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दामिनी भी इतिहास बन जायेगी ......

Posted On: 29 Dec, 2012 Others में

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और आज दामिनी ने इहलोक लीला से मुक्ति पा ली, कोई भी प्रयास उसको  तन मन से अपंग जीवन प्रदान करने में समर्थ नहीं हुआ.आम आदमी का जोश उफान पर है,परन्तु ये जोश ,ये जज्बा क्या कोई सकारात्मक परिणाम दे सकेगा? मेरे विचार से  ऐसी आशा करना  ही बेमानी है,क्योंकि  इस घृणित घटना के बाद भी दुष्कर्मी हार नहीं माने  हैं. दुशासन ,रावण तो रक्तबीज के रूप में आज हर स्थान पर हैं, हैं,यही कारण है,कि देश में  में प्रतिदिन कहीं न कहीं ये घटनाएँ घट रही हैं.द्रौपदी ,सीता ,अहिल्या का अपमान सदा हुआ है.दुशासन ,दशानन सब मारे गए ,विनाश हुआ, परन्तु नारी के  अपमान पर कोई लगाम नहीं लग सकी.

नव वर्ष के रूप में 2013  का आगमन होने वाला है.इस अवसर पर कोई आयोजन नहीं रुकेगा, केक कटेंगें,रौशनी से जगमगायेगा  कोना कोना,   मदिरा की नदियाँ भी बहेंगीं , नृत्य,पार्टीज सब होगा. होटल्स, रेस्टोरेंट्स,विभिन्न ग्रुप्स ,क्लब्स, ,पब्स सभी जगह..,खो जायेंगें  सब अपनी अपनी रंगीनियों में. कोई अपनी विलासिता को लगाम लगायेगा ?कदापि नहीं.बस दुःख और पीड़ा तो उनके लिए है,जिन्होंने अपनी बेटी को चिकित्सक बनाने के लिए आत्मनिर्भर बनाने के लिए कदम बढाये थे.क्या कोई उनके अश्रु पौंछ सकेगा,उस माँ को ढाढस बंधा सकेगा?

उत्सवों की बहार छाई कहीं ,

मचा करुण क्रन्दन हाहाकार है.
निर्झर बह रही मदिरा सब ओर,
अश्रु दरिया  यहाँ बहता  जार जार है.
आना -जाना नियम प्रकृति का
पर  असमय हुआ क्रूर आघात है.
कौन सा दंड लौटा सकेगा रौशनी
जिस घर में छा गया अन्धकार है.
जाओ दामिनी पुकार पहुंचा देना
नियंता को, जो सबका  तारणहार हैं.
दुशासन,रावण बने हैं यहाँ अब सब
राम कृष्ण औ दुर्गा का  अब इंतज़ार है.
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58 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 11, 2013

आदरणीया निशा जी, सादर अभिवादन २० वोट . कुछ कहने की स्थिति में नहीं. काश कुछ बदलाव आ जाये. रचना हेतु बधाई.

chaatak के द्वारा
January 11, 2013

सही ही लिखा है आपने, अब समाज में दुर्गाजी जैसे नारियों का ही सहज जीवन संभव है जो समाज मे रह रहे महिषासुर को माफ़ करने की न सोचें और न ही समाज(सरकार) से कोई उम्मीद रखे अपराधियों को सजा दे और वही सजा दे जो महिषासुर को दुर्गाजी ने दी थी अर्थात रेप की सजा फांसी नही बल्कि पब्लिक प्लेस पर गला काट देना होना चाहिए जिससे फिर कभी कोई शैतानी दिमाग शैतानी धड का साथ देने की हिम्मत न करे ऐसी घटनाओ को दोहराने में

prabhatkumarroy के द्वारा
January 9, 2013

निशा मित्तल का काव्यात्मक संवेदनापूर्ण सार्थक लेख पढ़। निशा बधाई की पात्र हैं.

