nishamittal

chandravilla

विश्व गुरु बने मेरा भारत

309 Posts

13192 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2711 postid : 793279

धन्य है भारतीय नारी (करवाचौथ पर विशेष )

Posted On: 10 Oct, 2014 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

shubhkaamnayen-300x163

अचल रहे अहिवात तुम्हारा
जब लगि गंग यमुन जलधारा।

श्री रामचरित मानस की  इन सुन्दर पंक्तियों के साथ सभीको सुखद दाम्पत्य जीवन के लिए मंगलकामनाएं जिनमें माता कौशल्या सीता जी को अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद देती हैं. और विवाह के लिए प्रतीक्षारत सभी लड़के लड़कियों  के मनोरथ शीघ्र  पूर्ण होने की  कामना .


किसी विवाहित महिला को ये कहा जाना शायद  किसी गाली से कम नहीं लगता कि इसके पति ने इसको छोड़ दिया है.ये एक आम भाषा का शब्द है,और दुर्भाग्य से वैवाहिक सम्बन्धों में दरार आने का चाहे जो भी कारण रहा हो ,तिरछी नज़रें प्राय स्त्री की ओर ही उठती हैं,मानों उससे  ही कोई बहुत बड़ा अक्षम्य अपराध हुआ परिणाम स्वरूप उसका परित्याग किया गया है.क्या हो ऐसी ही परित्यक्ता कही जाने वाली पत्नी अपने उन्ही पति महोद्य के लिए करवाचौथ का व्रत रखती हो.

अभी पिछले दिनों संयोग से ऐसी ही दो महिलाओं से सम्पर्क हुआ जिनके माथे पर यही लेबल लगा था.दोनों में से एक का कसूर था उसका रूप रंग सामान्य होना ,और दूसरी का संतान न होना.आश्चर्य की बात कि सामान्य रूप रंग वाली महिला को उनके तथाकथित पतिदेव  और  उनके परिजन ही पसंद कर अपने घर सात फेरों के बंधन में बाँध कर लेकर आये थे,तथा वो एक बेटी के पिता भी  हैं. दूसरी महिला का निस्संतान रह जाने का कारण भी उनकी कोई शारीरिक विकृति नहीं अपितु कोई भयंकर एक्सीडेंट था जो पति के साथ जाते समय पति की लापरवाही वश हुआ था.

यद्यपि आर्थिक रूप से दोनों ही महिलाएं अब आत्मनिर्भर हैं,पहली किसी विद्यालय में शिक्षिका हैं , और दूसरी अपना बुटीक चलाती हैं,परन्तु दोनों ने  पुनर्विवाह नहीं किया ,जबकि दोनों के पति विवाहित जीवन व्यतीत कर रहे हैं.निस्संतान महिला के पति ने तो न्यायिक प्रक्रिया  से (जो स्वयं अधिवक्ता हैं) ने वैधानिक विवाह कर लिया है,जबकि दूसरी स्त्री के पति समाज की परवाह न  करते हुए किसी सुन्दरी के साथ रह रहे हैं.लोक लाज तो बहुत दूर की बात है उनको तो उस बेटी के भविष्य की भी चिंता नहीं जो अपनी माँ के साथ रहती है .उससे भी विडंबना कि जब इनमें से एक महिला के भूतपूर्व पति तो एक ही शहर में रहते हुए उनके हाल पूछने की औपचारिकता भी पूर्ण करने नहीं गए जब वो जिंदगी और मौत की लड़ाई अकेली लड़ रही थीं.

उपरोक्त विवरण देने का संदर्भ है कि ये दोनों  महिलाएं करवाचौथ का व्रत अपने उन्ही पतिदेव के लिए रखती हैं.एक सुहागिन पतिव्रता के रूप में इनका अपने पति के लिए व्रत रखना और पूजा करना कुछ अटपटा सा  लगा,पति भी ऐसे !जो भर्तार नहीं पत्नी के सुख और जीवन  हर्तार हों .

