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कैसा मजाक ! क़ानून एक पक्षीय क्यों?

Posted On: 20 Jan, 2013 Others में

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बहुत दिनों से दहेज जैसे सामाजिक कोढ़ पर लिखने की योजना बना रही थी ,परन्तु गत दिनों एक ऐसा  अद्भुत केस  देखा सोचा पहले इसी पर विचार किया जाय…………..

बेचारे केशव जी …………बेटे की आदर्श  शादी करके भी कहीं के ना रहे.समाज सुधार की चर्चाओं में सम्मिलित होना और उनको व्यवहार में लाना उनका स्वभाव था.अस्पृश्यता,दहेज,लड़की लड़के में भेदभाव के कट्टर विरोधी थे केशव जी.मध्यमवर्गीय परिवार था उनका,अपने परिवार के पालन में उनका वेतन कम नहीं था.माता -पिता के नियम  कट्टर थे, .केशव जी को  अपने  वैवाहिक जीवन में बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ा  था ,मातापिता की पुरातन सोच और कट्टरवादिता  के चलते.बस उनकी पत्नी सुभद्रा की समझदारी के कारण उनको उन समस्याओं से मुक्ति मिलती रही.अतः अब उन्होंने निश्चय कर लिया था कि अपनी संतान को ऐसे बन्धनों में नहीं बांधेंगें.वैसे भी उदारता उनका स्वभाव था.उनके माता-पिता का देहांत हो चुका था, उनके बच्चे भी युवा हो रहे थे.बेटी रश्मि का विवाह उन्होंने उसकी रूचि के अनुसार कर दिया था और उसका  दाम्पत्य जीवन भी सुखी था.बेटा देवेश भी शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात अब अपने पांव पर खड़ा हो चुका था,नौकरी उसकी बहुत ऊंची तो नहीं हाँ अपनी और अपने परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ती कर सकता था. विवाह योग्य सभी  योग्यताएं उसमें थीं.केशव जी ने पुत्र से उसकी पसंद पूछी तो उसने पूर्णतया ये उत्तरदायित्व पिता पर ही छोड़ दिया. केशव जी का एक परिवार में काफी समय से आना जाना था.यद्यपि वो परिवार हरिजन  था और केशव जी ब्राह्मण.उदारवादी सोच के चलते उसी परिवार की बेटी नमिता उनको पुत्रवधू हेतु सर्वथा उपयुक्त जंची.नमिता सुशिक्षित और सुन्दर लड़की थी. अतः   उन्होंने अपनी इच्छा  उस परिवार के समक्ष रखी , नमिता के माता-पिता को भला क्या आपत्ति हो सकती थी अतः बच्चों की परस्पर भेंट कराने के पश्चात संबंध सुनिश्चित होगया.


केशव जी के   सगे सम्बन्धियों और रिश्तेदारों ने आपत्ति की और विवाह में सम्मिलित होने से भी मना कर दिया,परन्तु केशव जी जानते थे,कि रूढियां तोड़ने में कठिनाईयां तो आती ही हैं.आदर्श को व्यवहार में बदलते हुए विवाह की सभी तैयारियां पूर्ण की गई, और विवाह सम्पन्न हो गया.नमिता के पिता ने बारातियों की खातिरदारी अच्छी की थी ,परन्तु दहेज आदि के पक्ष में केशव जी नहीं थे. नमिता बहु बनकर उनके घर में आ गई.समाज में इस विवाह को आदर्श माना गया.
सब कुछ हंसी खुशी चल रहा था,रूठे हुए रिश्तेदारों से  भी धीरे धीरे सम्बन्ध  यथावत होने लगे थे,परन्तु कुछ दिनों से नमिता में कुछ परिवर्तन दिखाई दे रहा  था,परिवार में सब उसका ध्यान रखते थे ,परन्तु वह कुछ अनमनी रहती थी.केशव जी और उनकी पत्नी कुछ समझ नहीं पा रहे थे कि बहु के उखड़े व्यवहार का क्या कारण है,देवेश,नमिता  से भी पूछा परन्तु कोई कारण स्पष्ट नहीं हो सका.एक दिन देवेश के माध्यम से उनको पता चला कि नमिता कहीं और विवाह करना चाहती थी और उसके माता-पिता भी यह बात जानते थे,परन्तु उस लड़के के परिवार वाले नमिता को अपनी बहु बनाने के लिए तैयार नहीं थे अतः उसका विवाह देवेश से कर दिया गया. अब नमिता की पुनः उस लड़के से शायद भेंट हो गई और उसका व्यवहार देवेश औइर उसके परिवार के प्रति बदल गया.सबने उसको समझाने का प्रयास किया परन्तु नमिता कुछ मानने को तैयार नहीं हुई.अंततः नमिता अपने मायके चली गई .
केशव जी और परिवार  दुखी था,परन्तु यह सोच कर कि शायद कुछ समय पश्चात नमिता को सद्बुद्धि आ जाय और अपने मातापिता के समझाने से वो लौट आये,धैर्य  रखा उन्होंने,परन्तु वो तो आसमान से धरती पर आ गिरे जब उनको ये पता चला कि नमिता तलाक लेकर उस युवक से शादी करना चाहती है और  उनके ऊपर दहेज और एस सी एस टी अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दायर करने की तैयारी की जा रही है. जिसके अनुसार उनपर आरोप थे कि नमिता को दहेज के लिए प्रताडित किया जा रहा है, हरिजन होने के कारण उनका उत्पीडन हो रहा है,तथा अपमान किया जाता है.नमिता ने अपने पूर्व मित्र के साथ मिलकर ये योजना बनाई और उसके मातापिता ने अपनी बेटी का ही साथ देते हुए उसका साथ दिया .केशव जी पर तो मानो बिजली ही गिर गई .वकील से बात की तो उसने बताया कि यदि उनपर केस दर्ज हो गया तो जेल तो जाना ही पडेगा,जमानत भी तुरंत नहीं हो पाएगी और कोर्ट कचहरी के चक्कर  लगाने पड़ेंगें ,  उनकी बात सुनने का अवसर तो बाद में आएगा.,वकील ने उनको रास्ता  पारस्परिक सहमति के आधार पर  समझौता करने का रास्ता सुझाया.बिना किसी गलती के अपमानजनक समझौता और दस लाख रुपए का दंड !
किसी भी तरह मान्य नहीं था केशव जी और देवेश को ,परन्तु मरता  क्या न करता ,अंतत वकीलों से सलाह लेकर तथा परिचितों के  समझाने पर उनको समझौता करना पड़ा, ऋण आदि लेकर 10 लाख रुपए,आभूषण तथा अन्य सभी  सामान उनको  वापस करने पड़े.,तलाक हुआ और देवेश को तो इतना धक्का लगा कि उसने शेष जीवन विवाह न  करने का ही निश्चय कर लिया.केशव जी का समाजसुधार और रूढियां तोड़ने का स्वप्न भी चूर  चूर हो गया.
इस घटना को शेयर करने के पीछे मेरा उद्देश्य समाज-सुधार,या  दोषपूर्ण रुढियों को  तोड़ने से हतोत्साहित करना नहीं.मेरे विचार से तो उनका ये प्रयास सराहनीय था ,परन्तु मेरा उद्देश्य है,ये जानना है  कि किसी भी नियम क़ानून का इस प्रकार दुरूपयोग क्या उचित है? जेल जाने का नाम ही  किसी भी शरीफ इंसान के लिए बहुत  कष्टदायक है,तो क्या ऐसा करने से पूर्व सम्बन्धित व्यक्ति का पक्ष सुना नहीं जाना चाहिए? वैसे भी नमिता जैसे केस में उसको गलत प्रमाणित करना भी कठिन है,और वो भी एक राह के चलने वाले केशव जी जैसे परिवार के लिए.अपने स्वार्थ के लिए  यदि इसी प्रकार दुरूपयोग  बढता रहा तो समाज  में किसी सुधार की कल्पना कैसे की जा सकती है.सजा के अधिकारी तो ऐश करते हैं और निर्दोष लोग दंण्ड के भागी बनते हैं,तन मन धन सभी से.
( ये यथार्थ है , बस संबद्ध  पक्ष को असहज न अनुभव हो इसलिए नाम परिवर्तित हैं)