Abdul Rashid के द्वारा
January 7, 2013

आदरणीय निशा जी नमस्कार सुंदर लेख ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ (¯*•๑۩۞۩: | नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें || :۩۞۩๑•*¯) ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ

    nishamittal के द्वारा
    January 7, 2013

    सुन्दर शुभकामनाओं और प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद राशिद जी.आपको भी शुभकामनाएं

seemakanwal के द्वारा
January 6, 2013

निशा जी आइन्दा ऐसा न हो हम सब की यही दुआ है मार्मिक रचना .हार्दिक आभार .

    nishamittal के द्वारा
    January 7, 2013

    सीमा जी काश ऐसा हो सकता परन्तु नहीं ,प्रतिदिन नित नई घटनाएँ प्रकाश में आ रही है,आज ही पढ़ा दरिंदों ने एक लडकी का जीवन बर्बाद कर उसकी जान ही ले ली .

गोस्वामी शेष नाथ योगी के द्वारा
January 5, 2013

निशामित्तल जी अभिवादन यह सही है की दामिनी इतिहास का एक पन्ना बन कर रह जायेगी किन्तु प्रबुद्ध वर्ग और लेखकों का दायित्व है कि    अब और नही      अब और नही     का सिद्धांत अपनाकर इस घटना को एक क्रांतिकारी परिवर्तन की सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करें   थोडा समय निकल कर इसीसे सम्बन्धित लेख   आत्मा की डायरी  पृष्ठ ५ अवश्य पढ़ें     एक अच्छे लेख के लिए धन्यवाद

    nishamittal के द्वारा
    January 5, 2013

    धन्यवाद आपका.प्रथम प्रतिक्रिया हेतु.आपका लेख अवश्य पढूंगी.

Ravindra K Kapoor के द्वारा
January 5, 2013

निशाजी ये आंकलन बिलकुल सही है कि दामिनी भी बस इतिहास बन जायेगी. लेख के साथ संग्लन कविता पंक्तियाँ आपके मर्म से निकलने वाले उद्गारों को मुखरित कर रहीं हैं. लेख के लिए साधुवाद. कुर्सियों पर बैठे हमारे नेता शायद कभी ये कानून नहीं बनने देगें जिससे कि अपराध करने का भय लोगों में आ सके और वो अच्छी तरह जानते हैं कि उनके पदचिन्हों पर चलने वाले फिर सख्त कानून में फंस सकते हैं. आशा की धूमिल किरणों में कौन इस देश में रोज बढती अराजकता से मुक्ति दिल सकेगा ये कह सकना बहूत कठिन है. सुभकामनाओं सहित ..रवीन्द्र

    nishamittal के द्वारा
    January 5, 2013

    धन्यवाद कपूर साहब ,आपने सही कहा अतः ऐसा क़ानून कभी नहीं बनेगा ,कारण आपने लिख ही दिया है

Amarjeet Chauhan के द्वारा
January 5, 2013

आदरणीय निशा जी सादर प्रणाम हमारा समाज घटना के घटित हो जाने के बाद तो हो हल्ला करने के लिए रोड पैर उतर आता है परन्तु जब इसी समाज के सामने वो वारदात हो रही होती है तो सब चुप चाप तमाशा देखते रहते हैं. और इसी से इन लोगो का होसला बढ जाता है. हर आदमी के साथ तो एक पुलिस वाला नहीं रह सकता. जरुरत है समाज द्वारा उन लोगो को उसी वक्त मुहतोड़ जवाब देने की ताकि ऐसे लोगो का होसला पस्त हो और वो ऐसा करने से पहले कई कई बार सोचें. जब तक आम जनता एकजूट हो कर ऐसे लोगो को वहीँ पर नहीं रोकेगी ऐसी घटनाएँ नहीं रुक पाएंगी. मामला मात्र ओरतों तक ही सिमित नहीं बल्कि समाज के सभी वर्गों से जुड़ा है. आज कोई भी सुरक्षित नहीं है. किसी की इज्जत पर , किसी के जीवन पर तो किसी के धन पर कभी भी और कहीं भी हमला हो सकता है. मेरी सभी पाठकों से आशा है की अब वो आपने सामने ऐसी किसी भी वारदात को होने से पहले ही रोकेंगे. धन्यवाद

