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विश्व गुरु बने मेरा भारत

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सिंहासन खाली करो ..................

Posted On: 17 May, 2014 Others में

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बधाई बधाई बधाई

श्री राम धारी सिंह दिनकर जी की सामयिक पंक्तियाँ

लेकिन होता भूडोल, बवंडर उठते हैं,

जनता जब कोपाकुल हो भृकुटि चढाती है;

दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

बधाई सभी को .सुन्दर ,सुखद जन आकांक्षाओं की विजय . विजय भी ऐसी वैसी नहीं , सर्वथा प्रतिकूल परिस्थितियों में जबकि विदेशी ताकतें, फूट डालो और राज करो की नीति के अनुगामी दल, बिकाऊ मीडिया , उन सबका पूरा दमखम एक ओर और दूसरी ओर अपने साथियों ,कर्मठ कार्यकर्ताओं के साथ अहर्निश सभी झंझावातों को झेलते हुए तथा निराश त्रस्त देशवासियों को उनकी समस्याओं के समाधान का विश्वास दिलाते देश के एक कोने से दूसरे कोने तक भटकते नरेंद्र मोदी.
अंततः जनता को उनकी नीतियों योजनाओं पर विश्वास जमा और ऐतिहासिक विजय मिली ,ऐसी विजय जो राजनीति के प्रकांड पंडितों के लिए अप्रत्याशित थी.स्वाधीनता प्राप्ति के पश्चात रिकार्ड के रूप में पहली गैर कांग्रेसी सरकार जो केवल अपने दम खम पर सरकार बनाने में सक्षम है.
पिछले तीस वर्षों से यही कहा जा रहा था किअब गठबंधन सरकारों का युग आ गया है,क्षेत्रीय दलों के सहयोग के बिना कोई सरकार नहीं बन सकती ,ऐसे में अपने दम पर मजबूत स्थिति में आना सचमुच महानतम उपलब्धि है ये विश्वास है जनता का, जो देश भर से (चंद राज्यों को छोड़कर) नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के प्रति व्यक्त किया गया है.

सत्ताधारी दल के छल प्रपंच ,बात बात में मोदी को फंसाने की कोशिश यदि ये कहा जाय कि सभी दलों का एक सूत्री कार्यक्रम स्वयम जीतना नहीं अपितु मोदी को रोकना था.साम्प्रदायिक आरोप, न्यायालय से क्लीन चिट मिलने पर भी गोधरा का जिन्न बार बार निकालना ,यशोदा बेन का मामला उछालना साम्प्रदायिक मुखौटा, ,हिटलर,मुसोलिनी,राक्षस,दानव और न जाने क्या क्या आरोप , एक साथ इतने सारे विषैले तीर और निशाना नरेंद्र मोदी !……….लेकिन  वो कोई आम इंसान नहीं नरेंद्र मोदी  हैं, उन्होंने अपनी  एक कुशल नेता की भांति अपनी वाणी   को संयमित रखते हुए अपने  विचार ,वायदे ,नीतियां जनता के दिलो-दिमाग तक पहुंचाई  और अल्पसंख्यक, बहुसंख्यक सबने उनपर भरोसा कर अपने मत से विरोधियों के ब्रह्मास्त्र को विफल कर बहुमत से जिताया. यही कारण है कि उत्तरप्रदेश  जैसा राज्य जहाँ सबने कमर कसी हुई थी एक ही बांधनी से ,उन सबको धता बताते हुए आद्वितीय सफलता प्राप्त की.


मोदी जी ने सही कहा है पूर्ण बहुमत से जिताने के कारण उन पर अपेक्षाओं का भार और उत्तरदायित्व बहुत अधिक है.अपेक्षाओं के इस एवरेस्ट पर विजय पाने की बहुत बड़ी चुनौती है उनके समक्ष.