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125 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
April 27, 2015

सार्थक और सुन्दर आलेख के लिए बधाई स्वीकारें निशा जी

sadguruji के द्वारा
March 23, 2014

समझाने पर उनको समझौता करना पड़ा, ऋण आदि लेकर 10 लाख रुपए,आभूषण तथा अन्य सभी सामान उनको वापस करने पड़े.,तलाक हुआ और देवेश को तो इतना धक्का लगा कि उसने शेष जीवन विवाह न करने का ही निश्चय कर लिया.केशव जी का समाजसुधार और रूढियां तोड़ने का स्वप्न भी चूर चूर हो गया.आपने बहुत सही कहा है कि दहेज और एस सी एस टी अधिनियम का दुरूपयोग बदला लेने के लिए और कई बार निर्दोष को फंसकर उसे ब्लैकमैल करने के लिए हो रहा है.बहुत सार्थक और उपयोगी लेख.आपको बहुत बहुत बधाई.

ram के द्वारा
January 30, 2013

It is right; but this happened often whether they are the same caste or community or otherwise. Without consultation with both the side (Girl/Boy) or without investigation their past, the marriage should not be arranged at any way. So, it happened only carelessness.

aman kumar के द्वारा
January 30, 2013

आदरणीया निशा जी सादर अभिवादन हार्दिक बधाई | दोष कयेपलिका अदालतों और समाज सब का है !

    nishamittal के द्वारा
    January 30, 2013

    धन्यवाद अमन जी

santosh kumar के द्वारा
January 30, 2013

आदरणीया ,..सादर प्रणाम बड़ी समस्या की सार्थक प्रस्तुति और यथोचित सम्मान के लिए कृपया हार्दिक अभिनन्दन स्वीकारें ,….सादर

    nishamittal के द्वारा
    January 30, 2013

    हार्दिक धन्यवाद संतोष जी.

arunsoniuldan के द्वारा
January 29, 2013

निशा जी …..बडा ही सामयिक मुद्दा उठाया….बधाई….वाकई कानूनों का दुरपयोग एक बडी समस्या बन चुका है।इसके लिए कहीं न कहीं हमारी पक्षपातपूर्ण एवं दोगली सामाजिकता दोषी है ।…वैैसे यह सिफॆ मेरे विचार मात्र हो सकते हैं……..साथ ही सप्ताह का ब्लॉगर बनने पर हार्दिक बधाई।

    nishamittal के द्वारा
    January 30, 2013

    मान्यवर अरुण जी ,आपकी प्रथम प्रतिक्रिया हेतु आभार.साथ ही बधाई के लिए भी

Ramashish Kumar के द्वारा
January 29, 2013

निशा जी नमस्कार ,हमारे देश की यही तो कानून प्रक्रिया है जो एक तरफ़ है .महिला उत्पीडन को रोकने के लिए जो कानून बनाया गया है उस कानून का बहोत से महिला गलत उपयोग कर के न जाने केशव जी जैसे कितने परिवार को लुट कर बर्बाद कर दिया है.और उसके खिलाफ लड़ने के लिए हमारे देश में कोई कानून नहीं है .

    nishamittal के द्वारा
    January 29, 2013

    रामाशीष जी नमस्कार,सर्वप्रथम तो आभार आपके प्रथम कमेन्ट के लिए.निश्चित रूप से ये एक पक्षीय क़ानून कभी कभी पीड़ित पक्ष के लिए संकट उपस्थित करते हैं.ये पीड़ा भुक्त भोगी ही समझ सकता है

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
January 29, 2013

आदरणीया निशा जी, इस सशक्त आलेख के लिए बधाई …दोनों पक्षों पर गौर कर न्याय देना चाहिए उतावलापन और एकपक्षीय निर्णय से समस्याएं बढती हैं और हताशा ‘बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द वीक’ के लिए बहुत बहुत बधाइयां. भ्रमर ५

    nishamittal के द्वारा
    January 29, 2013

    शुक्ल जी धन्यवाद सहमती एवं बधाई के लिए

January 28, 2013

आज भारत में 34735 अँग्रेजी कानून हैं जिनको समय के पहिये के हिसाब से न तो बदला गया है और न ही उनमें संसोधन किए गए हैं। तो इन क़ानूनों का दुरुपयोग होना स्वाभाविक है ? हाल ही में जस्टिस वर्मा कमेटी की सिफ़ारिश में कहा गया है अगर कोई लड़की/ महिला कहती है की कोई लड़का/ पुरुष उसे घूर रहा है तो उसे 1-3 वर्ष का कारावास होगा। अगर ये कानून बना तो भविष्य में इसका सबसे हरिजन एक्ट कानून की तरह सबसे ज्यादा दुरुपयोग किया जाएगा।

    nishamittal के द्वारा
    January 28, 2013

    क़ानून अँधा है और रहा सहा उसको बनाया जा रहा है यह अतिवाद घातक ही सिद्ध होगा.धन्यवाद