    nishamittal के द्वारा
    January 5, 2013

    अमर जीत जी ,सर्वप्रथम तो प्रथम प्रतिक्रिया हेतु आभार ,समाज में भी संवेदनाएं समाप्त हो रही हैं,जिसके कारण जब तक स्वयम पर न बीते दर्द नहीं होता यदि समाज एक जुट हो तो दरिंदों के होंसलों पर लगाम अवश्य लगेगी

deepasingh के द्वारा
January 2, 2013

आदरणीय निशा जी वन्देमातरम. आप की बात से सहमत हु. सकारात्मक परिणाम की आशा सत्ता मई बेठे लोगो से करना सुच मई बेमानी हे होगी. पर हम प्रयास तो जरी रख हे सकते है. ये प्रयासजारी रहे इसके लिय एक कविता लिखी है समय निकलकर अवश्य पढियेगा .”चलना होगा बिना रुके”. इस लेख पर बधाई.

    nishamittal के द्वारा
    January 2, 2013

    धन्यवाद दीपा जी.मैंने देखा था कुछ प्रोब थी प्रतिक्रिया में पुनः प्रयास करती हूँ

January 1, 2013

आज के सच को उजागर करती प्रस्तुति ,

    nishamittal के द्वारा
    January 2, 2013

    धन्यवाद सिन्हा साहब

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 1, 2013

श्रद्धेया निशा जी , साभिवादन ! …… इस जघन्य घटना से प्रत्येक इन्शान का ह्रदय मानों कट-कट कर गिर रहा है ! उन वहशी दरिंदों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जिसे देख -सुनकर वैसी प्रवृत्ति धारकों के रोंगटे खड़े हो जाएं ! साभार !

    nishamittal के द्वारा
    January 2, 2013

    आदरनीय आचार्य जी आभार

vijay के द्वारा
January 1, 2013

नमस्कार माता जी,आज हम सब कितना दुःख प्रगट क्यों न कर ले कल हम भी समय यात्रा में दामिनी को भुला देंगे पर इस घटना से और दामिनी न बन पाए यही हमारा प्रयत्न होना चाहिए 

    nishamittal के द्वारा
    January 1, 2013

    सही कहा आपने धन्यवाद

Sushma Gupta के द्वारा
December 31, 2012

निशा जी , आपने सही कहा है कि नवबर्ष के जस्न अब भी मनेंगे, फिर समाज की सोच अवश्य ही बदली है,उसका बलिदान कुछ तो सिखा ही गया है,पर यह भी सच है कि समय की धूल इसको अवश्य धूमिल कर सकती है..एक सही दिशा में चिंतन हेतु आपका बहुत आभार.. नवबर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं सहित …

    nishamittal के द्वारा
    January 1, 2013

    बहुत बहुत आभार सुषमा जी मंगलकामनाएं

ashishgonda के द्वारा
December 31, 2012

आदरणीया माँ जी! सादर चरणस्पर्श. दामिनी की विदाई हमारे लिए बड़े दुःख और शर्म की बात है. वैसे सारे देश में समुचित तौर पर इसके खिलाफ आवाज लगे जा रही है पर अफ़सोस मन से इन्साफ चाहने वाले बहुत कम ही हैं….मुझे ऐसे में श्री हरी ओम पवांर जी कि ये पंक्ततियाँ याद आती है- ” पांचाली के चीरहरण पर जो चुप पाए जाते हैं इतिहास के पन्नो में वो सब कायर कहलाते हैं ……. ” अगर केवल चीरहरण पर मौन प्राणी को हम कायर कहते हैं तो आने वाले इतिहास हमें क्या कहेगा जबकि जहाँ केवल चीर ही नहीं इज्जत और प्राण हरण तक हुआ है वो भी बेहद शर्मनाक और दर्दनाक तरीके से….. ऐसे माहौल में जब चिंगारी लग चुकी है तो उसे हवा देना लेखकों/लेखिकाओं का धर्म है जो आपने बखूबी निभाया इसके लिए समाज कि तरफ से मैं कृतज्ञता प्रकट कर रहा हूँ……. आपकी लेखनी को नमन….

