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नेता मेरे देश के

Posted On: 7 Dec, 2012 Others में

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जहाँ डाल डाल पर सोने की चिडियाँ करती हैं बसेरा गीत सभी के हृदयों में अपने देश के गौरवपूर्ण अतीत के प्रति एक अनिवर्चनीय आनंद का अनुभव करता है. साहित्य,संगीत,कला,ज्ञान विज्ञान,तकनीक धन धान्य व्यापार सभी क्षेत्रों में अग्रणी भारत देश अपने कुछ स्वार्थी लोगों ,अपनी दुर्बलताओं के कारण इतने लंबे समय तक पराधीन रहा,,इस तथ्य से सभी परिचित हैं,परन्तु हमारे नेतागण कोई शिक्षा ग्रहण करने को तैयार नहीं .उनके सिद्धांत ,क्रिया कलाप देश हित के लिए क्षुद्र स्वार्थों पर आधारित होते हैं.वर्तमान घटना क्रम जिसमें सुश्री मायावती और मुलायम सिंह एक और तो एफ डी आई का विरोध करने का नाटक करते रहे ,वहीँ अंतिम समय में उन्होंने  अपने अपने स्वार्थों के वशीभूत हो कर वाक् आऊट कर अपने दोहरे चरित्र और स्वार्थपूर्ण चरित्र का परिचय दिया.इसी स्थिति से क्षुब्ध हो कर लिखी गई रचना,

धोखा देना ही तो   फितरत  है इनकी.

देश को लूटना  बनी बस आदत इनकी.

जिस देश में जन्म लेते और मरते हैं,

अन्न जल वायु से जिसकी जीते हैं.

कर्जा क्या चुकायेंगें माटी का अपनी,

उसीका रोम रोम कर्ज से विंधवाते हैं,

दिखाते तेवर झूठे ये  रुतबा बढ़ाते हैं,

और फिर गद्दार खुले आम बिक जाते हैं

काले धन से निज बैलेंस बढाए जाते हैं.

देखो इन कालिदासों को जिस डाल पर

बैठे उसी को काट कर जश्न मनाते हैं.

स्वामी से दास बनने का सफर भुलाते हैं.

स्व  मिटेगा इनका भी नहीं समझ पाते हैं.

कितने  भ्रष्ट हो गए  नेता  भारत देश के,

लूट को धर्म मान आत्म मुग्ध हुए जाते हैं

indian_politics

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58 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sudhajaiswal के द्वारा
December 12, 2012

आदरणीया निशा जी, सादर अभिवादन, देश को लूटना नेताओं की फितरत बन गई है, बहरूपिये की तरह रूप बदल-बदल कर जनता को धोखा देते हैं| हकीकत बयां करती हुई सार्थक रचना के लिए हार्दिक बधाई|

    nishamittal के द्वारा
    December 13, 2012

    सहमति के लिए धन्यवाद सुधा जी.

vijay के द्वारा
December 12, 2012

आदरणीय माता जी प्रणाम ,सच में इन लोगो ने तो हद कर दी है अब लगता है फिर से वाही गुलामी का दौर आने वाला है, सुंदर प्रस्तुति बधाई

    nishamittal के द्वारा
    December 12, 2012

    धन्यवाद विजय जी.सभी पोस्ट्स पर आपकी प्रतिक्रिया मिलना सुखद लगता है

Dr S Shankar Singh के द्वारा
December 12, 2012

निशा जी, सादर नमस्कार. सशक्त पस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई. इन गद्दारों की जितनी ही लानत मलानत की जाय हमेशा कम रहेगी. ये लोग बेशर्मी के सारे कीर्तिमान तोड़ने पर आमादा हैं. ‘लूट को धर्म मान आत्म मुग्ध हुए जाते हैं ‘. आपने ठीक कहा है इन्होनें लूट का नया धर्म चलाया है. बहुत खूब.

    nishamittal के द्वारा
    December 12, 2012

    आदरनीय डाक्टर साहब आभार सहमति पूर्ण प्रतिक्रिया के लिए.

rekhafbd के द्वारा
December 11, 2012

आदरणीया निशा जी धोखा देना ही तो फितरत है इनकी. देश को लूटना बनी बस आदत इनकी.इन नेताओं के कारण ही आज देश का यह हाल हो रहा है ,सार्थक आलेख

    nishamittal के द्वारा
    December 12, 2012

    धन्यवाद रेखा जी.

satya sheel agrawal के द्वारा
December 11, 2012

हमारे देश के नेताओं के भ्रष्टाचार पर जितना भी लिखा जाय कम है.सुन्दर अभिव्यक्ति.

    nishamittal के द्वारा
    December 11, 2012

    आभार सत्यशील जी.