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 28, 2013

आदरणीया निशा जी, सादर अभिवादन !…. विचारोत्तेजक रचना व बेस्ट ब्लौगर बनाए जाने पर हार्दिक बधाई !

    nishamittal के द्वारा
    January 28, 2013

    आभार आचार्य जी.

bkhandelwal के द्वारा
January 28, 2013

दहेज जैसे कानून को सब एक पक्षीय कह केर कानून की पर्ब्षा को पलट देय्त्तेय हैं यह एक लम्बी बह्सः क्युकी यह २ परिवारों की कहाँ कौन सच बोल्रह है नहीं पता चलता ,जब तक एक एक बात सही नहीं पता काहली कानून भी क्या करसकता है..इस बहश को पुरेश देश के लोग करसकते हैं,तभी न्याय मिलने का किसी अधिकार है,दोनों पक्षों की सुंनो पैर यह न हो की एक को ही तब्ब्जो२

    nishamittal के द्वारा
    January 28, 2013

    जितनी मुझको भाषा समझ आई उसके आधार आप मेरे विचार से सहमत हैं,धन्यवाद

vasudev tripathi के द्वारा
January 27, 2013

आदरणीय निशा जी, यह असंदिग्ध है कि दुरुपयोग के मामले में दहेज़ विरोधी कानून पहले स्थान पर आता है और आजकल विवाहोत्तर संबंधों के कारण इसका दुरुपयोग और भी बढ़ गया है! सम्मान के लिए हार्दिक बधाई.!

    nishamittal के द्वारा
    January 27, 2013

    धन्यवाद वासुदेव जी.

    nishamittal के द्वारा
    January 27, 2013

    आदरनीय ज्योति जी,आपकी विचारपूर्ण प्रतिक्रिया पढ़कर और आपके साथ हुए घटनाक्रम का उल्लेख करना इस मुद्दे के पक्ष में एक ज्वलंत प्रमाण है,जो लोग स्वीकार नहीं करते उनके लिए.आपकी प्रथम प्रतिक्रिया मिली सुखद लगा.परन्तु इस समस्या का हल कुछ अवश्य ही खोज जाना जरूरी है विधिवेत्ताओं के लिए.बहुत बहुत धन्यवाद

vijay के द्वारा
January 27, 2013

आदरणीय माता जी नमस्ते ,जब हम महिलायों से सम्बंधित कानूनों की बात करते है तो उसके एक पक्ष को ही सोचते है यही अभी वर्तमान समय में हो रहा है सम्यक दृष्टि से किसी भी कानून का पालन व् निर्माण न हो तो सभी कानून बेकार है | यथार्थ से जुड़ा लेख लिखने के लिए बधाई

    nishamittal के द्वारा
    January 27, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद विजय जी.क़ानून के अनुपालन के समय दोनों पक्षों पर निष्पक्ष रूप से विचार किया जाना चाहिए.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 27, 2013

आदरणीया निशा जी सादर अभिवादन हार्दिक बधाई

    nishamittal के द्वारा
    January 27, 2013

    आभार कुशवाह जी

Dr S Shankar Singh के द्वारा
January 27, 2013

आदरणीया निशा जी, ‘बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द वीक’ के लिए बहुत बहुत बधाइयां.

    nishamittal के द्वारा
    January 27, 2013

    आभार आदरनीय डाक्टर साहब

Santlal Karun के द्वारा
January 26, 2013

आदरणीया निशा जी,  ‘बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द वीक’ के लिए हार्दिक बधाई ! जातिगत-सामाजिक विसंगति पर आधारित सारगर्भित लघु कथा के लिए साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    nishamittal के द्वारा
    January 27, 2013

    आभार संतलाल जी.

Himanshu Nirbhay के द्वारा
January 26, 2013

आदरणीय निशा जी, सादर प्रणाम| बेस्ट ब्लोगर बनाने पर बधाईयाँ रही बात कानून की तो देश का क़ानून एक मजाक बन के रह गया है, एक ऐसा कानून जो की विवेकपूर्ण नहीं है … चाणक्य ने कहा है की विवाह सम्बन्ध सामान कुल मैं ही होने चाहिए….मैं रूदियों के तोड़ने के विपक्ष मैं नहीं हूँ किन्तु कुछ नियम सत्य, अटल हैं और रहेंगे… पुनश्च: मेरी हार्दिक बधाईयाँ….

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    यहाँ पर प्रश्न जाती के कारण उत्पन्न समस्या नहीं समस्या है क़ानून का अंधा होना निर्भय जी.

pragati के द्वारा
January 26, 2013

सही कहा अपने फासले कभी एक पछिया नहीं होने चाहिए दहेज़ कानून का बहुत बार दुरूपयोग होता है और जो सच मे कुरीतियों का शिकार है वो अज भी अक्सर आवाज नहीं उडा पाती

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    धन्यवाद प्रगति प्रथम प्रतिक्रिया के लिए.

tejwani girdhar के द्वारा
January 26, 2013

आपने वाजिब सवाल उठाए हैं

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    धन्यवाद तेजवानी गिरधर जी.

Dr. Kumarendra Singh Sengar के द्वारा
January 26, 2013

आपको बधाई…. आपकी लेखनी सदैव की तरह प्रभावी……….

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    धन्यवाद सिंह साहब

Rita Singh, 'Sarjana' के द्वारा
January 25, 2013

बेस्ट ऑफ़ द ब्लोगर बन्ने के लिए बधाई निशी जी

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    धन्यवाद रीता जी.

Rita Singh, 'Sarjana' के द्वारा
January 25, 2013

सही कहा निशा जी इस प्रकार एक पक्षीय सुनवाई किसी भी प्रकार से सही नहीं हो सकता l इस सप्ताह के बेस्ट ब्लोगर बन्ने के लिए बहुत-बहुत बधाई स्वीकार करे

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    आभार रीता जी.

bharodiya के द्वारा
January 25, 2013

नमस्कार निशाबहन सब कानून बराबर है, योजना के हिसाबसे ही है, आनेवाले समय के लिए है । आनेवाले समयमें कुटुम्ब प्रथा नष्ट कर दी जायेगी । कुटुंब की सबसे छोटी एकाई पति-पत्नी है । आदमी डर जाए,शादी ही ना करे ऐसे हर उपाय किए जायेंगे । जातिगत कानून भारत की जनतामें कभी एकता ना आ जाए ईसलिए ही है । केशव जी का समाजसुधार वाणीविलास ही है । दलितों को कभी सुधरने नही दिया जायेगा ।