    nishamittal के द्वारा
    January 1, 2013

    धन्यवाद आशीष.अभी मैंने इस घटना के बाद घटित हुई ऐसी ही कलंकित घटनाओं के विषय में पढ़ा, इतनी उबाल वाली स्थिति में ऐसी घटनाएँ! कैसे आशा करें.अभी जयपुर में ११ वर्ष की बच्ची का ऐसा ही केस पढ़ा जो लगभग ६ माह से अस्पताल में जीवन मृत्यु के मध्य झूल रही है.ईश्वर करे शुभ परिवर्तन हो .धन्यवाद

yogi sarswat के द्वारा
December 31, 2012

ये मानव प्रवृत्ति है की वो समय के साथ साथ बातों को और ज़ख्मों को भूल जाता है लेकिन दामिनी के केस में हम लोगों ने बहुत कुछ हासिल किया है ! मैं व्यक्तिगत बात करूँ तो संतुष्ट हूँ की जो और जितना हमें करना था , एक आम लड़की को इतना न्याय मिला और एक नए युग और एक्नाये कानून की वाहक बनेगी !

    nishamittal के द्वारा
    December 31, 2012

    योगी जी दामिनी का जीवन भले ही न लौटा सके हों परन्तु उसकी पुकार जन जन तक पहुँची कम से कम गुमनामी के अंधेरों में नहीं खोयी ,ये सराहनीय है.,लेकिन और किसी दामिनी को अपना सर्वस्व नहीं गंवाना होगा ऐसा कैसे कहा जा सकता है,प्रश्न है भेड़ियों को रोकने का जो आज की तारीख तक भी रुके नहीं हैं ,उनके मंसूबे खूंखार ही हैं. शायद आपने पढ़ा हो गा अपडेट आज हमारी पूर्व महामहिम कठोर सजा की मांग कर रही हैं,और स्वयं उन्होंने ५ बलात्कारियों की फांसी की सजा को माफ किया है. आपका धन्यवाद व्यस्त समय में भी पोस्ट को समय देने के लिए.

bhanuprakashsharma के द्वारा
December 31, 2012

निशा जी, दामिनी की मौत ने एक हलचल जरूर मचाई और आमजनमानस को इस और सोचने पर मजबूर किया। फिर भी आज दुर्जनों की कमी नहीं है। इनके खात्मे को लेकर जो मशाल दामिनी की चिता ने जलाई उसे ज्वाला में बदलने के लिए नई पीढ़ी को ही पहले शिक्षित करना जरूरी है। यदि बचपन से नारी सम्मान की सही शिक्षा दी जाएगी तभी समाज में कुछ बदलाव आ सकेगा और ऐसी घटनाएं रुकेंगी तो नहीं, लेकिन कुछ कम जरूर हो सकती हैं। 

    nishamittal के द्वारा
    December 31, 2012

    भानु जी ,चारित्रिक पतन का जो स्तर आज दिख रहा है सर्वत्र उसमें आशावान होना तो सरल नहीं ,शेष ईश्वर करे २०१३ सुखद हो सभी के लिए,

ajaykr के द्वारा
December 30, 2012

निशा जी, सादर प्रणाम दामिनी कि चिता अभी ठंडी पड़ी भी नही कि बलात्कार और छेड़छाड़ कि घटनाये होने लगी , राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2010 में बलात्कार के 20,262 मुकदमे दर्ज़ किए गए जबकि 2011 में इस से चार हज़ार ज़्यादा. आंकड़ों पर नज़र डालें तो बलात्कार के मामलों में मध्य प्रदेश सब से आगे है. पिछले साल राज्य में बलात्कार के 3,406 मुक़दमे दर्ज किये गए थे. अगर शहरों की बात करें तो वर्ष 2011 में बलात्कार के 507 मामलों के साथ दिल्ली सबसे आगे रही. उसी साल मुंबई में 117 मुक़दमे दर्ज किये गए. निशा जी ,क्या हम सब अब इतने अक्षम हों गए हैं कि अपनी महिलाओं ,बहन बेटियों को सुरक्षित माहौल नही उपलब्ध करा सकते ? किस बात का कानून जब किसी के आत्म सम्मान और जीवन की रक्षा नही कर सकता |