Ashish Shukla के द्वारा
December 11, 2012

आदरणीय निशा मैम, सादर प्रणाम , देश के धोखेबाज नेताओ का कोई अंत नहीं है लोकतंत्र के मंदिर में ये सब चोरी का खेल खेलते है, और बाहर उसी कर्म की निंदा करते नजर आते है

    nishamittal के द्वारा
    December 11, 2012

    धन्यवाद आशीष जी,वैसे अपने दुष्कर्मों की निंदा नहीं करते उसको सही ठहराते हैं.धन्यवाद

Ravinder kumar के द्वारा
December 10, 2012

निशा जी, सादर नमस्कार. ये नेता इतने सीधे नहीं के अपनी ही डाल को काट दें. इन बेईमानों को पता है के इनका कुछ होना जाना है नहीं. निशा जी आज के तथाकथित नेताओं की पोल खोलती रचना के लिए आप को बधाई. नमस्ते जी.

    nishamittal के द्वारा
    December 11, 2012

    जब देश की हानि होगी तो कुछ छींटे इन पर भी पड़ेंगें,धन्यवाद आपका

Alka Gupta के द्वारा
December 10, 2012

निशा जी, बहुत बढ़िया …हमारे देश के नेताओं के चरित्र की यथार्थता को बहुत ही सुन्दर बयां की है ..बढ़िया रचना के लिए बधाई

    nishamittal के द्वारा
    December 11, 2012

    आभार अलका जी

December 10, 2012

ममता मयी माता ,इन धोखै बाजों को करारी सीख बधाई

    nishamittal के द्वारा
    December 10, 2012

    धन्यवाद हिमांशु जी.

December 10, 2012

ममता मयी माता ,नेताओ अपने कुर्ती को बचाओ ,दाग काले रंग का है ,,आभार

    nishamittal के द्वारा
    December 10, 2012

    ये काला रंग पक्का है उतरने वाला नहीं .आभार

akraktale के द्वारा
December 10, 2012

आदरेया निशा जी                       सादर, दोहरे चरित्र वाले नेताओं पर क्या खूब लिखा है.बधाई स्वीकारें  अब तो बस २०१४ में ही देख पायेंगे कि उत्तर प्रदेश की जनता इनसे कैसे निपटती है. कुछ व्यस्तताओं के कारण मंच पर अनुपस्थित रहा इसलिए रचना पढने में देरी हुई. सादर.

    nishamittal के द्वारा
    December 10, 2012

    आभार आदरनीय अशोक जी, व्यस्तता के मध्य समय देने के लिए.सही कहा आपने परन्तु बहुत कठिन लगती है,वर्तमान हालात में डगर

Sushma Gupta के द्वारा
December 9, 2012

निशा जी,देश के नेताओं की मन:स्थिति का सही आकलन किया आपने बहुत सार्थक प्रस्तुति …वधाई स्वीकारें ..

    nishamittal के द्वारा
    December 10, 2012

    धन्यवाद सुषमा जी.

manjusharma के द्वारा
December 9, 2012

Nisha जी आज के समय में सच इमानदारी वफा केवल दिखाने के शब्द हैं नेता तो इन का प्रयोग विपरीत लोगो के लिए Kate हैं

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    सहमती के लिए धन्यवाद

santosh kumar के द्वारा
December 9, 2012

आदरणीया ,..सादर प्रणाम क्षुब्ध भावनाओं की तीक्ष्ण अभिव्यक्ति ,…इनका यही काम है सो करते रहेंगे ,..भारत को जागना होगा देखो इन कालिदासों को जिस डाल पर बैठे उसी को काट कर जश्न मनाते हैं. स्वामी से दास बनने का सफर भुलाते हैं. स्व मिटेगा इनका भी नहीं समझ पाते हैं…………….ये लाइने ठीक से समझ नहीं पाया ,..यदि स्पष्ट करेंगी तो बहुत कृपा होगी ,….मेरे विचार से आम आदमी को स्व से जुड़ना बेहतर समाधान है ….शेष हरि इच्छा ,..ज्वलंत अभिव्यक्ति के लिए सादर अभिनन्दन ! वन्देमातरम

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    स्व मिटेगा का अर्थ है की जब देश गुलाम बनेगा या उसका बंटाधार होगा तो ये स्वयं को भी नहीं बचापायेंगें देश के साथ ही इनका अस्तित्व है,जितने भी देश द्रोही हुए हैं सबने पहले शत्रुओं को न्यौता दिया और बाद में खुद भी नहीं बचे.कालिदास का अर्थ है की जिस देश रूपी डाल पर बैठें हैं उसी को बर्बाद कर रहे हैं ,ये भूलते हुए की इनका अस्तित्व भी देश के साथ ही है .

