिए धन्यवाद्. यह विचित्र संयोग है कि जन्म तिथि और पुण्य तिथि एक हीं है. हर्ष और विषाद की तिथि 30 नव.बहुत कुछ सिखने का दिन है.

    nishamittal के द्वारा
    November 29, 2012

    धन्यवाद राजेश जी.

krishnashri के द्वारा
November 28, 2012

आदरणीय महोदया , सादर , ऐसे महान व्यक्ति के बारे में जानकारी साझा करने हेतु हार्दिक आभार .

    nishamittal के द्वारा
    November 29, 2012

    आभार आदरनीय श्री कृष्ण जी

vikramjitsingh के द्वारा
November 28, 2012

आदरणीय मातेश्वरी……सादर…. ऐसे कर्मठ कर्मयोगी को नमन करते हुए आप का धन्यवाद करते हैं……जो आप ने ऐसी अमूल्य जानकारी से अवगत करवाया………

    nishamittal के द्वारा
    November 29, 2012

    धन्यवाद विक्रम जी.

sinsera के द्वारा
November 28, 2012

महान व्यक्ति के बारे में जानकारी साझा करने के लिए धन्यवाद निशाजी ..

    nishamittal के द्वारा
    November 30, 2012

    धन्यवाद सरिता जी.

vijay के द्वारा
November 28, 2012

आदरणीय माता जी नमस्ते आदरणीय श्री दीक्षित जी को मेरी श्रधाजलि हम खुशनसीब है जो हमें ऐसे विचारक ,चिन्तक ,देशभक्त महापुरुष के काल में जीने का अवसर प्राप्त हुआ ( भले ही थोड़े समय के लिए ही सही) आपका ये लेख मेरे हिसाब से इस ब्लॉग के महानतम और एतिहासिक लेखो में शुमार होना चाहिए |

    nishamittal के द्वारा
    November 30, 2012

    आभार विजय जी

November 28, 2012

ममतामयी माता , बहुत ही अच्छी प्रस्तुति व जानकारी ,बधाई,,,,,,,,,,,

    nishamittal के द्वारा
    November 30, 2012

    धन्यवाद हिमांशु जी.

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
November 28, 2012

निशा जी बहुत ही अच्छी प्रस्तुति व जानकारी ,बधाई

    nishamittal के द्वारा
    November 30, 2012

    धन्यवाद अनुराग जी.


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