    nishamittal के द्वारा
    December 30, 2012

    अजय जी ये याद रखिये की समाज में दुर्जनों की संख्या अपेक्षाकृत बहुत अधिक है इन आंकड़ों की क्या गिनती की जाय उन कांडों का क्या होगा जो प्रकाश में आते ही नहीं,आज भेडिये हर मोड़ पर हर गली में अधिक क्या कहूंघर घर में हैं शायद गिनती के ही परिवार होंगें जहाँ ऐसे सद संस्कार जीवित हैं.धन्यवाद आज मैंने कहीं एक जोक के रूप में पढ़ा की भाई हो तो रावण जैसा जिसने अपनी बहिन के सम्मान के लिए अपने परिवार को सूली पर चढ़ा दिया.मैं रावण के कृत्या से सहमती नहीं क्योंकि उसने एक अन्य नारी का ही अपमान किया.

drbhupendra के द्वारा
December 30, 2012

नेता नियम अवतार इत्यादि का इंतज़ार करने के बजाय आम आदमी के शक्ति को जगाना होगा … यह शक्ति ही इन पशुओ के खिलाफ राम और दुर्गा साबित होगी … आम आदमी का आन्दोलन बलात्कारियो के खिलाफ कड़ी सज़ा का प्रावधान होने तक जरी रखना होगा …

    nishamittal के द्वारा
    December 30, 2012

    सहमत हूँ आपसे डाक्टर साहब परन्तु मुझको संदेह है है कि ये आक्रोश कुछ ;लंबे समय तक चलने वाला है,धन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
December 30, 2012

निशाजी , दामिनी के जाने के बाद भी सभी कुछ पूर्ववत चलता रहेगा सब कुछ वही घटित होता रहेगा और आज भी हो रहा है जो उसके साथ हुआ पर अभी तक बदलाव की किरण नज़र नहीं आ रही……अभी भी अगर ये नियंता नहीं चेते तो हर गली में दुशासन और रावण खड़े ही मिलेंगे…. इसके साथ ही सार्वजनिक रूप से हम सबके लिए स्वस्थ मानसिक सोच और चिंतन भी आवश्यक हो गया है….. अर्थपूर्ण प्रस्तुति के लिए बधाई

    nishamittal के द्वारा
    December 30, 2012

    अलका जी उससे भी दुखद ये है कि अपराधियों को बचाने के लिए लोग तैयार हैं ऐसे लोगों को पहले सजा क्यों नहीं ? धन्यवाद

sinsera के द्वारा
December 30, 2012

आपका कथन बिलकुल जायज़ है आदरणीय निशा जी, ऐसी घटना कोई पहली बार नहीं हुई है और कोई गारंटी नहीं है कि आगे नहीं होगी…आज हो -हल्ला करने वाले थोड़े दिनों में इस बात को भूल जायेंगे यहाँ तक कि सगे माँ बाप के ज़ख्म भी समय के मरहम से भर जायेंगे लेकिन कम से कम शासन तंत्र और समाज की मानसिकता की खामियां जब तक सामने नहीं लायी जायेंगी तब तक दूर कैसे होंगी.. हमें चाहिए कि हम दामिनी के मातम को एक नौटंकी न बनने दें और कुछ ऐसी आवाज़ उठाएं कि जिन कमियों के चलते यह दुर्घटना हुई ,फिर न होने पाए…

    nishamittal के द्वारा
    December 30, 2012

    सहमती आपसे सरिता जी.परन्तु इतिहास यही कहता है

akraktale के द्वारा
December 30, 2012

सच है समाज कुछ दिन मातम करेगा कुछ दिखावा भी अधिक होगा फिर वही हाल लडकियां असुरक्षित.जनता जागे और एक स्थायी समाधान के लिए संघर्ष करे तो ही कामयाबी माना जाएगा. आदरेया निशाजी सार्थक प्रस्तुति.

    nishamittal के द्वारा
    December 30, 2012

    आभार आदरनीय अशोक जी.