    Santosh Kumar के द्वारा
    December 9, 2012

    आदरणीया ,..बहुत आभार इन अंधे सामंतों को कभी परवाह नहीं रही है ,..अंग्रेजों के समय इसी मानसिकता के राजे महराजे अधिकाँश उनकी गुलामी से प्रसन्न थे ,..कुछ बाकायदा वहीँ चले गए थे ,..इनकी भी कोई विशेष बस्ती बन जाएगी ,…इन गद्दारों ने अपना अस्तित्व देश से बड़ा बना लिया है जिनका जमींदोज होना बहुत जरूरी है ,..सादर

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    संतोष जी कह तो आप सही रहे हैं,परन्तु वो सभी सामंत,जागीरदार या रियासतों के राजे अंग्रेजों के आगे भीगी बिल्ली ही बन कर रह सकते थे,वही स्थिति मिल सकती है इससे अधिक नहीं

ANAND PRAVIN के द्वारा
December 8, 2012

आदरणीय निशा मैम, सादर प्रणाम नेताओं का तो जितना भी गुणगान किया जाय कम ही लगता है मैम…… सुन्दर रचना ……..किन्तु बोलने का दिल नहीं कर रहा किन्तु अपने दिल की एक बात रखना चाहूँगा मैम रचना सुन्दर तो है किन्तु इसे पूर्णता नहीं मिल पा रही …..क्यूंकि ना यह किसी शीर्षक को दर्शा पा रहा है और ना समाप्त ही किसी शीर्षक पर हो रहा है……आपने इसे अधूरा समाप्त किया है मैम……..मेरे कहने के अर्थ को समझिएगा………..और छोटे को माफ़ भी करिएगा……..किन्तु जोश प्रवलित करने हेतु यह एक सुन्दर रचना ……..बधाई

    nishamittal के द्वारा
    December 8, 2012

    आनन्द प्रवीन जी सर्वप्रथम आभार कि आपने रचना की अप्पोर्नता की ओर इंगित किया.वास्तविकता तो ये है कि कविता मेरी विधा नहीं ,साथियों का प्रोत्साहन मिलने पर जबरन घुस जाती हूँ इस क्षेत्र में,भविष्य में ध्यान रखूंगी.इसमें माफ़ी वाली कोई बात नहीं क्योंकि मंच पर रचना प्रस्तुत करने का उद्देश्य सुधार होता है.जब सुझाव आयें तभी तो सुधार होगा.अन्यथा स्वयं को सब दक्ष मानते हैं.वैसे इस बार लिखना भूल गयी मैं अन्यथा ,मैं कविता प्रस्तुत कर ये स्पष्ट कर देती हूँ

minujha के द्वारा
December 8, 2012

मुंह में राम बगल में छुरी लोकोक्ति इन्ही नेताओं के लिए तो बनी है इनसे कोई उम्मीद रखना ही बेमानी है निशा जी

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    धन्यवाद मीनू जी

Sumit के द्वारा
December 7, 2012

सबसे ज्यादा दाग सफ़ेद रंग पे ही लगते है ……..सुंदर कविता

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    सही बोला धन्यवाद

vinitashukla के द्वारा
December 7, 2012

रंग बदलने में गिरगिट भी उतना माहिर नहीं होता जितने ये नेता. इनसे बेहतर चरित्र के तो, अंग्रेज शाषक थे- कम से कम अपने देश के प्रति निष्ठावान तो थे! यह तो अपने स्वार्थ के लिए, देश और जनहित को बेच- खाने पर आमादा हैं. सुंदर और सटीक अभिव्यक्ति पर बधाई निशा जी.

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    सही कहा वो अपने देश के प्रति तो निष्ठ्वान थे ये तो देश से ही दगा करते हैं धन्यवाद

bhanuprakashsharma के द्वारा
December 7, 2012

दिखाते तेवर झूठे ये रुतबा बढ़ाते हैं, और फिर गद्दार खुले आम बिक जाते हैं ,,, बिलकुल सही कहा आपने, ये नेता किसी को कुछ देता नहीं है, बल्कि लेता ही है। देता है सिर्फ दर्द। 

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    धन्यवाद भानु जी.