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    भारोदिया जी ये कोई वाणी विलास नहीं, ऐसे केशव समाज में बहुत हैं जो पीड़ित हैं.आप प्रतिक्रियाओं के उदाहरण भी पढ़ें .धन्यवाद

    bharodiya के द्वारा
    January 27, 2013

    निशाबहन मैं आदर्शवाद नही देखता यथार्थ देखता हुं । हकिकत ये है की पिछडों के उत्थान की बातें सिर्फ पिछडों को भ्रममें रखने के लिए है । पिछडे अगर सुधरकर आगे आ जाते हैं तो वोटिंग की राजनीति ही खतम हो जाती है । मेहंगाई सिर्फ आर्थिक कारण से नही है, थोडे बहुत अगडे हैं उसे भी पिछडों की लाईनमें खडा करने का हथियार है । और जातिगत अगडे पिछडे का मामला देखो तो इन को तो नजदिक आने देना ही नही है । कितने भी केशव आ जाये बात बनेगी नही । अगडे पिछडे, दोनों समाजों में इतनी कडुआहट भर दी गई है, और भी भरी जायेगी की कोइ केशववाला काम करे तो तीसरा समाज बनाना पड सकता है ।

    nishamittal के द्वारा
    January 27, 2013

    भारोदिया जी आपके तर्कों से सहमत हूँ और ये भी मानती हूँ कि समाज की सोच को बदलना बहुत दुष्कर है.राजनीति की ही दें है जिससे समाज बंटा रहता है और देश का हित नहीं पूर्ण होता.मेरी शिकायत तो क़ानून द्वारा केवल एक पक्ष देखने से है.धन्यवाद v

Sonu Sharma के द्वारा
January 25, 2013

The only solution is that investigating authority should consider both the parties and addition of a misuse clause with every law followed by severe punishments according to the depth of the false case.

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    धन्यवाद सोनू जी सैद्धांतिक और व्यवहारिक पक्ष में अंतर होता है.धन्यवाद

R K KHURANA के द्वारा
January 25, 2013

प्रिय निशा जी, सप्ताह का सर्वश्रेष्ठ ब्लागर चयनित होने पर आपको मेरी और से लाख लाख बधाई ! राम कृष्ण खुराना

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    धन्यवाद आदरनीय खुराना जी.

विवेक मनचन्दा के द्वारा
January 25, 2013

निशा जी सर्वप्रथम तो आपको सप्ताह का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर बनने की हार्दिक बधाई। निश्चित रूप से आज हमारा समाज इतना विकृत हो चुका है कि अगर कोई लीक से हटकर कुछ करना भी चाहे तो उसके साथ ऐसा बर्ताव होता है कि वह आगे से सौ बार सोचता है कि मैंने क्यों ऐसा किया ।मेरे एक मित्र ने सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की मदद की थी और उसने उसी पर पैसे चुराने का आरोप मढ़ दिया था और उसे ही दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया था ।इसीलिए अब किसी की मदद करने कि हिम्मत तक नहीं होती है । विवेक मनचन्दा,लखनऊ

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    आपने बिलकुल सही कहा मनचंदा जी परन्तु ये समाज है फिर भी ऐसे ही सब चलता है,समाज निर्भर ही पारस्परिक सहयोग पर है .

yatindrapandey के द्वारा
January 25, 2013

हैलो निशा जी मैंने आप के लेख को बहुत ध्यान से पढ़ा, मै खुद जाती वाद का पूर्ण विरोधी हु पर ऐसी बातो पर हमें क्या करना चाहिए. क्या अच्छा इंसान बनाना. समाज मे फैली कुरूतियो को अपने अन्दर न लाने देना भी जुर्म है. आज एक साफ़ मन का व्यक्ति इसीलिए अच्छे काम करने से डरता है की कोई उसकी कद्र ही नहीं करेगा. मुझे छमा करे अगर मै प्रश्नात्मक हो गया हु. पर आपके लेख ने मुझे ये सोचने पर मजबूर कर दिया. बेस्ट ब्लॉग के लिए बधाई यतीन्द्र पाण्डेय

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    यतीन्द्र जी ,समाज में सभी प्रकार के लोग हैं अतः सभी प्रकार का व्यवहार अपेक्षित रहता है.भलाई करना या अपनी विचारधारा को छोड़ देना तो कायरता होगी .हाँ सावधानी आवश्यक है,अँधा विशवास करने से बचना होगा.धन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
January 25, 2013

निशाजी , सर्वप्रथम तो बेस्ट ब्लॉगरऑफ़ द वीक का सम्मान प्राप्ति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें . अति महत्त्वपूर्ण विषय पर लिखा है नमिता जैसी निम्न मानसिक सोच वाले लोगों के लिए ही क़ानून का दुरूपयोग होता है जो सर्वथा निंदनीय है और जो लोग इस समाज के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं वे निर्दोष होते हुए भी कानून के कठघरे में लाकर खड़े कर दिए जाते हैं और नाहक ही सज़ाके भागी हो जाते हैं…….. उत्कृष्ट पोस्ट के लिए बधाई

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    बधाई और प्रतिक्रिया हेतु आभार अलका जी.

Harish Bhatt के द्वारा
January 25, 2013

आदरणीय निशा जी सादर प्रणाम बेस्ट ब्लागर आफ द वीक बनने पर हार्दिक बधाई

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    धन्यवाद हरीश जी.

Manju sharma के द्वारा
January 25, 2013

निशा जी आपको बहुत बहुत बधाई कथा का शीर्षक भी अति सुंदर लेखन भी अतिमार्मिक रचना दिल से बधाई मंजू sharma

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    आपके स्नेहपूर्ण कमेन्ट के लिए आभार आदरनीय मंजू जी

vaidya surenderpal के द्वारा
January 24, 2013

आदरणीया निशा जी नमस्कार, बहुत बढ़िया आलेख और बेस्ट ब्लागर आफ द वीक बनने पर हार्दिक बधाई।

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    धन्यवाद सुरेन्द्रपाल जी.

thakursadhana के द्वारा
January 24, 2013

एक बेहतरीन रचना के साथ ही सप्ताह की विजेता के लिए बहुत -बहुत बधाई निशा जी ………

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    धन्यवाद साधना जी

D33P के द्वारा
January 24, 2013

बेस्ट ब्लॉगर के सम्मान हेतु हार्दिक बधाई निशा जी. सुंदर प्रस्तुति

    nishamittal के द्वारा
    January 24, 2013

    धन्यवाद दीप्ति जी.