पर्व एवं त्यौहार सम्पूर्ण विश्व में अपनी अपनी परम्पराओं ,सामजिक या धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप मनाये जाते हैं.हमारी विलक्षण भारतभूमि में तो पर्व और उत्सवों की धूम है.त्यौहार मनाने का उद्देश्य सभी चिंताओं से मुक्त हो कर हंसी खुशी जीवन व्यतीत करना तो है ही,साथ ही सामाजिकता को प्रोत्साहन देने व अपनी भावनाएं व्यक्त करने का भी एक साधन है.केवल मात्र हिन्दू संस्कृति ही ऐसी संस्कृति है जहाँ त्यौहारों पर अपनी नहीं अपितु परिवार की मंगल कामना करते हैं.रक्षाबंधन,दशहरा व भाईदूज पर जहाँ बहिनों द्वारा भाई के मंगल की कामना की जाती है,विवाह के पश्चात करवा चौथ ,तीज तथा कुछ अन्य पर्वों पर पति की कुशलता व दीर्घ आयु के लिए ईश्वर से प्रार्थना की जाती है, और व्रत रखा जाता है, कुछ स्थानों पर अविवाहित लड़कियां भी अपने मंगेतर या भावी पति की कामना से ये व्रत करती हैं..और संकट चतुर्थी , अहोई अष्टमी तथा जीवितपुत्रिका आदि पर्वों पर माँ अपनी संतान के लिए.पूजा व व्रत आदि करती हैं..

करवाचौथ का व्रत उत्तरप्रदेश,उत्तराखंड,पंजाब,राजस्थान,गुजरात,दिल्ली ,हरियाणा व हिमाचलप्रदेश में विशेष रूप से मनाया जाता है,परंतू अब सम्पूर्ण भारत में ही नौकरी .व्यवसाय आदि के कारण अन्य प्रान्तों के लोग भी रहते हैं,और शेष दूरदर्शन व फिल्मों की मेहरबानी से देश के अन्य भागों में तथा भारत से बाहर विदेशों में रहने वाली भारतीय महिलाओं द्वारा यह व्रत किया जाता है. करवाचौथ से .एक दिन पूर्व महिलाएं मेहंदी आदि हाथों में रचाती हैं, करवा एक मिटटी का पात्र होता है,जिसमें जल भरकर रखा जाता है.और रात्रि में वही करवे वाले जल से चन्दमा को अर्घ्य दिया जाता है. .अपनी शारीरिक सामर्थ्य व परम्परा के अनुसार महिलाएं इस व्रत को निर्जल ही करती हैं ,पक्वान्न तैयार किये जाते हैं .विशेष रूप से साज-श्रृंगार कर दिन में इसकी कथा या महातम्य सुना जाता है,अपनी श्रद्धेया सास  या नन्द को पक्वान्न ,वस्त्र आदि की भेंट दी जाती है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है.रात्रि में चन्द्रदेवता के उदय होने पर दर्शन कर और पतिदेव की पूजा कर ही व्रत का पारायण किया जाता है. त्यौहार मनाने का तरीका स्थानीय परम्पराओं के अनुसार थोडा भिन्न भले ही हो सकता है, जैसे कि पंजाबी संस्कृति में , मायका या ससुराल पक्ष की ओर से सरगी के रूप में पुत्रवधू के लिए वस्त्र-आभूषण ,श्रृंगार सामग्री,चूड़ियाँ , पक्वान्न ,मेवे. फल आदि भेजे जाते हैं.सूर्योदय से पूर्व कुछ महिलाएं शगुन के रूप में कुछ खाकर मुहं भी मीठा करती हैं. दिन में एक स्थान पर एकत्रित हो कर कथा सुनती हैं और परस्पर थाली बदलती हैं,तथा रात्रि में चन्द्र दर्शन के समय चन्द्रदर्शन छलनी की आड में किया जाता है. थोडा बहुत स्थानीय प्रभाव परिलक्षित होता है,परन्तु मूलतः भावना वही है पति के लिए मंगलकामना. श्रृंगार तो महिलाएं करती ही हैं,परन्तु अब व्यवसायिकता की दौड़ में मेहंदी और ब्यूटी पार्लर्स की चांदी रहती है,विशेष पैकेजस की व्यवस्था उनके द्वारा की जाती है,यही स्थिति मेहंदी लगाने वाले लोगों की रहती है. व्रत रखना और मंगलकामना करना निश्चित रूप से अपने मन की भावना है ,परन्तु ऐसे पुरुषों के लिए भूखा रहना किस प्रकार उचित कहा जा सकता है जिनके लिए पत्नी के प्रति न भावना,न प्रेम, न अपनत्व. पत्नी पति द्वारा प्रताडित रहे .छली जाय , पति दूसरी स्त्री के साथ रह रहा हो और पत्नी उसके लिए कष्ट सह रही हो.क्या ऐसे पति इस सम्मान,त्याग ,समर्पण के अधिकारी हैं?