jlsingh के द्वारा
December 30, 2012

आदरणीय महोदया, सादर अभिवादन! जो आक्रोश आज और पिछले १२-१३ दिनों से राजधानी और पूरे देश की सड़कों पर दिखा है, उसके अलोक में नव वर्ष के सारे आयोजन को स्थगित कर देने चाहिए. अगर यह नहीं रोका गया और मांस, मदिरा, नृत्य और भौड़े कार्यक्रम उसी रफ़्तार से मनाये गए, तो मैं समझूंगा आज के आंसू और प्रदर्शन एक नाटक भर था… जैसे दो मिनट के मौन के बाद ठहाके ….बस!

    nishamittal के द्वारा
    December 30, 2012

    जी हाँ सिंह साहब यही मैं कहना चाहती हूँ.सहमती हेतु धन्यवाद

rajuahuja के द्वारा
December 29, 2012

माननीया निशा जी , किसी ज्ञानी ने कहा है ! संसार एक स्वप्न सा है ! अचेतन अवस्था में भी चेतन आभास !क्षण-भर को याद रहता है फिर जीवन की आप -धापी में कहीं खो जाता है ! यहाँ भी यही सिद्धांत लागु होगा ! बात आई-गई हो जाएगी ! किसी गीतकार के बोल हैं … मैं ही नहीं ,तू ही नहीं ,सारा ज़माना ,दर्द का है एक फ़साना ! आदमी हो जाये दीवाना ,याद रहे ,गर भूल न जाए ! (शायद इसी लिए भूलना ज़रूरी है )

    nishamittal के द्वारा
    December 30, 2012

    यही भूलना पुनः उसी अपराध की पुनरावृत्ति करवाता है अतः सहमत नहीं हूँ आपसे

vinitashukla के द्वारा
December 29, 2012

मत समझना वो कहानी हो गयी एक घटना थी पुरानी हो गयी बस में थी बेबस व्यवस्था या वो खुद चिंता सबकी ये जेहानी हो गयी मरके भी ज़िंदा सभी को कर गयी बिटिया वो कितनी सयानी हो गयी चल बसी वो बहस मोटी छोड़कर बनके तारा आसमानी हो गयी इससे अच्छा है चलो जंगल कहीं बस्तियां भी वहशियानी हो गयीं (महेश ओझा)

    jlsingh के द्वारा
    December 30, 2012

    समयानुकूल पंक्तियाँ!

    nishamittal के द्वारा
    December 30, 2012

    महेश आहूजा जी की सुन्दर पंक्तियाँ उद्धृत करते हुए प्रतिक्रिया के लिए आभार

    nishamittal के द्वारा
    December 30, 2012

    सिंह साहब विनीता जी की अपनी रचनाएँ भी सदा प्रभावपूर्ण होती हैं

Dr Divya Srivastava के द्वारा
December 29, 2012

निर्भय (दामिनी) की इस जिल्लत और दर्दभरी मौत के बाद के बाद कुछ बदलेगा क्या? जब तक शीला, सोनिया और महेश भट्टों का नैतिक उत्थान नहीं होगा तब तक कुछ नहीं बदलेगा !