yogi sarswat के द्वारा
December 7, 2012

उनके सिद्धांत ,क्रिया कलाप देश हित के लिए क्षुद्र स्वार्थों पर आधारित होते हैं.वर्तमान घटना क्रम जिसमें सुश्री मायावती और मुलायम सिंह एक और तो एफ डी आई का विरोध करने का नाटक करते रहे ,वहीँ अंतिम समय में उन्होंने अपने अपने स्वार्थों के वशीभूत हो कर वाक् आऊट कर अपने दोहरे चरित्र और स्वार्थपूर्ण चरित्र का परिचय दिया. लेकिन वोट इन्हें फिर भी मिलेगा क्यूंकि इनके दोहरे चरित्र से वोट देने वालों को कोई सरोकार नहीं ! आज राजनीती पर लेख ? उत्तम और समसामयिक आदरणीय निशा जी मित्तल !

    jlsingh के द्वारा
    December 7, 2012

    आदरणीय योगी जी, सादर अभिवादन! आपकी बात चरितार्थ होती दिखती है – “राजनीति तो कांग्रेस को ही आती है!” नरसिम्हा राव ने जे एम एम को खरीद कर अपनी सरकार बचा ली थी, और बाजपेयी जी को एक मत से हरा दिया गया था! ….भाजपा को अभी और ‘होम वर्क’ करने की जरूरत है, ऐसा मुझे लगता है …. अन्यथा हम सब देख ही रहे हैं! आदरणीया निशा महोदया का दर्द मैं समझ सकता हूँ! लोकतंत्र इसी का नाम है!

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    जनता की निष्क्रियता और देश के और स्वयं के हित में न सोच पाना भी इन नेताओं को सफल बना देता है जागना तो जनता को पड़ेगा,धन्यवाद योगी जी

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    आप सही हैं,सिंह साहब कांग्रेस राजनीति में अधिक कुशल है और इसी लिए अधिकांश दाँव जीत लेती है.धन्यवाद

deepika shukla के द्वारा
December 7, 2012

bahut achi rachna

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    धन्यवाद दीपिका तुम्हारी पहली प्रति क्रियाके लिए

drbhupendra के द्वारा
December 7, 2012

ये निकृष्ट नेता राष्ट्र को भीखारी बनाने की राह पर ले जाना चाहते है अब स्वयं लूट लूट कर थक गए है इसलिए विदेशी कंपनियों को बुलाना चाहते है.

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    थकेंगें तो ये कभी नहीं बस ,उनके सहारे अपनी तिजोरियां और भरना चाहते हैं,धन्यवाद डॉ साहब

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 7, 2012

आदरणीया निशा जी, सादर अभिवादन आपको कविता लिखनी पड़ी. मामला है गंभीर मिल दुशाशन खिंच रहे भारत माँ का चीर कौम जिस देश की नपुंसक होगी उस देश की हालत ऐसी ही होगी. आओ देश बेचें. बधाई

    jlsingh के द्वारा
    December 7, 2012

    मामला है गंभीर, समझ में किसकी आये? लालू को दिया जवाब, माया को कैसे समझाएं? सुषमा जी और अरुण जेटली नेता हैं विद्वान! कांग्रेस फेंके जाल, तो सब पलटी हो जाएँ! वतन का क्या होगा अंजाम, बचा ले ऐ मौला ऐ राम! आदरणीय श्रेष्ठ जन, बहुत बड़ी क्रांति की जरूरत है — लातों के भूत बातों से नहीं मानते!

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    कसर ही क्या शेष रह गयी है कुशवाह जी देश बिकने में.अफ़सोस जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं.

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    क्रांति लाने के लिए जिस जोश और भावना की जरूरत है अभी वो दीखता ही नहीं सिंह साहब धन्यवाद

mayankkumar के द्वारा
December 7, 2012

आपका लेख सदैव ही आत्मविष्वास से ओत-प्रोत व रोचकता की किरण के समान रहा है …. !! सधन्यवाद … !! हमारे ब्लाॅग पर भी पधारें … !!!

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    धन्यवाद MAYANK

Madan Mohan saxena के द्वारा
December 7, 2012

.बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!!शुभकामनायें.

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    धन्यवाद मदन मोहन जी.

Malik Parveen के द्वारा
December 7, 2012

निशा जी नमस्कार, नेताओं को कुत्ता कहा जाता है लेकिन कुत्ते तो वफादार होते हैं पर जो रोटी दाल दे उसी के लेकिन ये नेता तो जिसका खाते हैं उसी को काटते हैं ….. बधाई आपको काव्यात्मक व्यंग के लिए ….

    nishamittal के द्वारा
    December 9, 2012

    सहमती और प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद प्रवीन जी.


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