omdikshit के द्वारा
January 24, 2013

आदरणीया निशा जी, ‘बेस्ट ब्लागर ‘ के लिए हार्दिक बधाई. कानून कोई भी बने ,उसका दुरूपयोग करना,कुछ लोगों की नीयत बन जाती है.अब तो’ बलात्कार’ और ‘ छेड़-छाड़’ के भी झूठे आरोप लगते हैं. दहेज़ और हरिज़न- उत्पीड़न को अब मज़ाक बना दिया गया है.बहुत अच्छी प्रस्तुति.

    nishamittal के द्वारा
    January 24, 2013

    सही कहा आपने कानूनों के दुरूपयोग के शिकार बहुत लोग हैं.धन्यवाद

Ashish Mishra के द्वारा
January 24, 2013

यह तो एक उदाहरण है….इस तरह के कानूनों के दुरपयोग का ………. आज देश में दहेज़ प्रथा, हरिजन उत्पीडन के १०० केसों में से ७० झूठे होते हैं, और लोग बिना किये जुर्म की सजा भुगतने को मजबूर होते हैं ……..काश इन कानूनों में ऐसा कोई प्रावधान बनाया जाता की सामने वाले को अपनी बात कहने का मौका मिलता ……..उसके बाद फैशला होता की किसकी गलती है . बेस्ट ब्लोगर के लिए बधाई ………….वैसे भी इस विषय को उठाने के बाद यदि आपको बेस्ट ब्लोगर न भी मिलता तो भी आप बेस्ट ब्लोगर थी. मैं ऐसे एक-दो नहीं कई लोंगो को व्यक्तिगत रूप से जनता हूँ जो इसी तरह बिना किये गुनाहों की सजा पा रहे हैं

    nishamittal के द्वारा
    January 24, 2013

    आशीष मिश्र जी आपकी सुन्दर भावनाओं के लिए आभार.हाँ सहमती हेतु भी धन्यवाद.अभियोग जिसपर लगाया गया है,उसको अवसर मिलना ही चाहिए.

vinitashukla के द्वारा
January 24, 2013

बेस्ट ब्लॉगर के सम्मान हेतु हार्दिक बधाई निशा जी.

आर.एन. शाही के द्वारा
January 24, 2013

निशा जी, सर्वप्रथम बेस्ट ब्लागर आफ़ द वीक की हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें । समाज में जब कभी भी लीक से अलग हटकर सकारात्मक कार्य करने की कोशिश होती है, तो साहसी व्यक्तियों को हतोत्साहित करने जैसे कृत्य का देखा जाना भी कोई अज़ूबा नहीं होता । कुछ लोगों द्वारा अपने मानसिक स्तर के प्रदर्शन के कारण ऐसी अप्रिय और अपमानजनक स्थितियाँ पैदा होती ही हैं, और शायद आगे भी होती रहेंगी । कोई आवश्यक नहीं कि हर प्रयास के साथ ऐसे ही हादसे होते रहें । परन्तु यह भी स्वीकार करना पड़ेगा कि सदियों से चली आ रही सामाजिक व्यवस्था और वर्गीय परम्परागत आचरण, स्वभाव आदि को बदल पाने में भी शायद अभी लम्बा वक़्त लग जाय ।

    nishamittal के द्वारा
    January 24, 2013

    श्रद्धेय शाही जी, आज बहुत दिन पश्चात आपकी प्रतिक्रिया मिलने पर बहुत सुखद अनुभव हो रहा है.आभार समय देने के लिए .अब आपकी पोस्ट की प्रतीक्षा है कृपया समय मिलते ही हमारा ज्ञानवर्धन करने की कृपा करें .धन्यवाद

    jlsingh के द्वारा
    January 24, 2013

    ‘बेस्ट ब्लॉगर’ के सम्मान हेतु हार्दिक बधाई!- यही पर दे देता हूँ! ….साथ ही शाही साहब के आशीर्वाद का मैं भी भागीदार बन सकूं और उनके कोई आलेख के लिए विनती कर सकूं, यह भी तमन्ना है ! आपके हर आलेख सशक्त तो होते ही हैं, यह सत्य कथा भी हमारे समाज का ही दर्पण है!

    आर.एन. शाही के द्वारा
    January 25, 2013

    श्रद्धेय सिंह साहब, आत्मीयता की अभिव्यक्ति हेतु हार्दिक आभार । कृपया लज्जित न करें, विगत दिनों में नेट पर बिल्कुल समय न दे पाने के कारण थोड़ी दूरी रही है, स्वीकार करता हूँ । मुझे कहीं भी आंशिक योगदान नागवार लगता है, इच्छा होती है कि हमेशा आप मित्रों के साथ वैचारिक एवं मनोविनोदपूर्ण आदान-प्रदान के बीच ही समय गुज़रे, परन्तु सांसारिक मजबूरियाँ भी तो हम सभी के साथ-साथ ही बनी रहती हैं । इस दौरान जब कभी मौका मिला, आप सभी की पोस्ट पर अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराने का प्रयत्न करता रहा हूँ । विशेषकर आपकी पोस्ट पर तो बिना लम्बा-चौड़ा भाषण दिये संतोष ही नहीं होता । समयाभाव के कारण कभी-कभी सरसरी तौर पर आलेखों का रसास्वादन करते हुए गुज़र जाना पड़ता है, बिना कोई टिप्पणी किये । क्योंकि कम से कम चार से पाँच आत्मीय जन हमेशा ही फ़ीचर लिस्ट में मौज़ूद दिखते हैं, जबकि सभी के साथ लेखनी-वार्तालाप के लिये पर्याप्त समय इस दौरान नहीं निकाल पाया । मेरी दिली ख्वाहिश है कि आप सभी के साथ पुराने दिनों में लौट पाऊँ, देखता हूँ यह तमन्ना कब तक पूरी हो पाती है । धन्यवाद !

    nishamittal के द्वारा
    January 26, 2013

    आभार आदरनीय शाही जी और प्रतीक्षा आपकी पोस्ट की

munish के द्वारा
January 24, 2013

अबला सबला सी दिखती है या हो गयी सबला अबला इस बेचारे पुरुष के सिर पर ये कैसी आई बला ये कैसी आई बला की वो सबको नफरत से देखेगा सभी नारियों को वो नमिता जैसी ही समझेगा कहे मुनीष कविराय किसी का भला न करना ये कलियुग है प्यारे, तुझको पड़ेगा पल पल मरना

    nishamittal के द्वारा
    January 24, 2013

    वाह मुनीश कविराय जी,क्या रचना है,परन्तु इन संस्कारों के जीवाणु हमारे जैसे बहुत सरे भारतीयों में हैं.धन्यवाद

rekhafbd के द्वारा
January 24, 2013

आदरणीया निशा जी ,बहुत बढ़िया पोस्ट और बेस्ट ब्लागर आफ द वीं बनने पर हार्दिक बधाई

    nishamittal के द्वारा
    January 24, 2013

    धन्यवाद रेखा जी.

yogi sarswat के द्वारा
January 24, 2013

बहुत बहुत बधाई आदरणीय निशा जी मित्तल !

    nishamittal के द्वारा
    January 24, 2013

    धन्यवाद योगी जी.