फिल्मों के या दूरदर्शन धारावाहिकों के प्रभाव से अब पति भी पत्नी के साथ करवाचौथ पर व्रत रखने लगे हैं. और उपहार आदि दिलाने की व्यवस्था करते हैं. अपनी पत्नी से किसी भी कारण प्रदेश स्थित पतियों को इन्टरनेट के माध्यम से त्यौहार मनाने तथा विभिन्न साईट्स वेबकेम के माध्यम से परस्पर अपनी भावनाएं व्यक्त करने का सुअवसर प्रदान करती हैं.

karva-c

अंत में  मेरा अनुरोध ,विनम्र आग्रह पुरुषवर्ग से (जो ऐसा नहीं करते ) उन भाईयों से,उन पतियों से और उन पुत्रों से जिनके लिए मंगल कामनाएं ,व्रत उपवास नारी द्वारा किये जाते हैं.,क्या उनका दायित्व नहीं कि वें भी नारी जगत के प्रति सम्पूर्ण दायित्व का निर्वाह करते हुए उनको वो मानसम्मान ,सुख. खुशी प्रदान करें जिनकी वो अधिकारी हैं.और वही व्यवहार करें जिसकी अपेक्षा वो उनसे अपने लिए करते हैं. अपनी उन बहिनों से भी जो पति के लिए व्रत तो रखती हैं परन्तु पति का अपमान करने में या अन्य किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार से चूकती नहीं.

( करवा चौथ जैसे पवित्र भावनाओं से बंधे पर्व पर मेरा एक प्रिय लेख)

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
October 13, 2014

नारी को यदि प्रेम और सम्मान मिले तो वो अपने पति के लिए अपना सर्वस्व निछावर के देती है .आपने बहुत सही बात कही है आदरणीय निशाजी इस पुरुष प्रधान समाज में विच्छेद होने पर स्त्री को ही दोषी मानते हैं ,भले ही दोष पुरुष का ही क्यों न हो ,आलेख के उपसंहार में बहुत अच्छी सीख दी है ,हार्दिक बधाई .

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
October 10, 2014

निशा जी उम्मीद से अलग आपका यह लेख गंभीर चिंतन है और कुछ जरूरी सवालों से रू-ब-रू करवाता है । ऐसे पुरूषो के संबध में महिलाओं की यह मानसिकता समझ से परे है ।

yamunapathak के द्वारा
October 10, 2014

आदरणीय निशाजी बहुत ही सही लिखा है आपने भारतीय स्त्रियां हर हाल में पुरुष की रक्षा कामना के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हैं. साभार

sadguruji के द्वारा
October 10, 2014

आदरणीया निशा मित्तल जी ! सादर अभिनन्दन ! करवाचौथ पर ये विशेष लेख बहुत अच्छा लगा ! इस विचारणीय और पठनीय रचना के सृजन के लिए आपको बहुत बहुत बधाई ! आपने इस मंच पर एक बहुत कड़वा और सत्यतापूर्ण विषय विचार के लिए प्रस्तुत किया है ! मैंने भी बहुत सी तलाकशुदा,पति के खिलाफ केस लड़ रहीं और कई सालों से पति से दूर स्त्रियों के मुंह के सुना है कि वे अब भी अपने बेवफा पति के लिए करवाचौथ का निर्जल उपवास रखती हैं ! इसे भावनात्मक लगाव कहें या फिर से मिलन होने की झूठी आस,परन्तु कुछ तो है ! भारत में विवाह स्त्री के लिए अब भी एक जुआ है ! सौभाग्य से पति अच्छा मिला तो ठीक,नहीं तो झेलो उम्रभर ! ये स्थिति धीरे धीरे बदलेगी,परन्तु अभी काफी समय लगेगा !


topic of the week



latest from jagran