    nishamittal के द्वारा
    December 30, 2012

    सच कहा आपने.प्रथम प्रतिक्रिया के लिए आभार

December 29, 2012

सादर प्रणाम! दुशासन ,रावण तो रक्तबीज के रूप में आज हर स्थान पर हैं, हैं,यही कारण है,कि देश में में प्रतिदिन कहीं न कहीं ये घटनाएँ घट रही हैं.द्रौपदी ,सीता ,अहिल्या का अपमान सदा हुआ है.दुशासन ,दशानन सब मारे गए ,विनाश हुआ, परन्तु नारी के अपमान पर कोई लगाम नहीं लग सकी…………………………………….सोलह आने सच कहा आपने…………..! कौन सा दंड लौटा सकेगा रौशनी जिस घर में छा गया अन्धकार है. जाओ दामिनी पुकार पहुंचा देना नियंता को, जो सबका तारणहार हैं. दुशासन,रावण बने हैं यहाँ अब सब राम कृष्ण औ दुर्गा का अब इंतज़ार है…………………………….आश्चर्य होता है कि चारों तरफ खुद को राम, कृष्ण और दुर्गा कहने वाले तथाकथित सभ्य लोग ……………विशेष रूप से इस मंच पर इनकी कमीं नहीं ……………………फिर आपको किस राम कृष्ण औ दुर्गा इंतज़ार हैं………………अब वक्त है कल्पनाओं, कहानियों, घटनाओं और सीमाओं से बाहर निकलकर सत्य को स्वीकार करने का ………वरना…हम …..मेरा देश महान………….भारत माता की जय…………….जय हिन्द जय भारत………….बोलते रहेंगे और झूठे अभिमान पर गौरान्वित होकर बेशर्मों की तरह प्रफुल्लित होते रहेंगे……….और ऐसे ही घटनाएँ आये दिन घटित होती रहेगी………………यदि मेरी बात बुरी लगी हो तो आप इंतज़ार करते रहिये…….और साथ ही जय हिन्द जय भारत बोलते रहिये………….मेरी चाय ठंडी हो रही है……………..चलता हूँ…………………

    nishamittal के द्वारा
    December 30, 2012

    एक ओर तो बात करते हैं आप[ आम आदमी की जागृति की बात करते हैं और दूसरी ओर चाय ठंडी होने की बात कहकर भागना चाहते हैं.जिम्मेदारी से.खैर आपका स्टेंड समझ नहीं आया.धन्यवाद

sudhajaiswal के द्वारा
December 29, 2012

आदरणीया निशाजी, सादर अभिवादन, सही कहा वो इतिहास बन जाएगी | लोग सबकुछ भूलकर जश्न भी मनाएंगे, इन्साफ पाने की उम्मीद लिए कई दामिनी दुनिया से चली जाती है मगर इंसाफ नहीं मिलता न जाने भारत की बेटियों के भविष्य में इन काले सायों से मुक्ति लिखी है या यूँ ही एक के बाद एक दुशासन का जन्म होता ही रहेगा |

    nishamittal के द्वारा
    December 30, 2012

    धन्यवाद सहमती हेतु सुधा जी.

satish mittal के द्वारा
December 29, 2012

नमस्कार मैडम आज देश में दुर्गा के अवतार की ही आवश्यकता हें / कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध बोलने वालों को आज जावाब मिल गया होगा क़ि आज लोग दहेज़ और बलात्कार के कारण कन्या भ्रूण हत्या को मजबूर हें / दामिनी के माता पिता ने क्या सपना नहीं देखा होगा क़ि उनकी बेटी उनका नाम रोशन करे / दामिनी की खबर सुन सभी का मन रो रहा हें काश कोई होता जो त्वरित न्याय दे दर पैदा करता / god help those help himself को गांठ बाढ़ आज नारी को अपनी रक्षा की बीड़ा स्वयम उठाना होगा जेसे कभी दुर्योधन से अपमानित हो द्रोपदी ने एक प्रण लेकर कोरव वशं का नाम मिटा दिया था / आज नैतिक मुल्य के पतन इतना हो गया हें क़ि बहन बेटी की इज्जत आबरू सुरक्षित कही जाने वाली देश के राजधानी में भी महफूज नहीं हें / इश्वर दामिनी की आत्मा को शांति दे / सचमुच बहदुर बेटी थी वो जो पद्मावती की तरह अत्याचारी से लड़ते हुए शहीद हुई /

    nishamittal के द्वारा
    December 30, 2012

    आपके भावपूर्ण विचारों से युक्त प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ सतीश ji.निश्चित रूप से वीरांगना थी वो .

sadhanathakur के द्वारा
December 29, 2012

सही कहा आपने निशा जी ………..दिल को दहला देने वाली इस घटना के बाद भी क्या बदलेगा ,क्या नहीं ..पता नहीं ……………

    nishamittal के द्वारा
    December 30, 2012

    लेकिन साधना जी याददाश्त बहुत कमजोर है जनता की इसका प्रत्यक्ष प्रमाण आपको कल और परसों देख सकती हैं धन्यवाद बहुत दिन बाद प्रतिक्रिया के लिए


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