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
January 24, 2013

निशा जी .सर्व प्रथम तो बेस्ट ब्लोगर ऑफ़ द वीक बनने की बधाई स्वीकार करें,इस ब्लॉग में आपने बहुत ही आसान शब्दों में अपनी बात को जनता के समक्ष रखा है,और यथा स्थिति को समझाया है.जो हमारे देश की कानून व्यवस्था की वास्तविकता है.और कहीं न कहीं सभी त्रस्त भी हैं.इस लेख की जितनी भी तारीफ की जाय कम है.

    nishamittal के द्वारा
    January 24, 2013

    आपकी प्रशंसा हेतु आभार

TUFAIL A. SIDDEQUI के द्वारा
January 24, 2013

आदरणीया निशा जी सादर अभिवादन, सप्ताह का बेस्ट ब्लोग्गर बनाने पर हार्दिक बधाई. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

    nishamittal के द्वारा
    January 24, 2013

    सिद्दीकी जी धन्यवाद

akraktale के द्वारा
January 23, 2013

आदरेया निशा जी सादर, इस विषय पर अन्य कई मंचो पर चर्चा हो चुकी है कि क़ानून का दुरुपयोग एक बहुत ही चिंता का विषय है. दिल्ली वाली घटना के बाद भी यह बात चर्चा में आयी थी. किन्तु क़ानून की मजबूरी साक्ष्य से जुडी होती है. जब तक साक्ष्य नहीं होते तब तक बचाव मुश्किल हो जाता है.कई जगह जानकारी के अभाव में मनुष्य गुमराह होता है.क्योंकि कोई भी व्यक्ति थाने और कचहरी की सीढी नहीं चढाना चाहता. आजकल शादियों में इसलिए एहतियातन सामान दहेज कि लिस्ट बनाकर दोनों पक्षों के हस्ताक्षर ले लेने का चलन बढ़ा है.

    nishamittal के द्वारा
    January 23, 2013

    आदरनीय अशोक जी, जो व्यक्ति एक उत्तम उद्देश्य को लेकर कुछ प्रगतिशील कदम उठा रहा है तो वो जल्दी से नकारात्मक नहीं सोच सकता ,संभवतः ऐसा ही कुछ उनके साथ रहा होगा.परन्तु इससे शिक्षा लेनी चाहिए.धन्यवाद

    akraktale के द्वारा
    January 23, 2013

    बिलकुल  सही बात है सहमत हूँ मै. सादर.

    nishamittal के द्वारा
    January 24, 2013

    आभारी हूँ अशोक जी सहमती हेतु

TUFAIL A. SIDDEQUI के द्वारा
January 22, 2013

आदरणीया निशा जी सादर अभिवादन, इस पोस्ट से ये बात एक बार फिर साबित होती है की हमारे यहाँ कानून का दोहरा इस्तेमाल होता है. एक अच्छे लोगों द्वारा अच्छे और भले कामों के लिए, किसी की सुरक्षा और उसे लाभ देने के लिए और दूसरा बुरे लोगों द्वारा अपने हित साधने के लिए. हमारी सरकारें कानून तो बना रही हैं लेकिन समाज निर्माण का काम नहीं कर रही हैं. किताबों में सेक्स को खुलकर पढाये जाने की खूब वकालत की जाती है लेकिन नैतिक शिक्षा नदारद है. वर्तमान पीढ़ी को तो पता ही नहीं की नैतिक शिक्षा किस चिड़िया का नाम है. संविधान में भी समय और परिस्थिति अनुसार संशोधन हेतु प्रावधान किये गए. तो क्या कानून निर्माता और सरकार उपरोक्त समाज में घटित उदाहरणों से अनभिज्ञ हैं ? सादर. जागरूक करती पोस्ट पर बधाई. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    सिद्दीकी जी बहुत समय पश्चात आपकी विचारपूर्ण प्रतिक्रिया मिलना सुखद लगा,आपने सही कहा है,संस्कारों का लोप और नैतिकता का अभाव ही इसके मूल में है.धन्यवाद

minujha के द्वारा
January 22, 2013

आदरणीय निशा जी इसीलिए तो कानून को अंधे के साथ साथ बहरा भी कहा जाने लगा है,जो ना ही भावनात्मक पक्ष को समझने के लिए तैयार है ,ना पारदर्शिता को महत्व देने को….गहन चिंतन को मजबूर करता आलेख

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    जी हाँ मीनू जी ,जैसा कि अभी योगी जी वाली प्रतिक्रिया में लिखा है कि अब शादी विवाह जुआ बन गया है जिसमें भाग्यशाली ही सुखी है, क़ानून दोनों पक्ष क्यों नहीं सुनता धन्यवाद