भुखमरी,निर्धनता,बेरोजगारी,शिक्षा की दयनीय स्थिति (सभी स्तरों पर) कुपोषण,मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति को तरसता गरीब ,स्वास्थय की समस्याएं ,परिवहन,सडकें.आदि
.आतंकवाद देश की बहुत बड़ी समस्या ,सीमाओं का असुरक्षित होना जिसके कारण पिद्दी जैसे पडौसी भी आँख दिखाते हैं बार बार ,देश के आत्मसमान की रक्षा के साथ पडौसियों और महाशक्तियों से सम्बन्धों में सहजता,ऊर्जा संसाधन,स्वच्छ पेयजल,काश्मीर,विदेशी शरणार्थी, देश के विस्थापितों की दुर्दशा, महिलाओं की सुरक्षा और उनका सम्मान ,अल्पसंख्यकों के मन से निर्मूल भय को उखाड़ फेंकना,दलितों पिछड़ों ,आदिवासियों की मूल समस्याओं को समझ उनको दूर करना न कि उनको लोलीपोप बांटकर देश के प्रति उनके उत्तरदायित्व को समझने से वंछित रखना .आदि आदि …………….
इन सब समस्याओं के समाधान के साथ देश की  जर्जर आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाना ,स्वदेशी धन विदेशों से वापस लाना, आधार से शीर्ष तक व्याप्त भ्रष्टाचार का अंत ,अपनी स्वच्छ छवि को बनाये रखना ,सबको साथ लेकर चलना,बदले की भावना से काम न करना पर अपराधियों को न्यायिक व्यवस्था के अनुरूप कड़े से कड़े दंड की व्यवस्था .
स्वाभाविक रूप से ये समस्त कार्य अकेले नहीं किया जा सकते और न ही एक दो घंटे,या हफ्ते में.अतः पूरी मशीनरी के साथ सामंजस्य स्थापित करना ,,कर्मचारियों की कमी को दूर करना ,सभी वर्गों की समस्याएं दूर करना ………………………..

साथ ही उन विपक्षियों के वार झेलना ,अपने साथियों की अपेक्षाएं पूरी करना आदि आदि ………...
आशा ही नहीं विश्वास है होगा,होगा सब कुछ होगा ,संयम,सहयोग ,अपनापन सम्पूर्ण जनता को ही देना होगा और साथ ही अपने जन प्रतिनिधियों को भगवान बनने  से रोकना होगा अन्यथा वही पुरानी भूलें .और जनता अपने साथ विश्वासघात  कभी नहीं सहेगी .

andhera


देश की जनता के विश्वास ,शुभकामनाएं,अपेक्षाएं ,सहयोग,स्नेह सबके साथ नरेंद्र मोदी इस एवरेस्ट पर विजय प्राप्त अवश्य करेंगें अपनी बेदाग़ छवि के साथ और हमारा  देश नई ऊंचाईयों को छू सकेगा .




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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
May 27, 2014

जिस देश में आदमियों का अम्बार लगा हो , 125 करोड़ लोग जहां रहते हों , वहां अगर कोई ये कल्पना भी करे की कोई समस्या नहीं रहेगी तो ये न केवल असंभव है बल्कि किसी भी आयाम पर सटीक नहीं बैठता ! लेकिन क्यूंकि हर ज़िंदा आदमी अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए सरकार की तरफ नजर टिकाये रखता है इसलिए ये जरुरी है की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने की बात प्राथमिक हो ! मुझे लगता है नरेंद्र मोदी को जनसँख्या नियंत्रण के लिए भी सोचना ही होगा अन्यथा बहुत सी समस्याएं अपने मूल में ही बानी रहेंगी ! बधाई आपको भी आदरणीय निशा जी मित्तल !

    nishamittal के द्वारा
    May 29, 2014

    अलादीन का चिराग किसी के हाथ में नहीं लेकिन यदि व्यवस्थापक की इच्छा शक्ति प्रबल है तो योजनाबद्ध रूप से पार पाया जा सकता है समस्याओं पर

ashokkumardubey के द्वारा
May 23, 2014

“माना की अँधेरा घना है पर दिया जलाना, कहाँ मना है ?” इन चन्द शब्दों में सारा विचार, सारा कार्यकर्म छिपा है और देशवासियों को नरेंद्र भाई मोदी जी से बहुत उम्मीदें हैं, आशाएं हैं और मेरा विश्वास है जरूर अपना देश इंडिया न कहलाकर फिर से भारतवर्ष कहलायेगा, और यह विशाल जनतंत्र विश्व गुरु था! विश्व गुरु बना रहेगा . निशा जी आपसे शिकायत है पहले आप कोई ब्लॉग लिखती थीं तो मुझे जरूर पोस्ट करती थीं लेकिन पता नहीं आपकी क्या नाराजगी है आपने इतने महत्वपूर्ण पोस्ट को मुझे नहीं भेजा आशा है आपकी प्रतिक्रिया मिलेगी

    nishamittal के द्वारा
    May 23, 2014

    ओह क्षमा करिए आदरनीय दुबे जी,वैसेव तो मेरा लिखना कम ही हो पा रहा है भविष्य में ध्यान रखूंगी ,आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया हेतु आभार