    minujha के द्वारा
    January 24, 2013

    बहुत बहुत बधाई

yogi sarswat के द्वारा
January 22, 2013

नाम लेना सही नहीं रहेगा किन्तु मैं एक ऐसे परिवार को जानता हूँ जिनका हँसता खेलता परिवार ऐसे ही कानून की भेंट चढ़ गया ! पिता सेल्स टैक्स विभाग में थे और बेटा एम् टेक करने के बाद इंजीनियरिंग कॉलेज में अध्यापक हो गया था ! ५ बेटियों में अकेला भाई ! सबका प्यारा और दुलारा भी था ! दिल्ली से शादी हुई थी लड़की भी उच्च शिक्षित थी ! मैं था उस शादी में ! मैंने विदाई के समय उस लड़की के हाव भाव देखे जो अजीब लग रहे थे क्यूंकि वो अपने माता पिता के गले लगकर इतना नहीं रोई थी जितना एक मेरे लिए अनजान लड़के के गले लगकर रोई थी ! मैं समझ रहा था कोई बहुत प्यारा होगा ! मुझे दूल्हा दुल्हन के साथ उसी गाडी में बैठना था ! मैंने अजीब द्रश्य देखा ! जैसे ही गाडी चलने को हुई उस लड़के ने , उस नयी नवेली दुल्हन के गाल पर चुम्बन लिया और यही कुछ लड़की ने भी किया ! मैंने गाडी आगे बढवा दी ! घर आकर सब सो गए ! थके हुए थे ! लेकिन महिलाओं के बीच ये बात चलने लगी थी ! मैंने ज्यादा तवज्जो नहीं दी लेकिन ये जरुर पता कर लिया की वो लड़का कौन था ! वो उस लड़की का मित्र था दिल्ली से ही ! और लड़की के माँ बाप ये बात जानते थे ! रात में उस लड़के का फोन भी आया तो उस नयी नवेली दुल्हन ने मेरे मित्र से अकेले में बात करने के नाम पर मेरे मित्र को कमरे से बाहर कर दिया ! और उस रात , जिसका सबको इंतज़ार रहता है , बात बिगड़ गयी ! जैसे तैसे मामला संभला ! मेरे मित्र की माँ भी भूल गयी और जब वो लड़की पहली बार अपने मायके को जाने लगी तो मेरे मित्र की माँ ने खुश होकर करीब १० लाख के जेवर उसको पहना दिए ! वो जेवर अपने मायके में रख आई और आज ५ साल के बाद भी वापस नहीं आये ! बीच में बहुत कुछ हुआ लेकिन वो लड़की तो अपनी ससुराल में ही है किन्तु आज उसका शरीर (वो बहुत सुन्दर थी शादी के समय ) बिलकुल सूख चूका है ! मैं बस ये कहना चाहता हूँ की आज के समय में रिश्ते कायम रखना बहुत बड़ी बात हो गयी है ! जो रिश्ते संभाल पाटा है शायद वो ही खुशनसीब इंसान है !

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    योगी जी ,आपके द्वारा बताई गयी घटना से ये तो सिद्ध होता ही है कि अब शादी जुआ है जिनकी सुरक्षित है,वो किस्मत वाले ही हैं.अन्यथा अपना सब कुछ लगाकर भी मातापिता और स्वयम पीड़ित लड़का या लडकी ठगे जाते हैं .क्या होगा आने वाले समय में .धन्यवाद

    jlsingh के द्वारा
    January 24, 2013

    योगी जी, आप कहाँ नहीं होते है? यह भी बता दीजिये! साहब आपसे तो दर लगाने लगा है क्योंकि आप लगभग हर तरह की घटना के गवाह होते है! आपके निजी अनुभव और पांडित्य से बहुत कुछ किया जा सकता है …कम से कम कलम के माध्यम से बहुत कुछ !!!

deepasingh के द्वारा
January 22, 2013

आदरणीया निशा जी इसमें कोई शंका नही की कानून स्वयं की रक्षा के लिय होते हें न की इनका दुरूपयोग किया जाय स्वयं का हित साधने हेतु. दुसरे को इस प्रकार प्रताड़ित करना सवर्थानिंदनीय है.अच्छा लेख वन्देमातरम.

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    धन्यवाद दीपा जी प्रतिक्रिया हेतु

chaatak के द्वारा
January 21, 2013

निशा जी, आपकी इस पोस्ट को पढ़कर मुझे सिर्फ एक बात समझ में आ रही है कि केशव जी एक निहायत ही कमजोर और भावुक किस्म के व्यक्ति है जिन्होंने महान बनने की महत्वाकांक्षा में अपने पुत्र के जीवन के साथ खिलवाड़ किया है| जो व्यक्ति जाति-व्यवस्था को तोड़ कर इतना बड़ा फैसला ले सकता है वह अब जेल जाने की सोच कर परेशान है ये हास्यास्पद है| जब बात पुत्र के जीवन की थी तो इतना बड़ा फैसला कर लिया क्योंकि बलि का बकरा वो था अब पुत्र ने सहर्ष सब कुछ स्वीकार कर लिया है तो पिता को सामने आकर कष्ट झेलने की मिसाल भी पेश करनी चाहिए|

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    चातक जी ,आपकी विचारपूर्ण प्रतिक्रिया प्राप्त हुई,सर्वप्रथम तो ये एक वास्तविक स्थिति है,कहानी नहीं जिसमें मनोनुकूल फेरबदल किया जा सके.दूसरी बात आपने लिखा है की केशव जी कमजोर दिल के इंसान थे,सबका व्यक्तित्व भिन्न होता है,इन संदर्भों में बदनामी और जेल जाने का भय ही कुछ लोगों को ऐसे लाभ उठाने का अवसर देते हैं.धन्यवाद

shailesh001 के द्वारा
January 21, 2013

अच्छा उदाहरण दिया है आपने, कुछ और मालूम हो न हो यह जरूर ज्ञात होता है कि किसी भी महिला को मासूम समझने की भूल नहीं करनी चाहिए और अति सहानुभूति में उसे उछृंखलता की छूट नहीं देनी चाहिए… यही ऐसा देश है जहां महिलाएं तक पुरुषों का शोषण कर जाती हैं.. बिना सावधानी के अंधे होकर अधिकार बांटने से कोई लाभ नहीं होगा… परआपने अच्छा पक्ष रखा है.. धन्यवाद। 

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    शैलेश जी महिला हो या पुरुष ऐसी घृणित हरकत कोई भी कर सकता है.धन्यवाद प्रथम प्रतिक्रिया हेतु

sumandubey के द्वारा
January 21, 2013

निशा जी नमस्कार , बहुत दुःख हुआ पढ़कर केशव जी के लिए पर जबतक पुलिस सुधार और न्याय व्यवस्था को और मजबूत नही होती तब तक ये घटनाये होती रहेगी

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    सुमन जी ,नमस्कार,बहुत दिन पश्चात आपके दर्शन हुए.यहाँ पर क़ानून का दुरूपयोग हुआ है.व्यक्तिगत लाभ के लिए.धन्यवाद

meenakshi के द्वारा
January 21, 2013

निशा दी , सप्रेम अभिवादन ! आपने निश्चित ही एक अन्य महत्वपूर्ण विषय पर लिखा है . लोगों को सचेत किया है – सच में इस दुनिया में कैसे कैसे लोग है ! कौन कितनी हद तक गिर जाय ..कुछ कहा नहीं जा सकता है . जब तक सख्त क़ानून नहीं होंगे तब तक ऐसा होता रहेगा – और दूसरी बात अब शायद ‘ वैवाहिक सम्बन्ध ” बनाते समय हर कदम पर दोनों पक्ष और होने वाले वर- वधु सभी के लिए अन्य कई नए नियम – क़ानून बन जाने चाहिए और बाकायदा दोनों स्टैम्प पेपर पर अपने-२ दस्तख़त भी करें ! नियम ऐसे हो ..की कोई किसी के साथ कुछ बुरा न कर सके . मीनाक्षी श्रीवास्तव

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    बिलकुल सही मीनाक्षी जी,हमारे समाज में तो कुरीतियाँ वैसे ही पर्याप्त हैं और ऐसी घटनाओं के कारण केशव जी जैसे लोग हतोत्साहित ही होंगें धन्यवाद

seemakanwal के द्वारा
January 21, 2013

बहुत बुरा हुआ केशव जी के साथ .बहुत से लोग सीधेपन का नाजायज़ फायदा उठाते हैं .