harirawat के द्वारा
May 23, 2014

निशा जी नमस्कार ! काफी दिनों बाद आपके ब्लॉग में आने का सुयोग मिला, और एक खिलते हुए कमल के फूल की फैलती सुगंध में दुष्ट प्रवृति के राजनेताओं का बढ़ता हुआ रक्त चाप की धड़कन, कहियों का दिल पर बढ़ता हुआ बोझ दिलके डाक्टर से दिल का हाल जानने के लिए लाईन बंध हैं ! करारी हार फिर भी दुष्टता पर उत्तर आना कौरवों की तरह चक्र व्यूह रचना करना स्वयम उसमें फसना ! यही होता आया है इस देश में पिछले ६७ सालों से और कांग्रेस इसका भरपूर फ़ायदा उठाती रही है, लेकिन अब गए वो जमाने जब मिंया गद्दी पर बैठे बैठे फाख्ता उड़ाया करते थे ! बहुत सार्थक और विस्तृत जानकारी देने के लिए बधाई ! हरेन्द्र जागते रहो !

    nishamittal के द्वारा
    May 23, 2014

    आदरणीय रावत साहब पिछले कुछ समय से मेरी नियमितता नहीं चल रही है.कुछ विषय ऐसे होते हैं की लिखे बिना मन नहीं मानता बस ऐसा ही अवसर था.आभार आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए

chaatak के द्वारा
May 21, 2014

शेर के आने से पहले सिंहासन और संसद दोनों खाली हो चुकी थी :) आजकल बच्चो को इसी वाक्य की ट्रांसलेशन करवा रहा हूँ :डी अच्छे ब्लॉग पर हार्दिक बधाई!

    nishamittal के द्वारा
    May 22, 2014

    वाह सुयोग्य शिक्षक की पहिचान यही है आभार

sadguruji के द्वारा
May 20, 2014

बहुत अच्छा लेख.आपको बहुत बहुत बधाई.मोदी जी ने सही कहा है पूर्ण बहुमत से जिताने के कारण उन पर अपेक्षाओं का भार और उत्तरदायित्व बहुत अधिक है.अपेक्षाओं के इस एवरेस्ट पर विजय पाने की बहुत बड़ी चुनौती है उनके समक्ष.शुभकामनाएं.

    nishamittal के द्वारा
    May 22, 2014

    आभार महोदय

Madan Mohan saxena के द्वारा
May 20, 2014

बेहतरीन आलेख सुन्दर और सार्थक

    nishamittal के द्वारा
    May 22, 2014

    धन्यवाद मदनमोहन जी

sanjay kumar garg के द्वारा
May 18, 2014

सब को आशा है, मोदी जी भारतवासियों की उम्मीदों पर खरे उतरेंगें! साभार! आदरणीया निशा मित्तल जी!

    nishamittal के द्वारा
    May 22, 2014

    आभार संजय गर्ग जी

jlsingh के द्वारा
May 18, 2014

देश की जनता के विश्वास ,शुभकामनाएं,अपेक्षाएं ,सहयोग,स्नेह सबके साथ नरेंद्र मोदी इस एवरेस्ट पर विजय प्राप्त अवश्य करेंगें अपनी बेदाग़ छवि के साथ और हमारा देश नई ऊंचाईयों को छू सकेगा . इसी आशा के साथ मोदी जी और उनकी टीम को बधाई!

    nishamittal के द्वारा
    May 22, 2014

    प्रतिक्रिया के लिए आभार

Shivendra Mohan Singh के द्वारा
May 17, 2014

गहन तिमिर की घटाएं प्रतिकूल व्यवस्थाएं निगलने तो आतुर लोलुपताएं कंटकीर्ण रास्ते चहुंओर घेरे विषधर भयंकर आस्तीनें में बैठे नाग जहरीले लहराया परचम फिर भी सुहाना आशाओं का दीपक हुआ फिर प्रज्ज्वलित सुनहरे दिनों का आकांक्षित हुआ मन उगने को है फिर से वैभव का सूरज सुखी मन सुखी जन है गर्वित ये भारत

    nishamittal के द्वारा
    May 22, 2014

    जी हाँ धारा का बहाव अपने अनुकूल बनाना भी अपने आप में कोई कुशल नीति निर्माता ही कर सकता है अब अपनी राह को अपने सत्कर्मों और परिश्रम से सुगम बनायेंगें


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