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    हाँ सही कहा आपने सीमा जी धन्यवाद

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 21, 2013

आदरणीया निशा जी सादर अभिवादन आप इस विषय पर लिखने का सोच रही थीं और में ये सोच रहा था की शायद दहेज़ प्रथा नियंत्रित हो गयी है कहीं से दहेज़ सम्बन्धी प्रकरण नहीं आ रहा था. ये सही है की इस प्रकार के क़ानून को दुरपयोग भी खूब होता है. अंकुश की भी आवश्यकता है.

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    आदरनीय कुशवाह जी दहेज़ प्रथा आज भी विद्यमान है कुछ भी समाप्त नहीं हुआ.अभी इस विषय पर ही विचार करेंगें .धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
January 21, 2013

आदरणीया महोदया, सादर अभिवादन! मुझे भी बहुत धक्का लगा, कानून के दुरुपयोग और कन्यापक्ष की हठधर्मिता जानकर. अभीतक दहेज़ दानव का कुकृत्य महिलाओं को ही झेलना पड़ता था …आपके द्वारा वर्णित यथार्थ घटना जानकर तो यही लगा कि न्याय ब्यवस्था बहुत ही कमजोर है और आम आदमी को ही हमेशा उसकी सज्जनता की कीमत चुकानी पड़ती है.

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    किसी भी जनहितार्थ बनाये गये क़ानून का दुरूपयोग इससे अधिक और क्या हो सकता है.धन्यवाद.

bhanuprakashsharma के द्वारा
January 20, 2013

आदरणीय निशा जी, सादर। कोई भी कानून जनता के हित को लेकर ही बनता है, लेकिन उसका दुरुपयोग आम बात हो गई। जबकि ऐसे मामलों में जांच के बाद ही कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, पर होता नहीं है। ऐसे में कई बार बेकसूर ही कानून के शिकंजे में फंस जाते हैं। जैसा कि इस कहानी में देखने को मिला। यथार्थ से परिचित कराती सुंदर प्रस्तुति के लिए बधाई।   

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    धन्यवाद भानु जी सहमती हेतु

shashibhushan1959 के द्वारा
January 20, 2013

आदरणीय निशा जी, सादर ! जाति या वर्ग विशेष पर जितने भी क़ानून बने हैं, वे प्रायः उसकी तरफ उदार होते हैं ! हरिजन उत्पीडन क़ानून, दलित उत्पीडन क़ानून, दहेज़ उत्पीडन क़ानून आदि इन सब कानूनों का अधिकाँश दुरुपयोग ही होते देखा गया है ! परन्तु मेरे अपने विचार से केशव जी को किसी अच्छे वकील की सलाह से केस लड़ना चाहिए था ! उन्हें साबित करने का प्रयास करना चाहिए था कि नमिता जब तक उनके घर में रही, सुख से रही, खुश रही! दूधवाले, सब्जी वाले, अड़ोसी-पडोसी, मित्र-दोस्त, इन सब में से बहुत से इस बात के गवाह होते कि वे अचानक जब भी इस घर में आये, उन्होंने नमिता को दुखी नहीं देखा, या ऐसी कोई बात नहीं देखी ! आखिर नमिता के केवल कह भर देने से तो उन्हें सजा नहीं हो जाती ! नमिता को भी साबित करना पड़ता कि वे लोग उसे वास्तव में प्रताड़ित कर रहे थे ! एक और भी रास्ता था कि वे इस दस लाख रुपये की डील के पहले पुलिस अधिकारियों या गुप्तचर विभाग से मिलते ! इस सम्पूर्ण डील की गोपनीय वीडियोग्राफी ही अधिकारियों की जानकारी में अगर हो जाती तो वही उसके विरुद्ध एक सबूत हो जाता ! ये तो सीधे-सीधे नमिता, उसके परिवार और उसके दोस्त ने केशव जी को ब्लैकमेल किया, और केशव जी उसका विरोध न कर उससे दस लाख की डील कर लेते हैं ! यानी ब्लैकमेल होते हैं ! आदरणीय निशा जी, इस तरह के अनेक केस हैं, जो दुरुपयोग के उदाहरण हैं ! सादर !

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    शशि भूषण जी,नमस्कार ,आपने सकारात्मक उपाय बताये हैं जो अपने जाने चाहिए थे,परन्तु जहाँ तक मैं सोच सकी शरीफ व्यक्ति के लिए कोई लांछन सहना और जेल जाने की कल्पना भयावह हो सकते हैं ,मैंने भी सुना है कि केस बाड में लड़ा जाता है एक बार तो कार्यवाही हो ही जाती है.वैसे ऐसे लोगों की भी समाज में कमी नहीं जो दहेज़ के लिए प्रताड़ित करते हुए किसी लडकी का जीवन बर्बाद कर देते हैं और उनपर कोई आंच नहीं आ पाती

    rastogikb के द्वारा
    January 28, 2013

    लगता है जिन्दगी की उन रहो से होकर अभी आप गुजरे नहीं हैं। अन्यथा इसतरह की प्रतिक्रिया नहीं देते। हकीकत की दुनिया आपकी सोंच से बहुत विपरीत है। अदालत में जज खुद इस तरह के समझौते करवाते हैं।

January 20, 2013

एक यथार्थ घटना के माध्यम से वर्तमान समाज की यथार्थता , अच्छी प्रस्तुति आदरणीय निशा जी

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    धन्यवाद सुधीर सिन्हा जी.

vinitashukla के द्वारा
January 20, 2013

दहेज़- उत्पीडन का झूठा आरोप लगाकर, ससुराल- पक्ष को प्रताड़ित करना, आज के युग में बहुत देखा जा रहा है. आधुनिकता के मद में डूबी युवतियां, प्रायः असहनशीलता और अधैर्य से ग्रसित होती हैं. अपने नए परिवार के साथ ताल-मेल न बिठा पाने पर, ऐसा कदम उठा लेती हैं. विचारणीय एवं सार्थक पोस्ट हेतु बधाई एवं साधुवाद.

    nishamittal के द्वारा
    January 22, 2013

    आभार विनीता जी त्वरित प्रतिक्रिया हेतु.किसी भी क़ानून का दुरूपयोग किस प्रकार हो सकता है,इसी का उदाहरण है ये घटना


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