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चोर से कहा चोरी करो और साह से कहा जागते रहो

Posted On: 20 Nov, 2014 Others में

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सदा की भांति एक बड़ा नाटक .गिरफ्तारी,दो मोर्चे बनना अंतत कुछ लोगों   की बलि.वस्तु स्थिति यही है एक ओर ऐसे तथाकथित स्वय्म्भुओं को पाला जाता है, अपनी स्वार्थ पूर्ति और वोट बैंक के कारण संरक्षण दिया जाता है,और जब वो सर दर्द बन जाते हैं,या पानी सर से ऊपर चला जाता है तो उनके विरुद्ध कार्यवाही करने के नाटक  होते हैं .

एक चुनौती  पर अभी विराम लगा ,रामपाल की गिरफ्तारी से ,लेकिन क्या ये क्रम रुक सकेगा ,मेरे विचार से कदापि नहीं ,कोई रामपाल या अन्य चर्चित व्यक्तित्व यूँ भगवान नहीं बनते. हमारे इतिहास ,धर्म ग्रन्थ साक्षी हैं,कि राजा ,कुलीन वर्ग सभी प्राय संतों की शरण में रहते थे,लेकिन उन संतों की परिभाषा हमारे  धर्म ग्रंथों के अनुसार ,” संत’ शब्द को ‘सत्य’ या ‘सत्’ का पर्यायवाची माना जाता है जो सात्विक, उदार, मोह-माया एवं छल-प्रपंच से दूर तथा ईश्वर भक्ति में अपना समय व्यतीत करने वाला होता है। लेकिन वैदिक साहित्य में ‘संत्’ को ‘परमात्मा’ या ‘ब्रह्मा’ का रूप कहा जाता है। इसी प्रकार का अर्थ पौराणिक साहित्य में भी मिलता है। ‘छांदोग्य उपनिषद्’ और ‘ऋग्वेद’ में कहा गया है कि संत अर्थात् ज्ञानीजन उस अद्वितीय पुरुष की अनेक रूपों में स्तुति करते हैं जो परब्रह्म है। इतना ही नहीं, गोस्वामी तुलसीदास ने ‘रामायण’ (उत्तरकांड) में इसी भाव से प्रेरित होकर संत और अनंत को एक समान माना है। यथा—जानेसु संत अनंत समाना।

परन्तु आजकल ऐसे धर्म गुरु,हर धर्म में हैं जो संतों के नाम पर कलंक हैं,और ऐसे कुत्सित विचारधारा वाले लोगों को   संत महात्मा  की पदवी से विभूषित करने के लिए    दोषी है समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग जन साधारण, (विशेष रूप से महिलायें) जो अपने पति,अपनी संतान और परिवार के अन्य लोगों की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए  आँखों पर पट्टी बाँध कर इनके  शरणागत  हैं,,अपने विवेक को गिरवी रख कर इनके काले कारनामों पर पर्दा डालते हैं,, ,अपना ,अपने परिवार का शोषणकरवाते हैं. और  इनको भगवान बनाते हैं..

आम आदमी के बाद समाज का धनाढ्य ,प्रतिष्ठित कहलाने वाला वर्ग इनको महिमा मंडित करने के लिए उत्तरदायी है,राजनैतिक लोग या सभी क्षेत्रों में अग्रणी लोग (फिल्म अभिनेता,खिलाड़ी अर्थात  ,सेलिब्रिटी ) जो धन तो इनपर लुटाते ही हैं ,साथ ही शेष वर्गों के समक्ष अपना आदर्श प्रस्तुत करते हैं, उनके चाहने वालों को  लगता है, अगर इतने बड़े लोग इनके अनुयायी हैं तो हमको भी ऐसा करना चाहिए. अपनी अतृप्त महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति,  पलों में हथेली पर सरसों उगाने के स्वप्न अर्थात  सफलता की कामना  इन सबके लिए शार्टकट की तलाश ही उनको ऐसे लोगों की शरण में जाने को प्रेरित करता है.

मीडिया का सबसे बड़ा योगदान होता है,इनको चर्चित बनाने में .हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में मीडिया से प्रभावित होता है.

बाबा,,तांत्रिक धर्म गुरु (सभी धर्मों में ) आज चर्चा का विषय रहते हैं.,हर गली ,मौहल्ले ,में इनका राज चल रहा है. एक प्रकार से ये भी माफिया हैं,अपने   क्षेत्र के .चोरी,डकैती,यौन शोषण ,हत्या ,लूट, अवैध कब्जे ,नशीली दवाओं का व्यापार,हथियारों की सप्लाई,आतकवादियों की शरण स्थली , अपहरण , शायद कोई काला कारनामा ऐसा हो जो इनके डेरों पर न चलता हो.  धनी,निर्धन,शिक्षित-अशिक्षित सभी इन स्वयम्भू महाप्रभुओं की प्रजा हैं. जब कभी किसी माध्यम से सत्य सामने आता है, तो अपने अनुयायियों की भावनाओं का दोहन करते हुए ये लोग उनको अपनी ढाल बनाकर बचने का प्रयास करते हैं,कभी कुछ सीमा तक सफल हो जाते हैं और बच निकलने में सफल हो जाते हैं,और कभी शिकंजा अधिक कसे जाने पर जाल में फंस जाते हैं.उसके बाद न्यायिक प्रक्रिया की ढिलाई के कारण इन पर मुकदमे चलते हैं.लेकिन प्राय इनका कुछ बिगड़ नहीं पाता.

इनके सुरक्षा कवच पक्ष-विपक्ष के राजनेता हैं जो वोट बैंक की खातिर या स्वयम इनसे जुड़े होने के कारण उस भूमिका का निर्वाह करते हैं,चोर से कहा चोरी करो ,और साह से कहा देखते रहिओ .यही कारण है कि इनको अपने विरुद्ध होने वाली किसी भी कार्यवाही की भनक मिल जाती है और ये लोग अपने काले कारनामों के साक्ष्य गायब करने में सफल हो जाते हैं. सबसे दुखद तथ्य तो ये है कि   इन पर दंडात्मक कार्यवाही करने में भी राजनीति चलती है,यही कारण है कि आतकवादियों को शरण देने वाले, देश विरोधी कार्यवाहियों में लिप्त ,देश तोड़ने वाले विवादास्पद बयान देने वाले धर्म गुरु सुरक्षित रहते हैं और उनका बाल भी बांका नहीं होता .

आवश्यकता है स्वयम सचेत होने,वोट बैंक की राजनीति से बाहर निकल देश,समाज के  हित की चिंता करते हुए इन सभी के विरुद्ध समान रूप से कड़ी कार्यवाही करने  की न कि व्यर्थ में कोहराम मचाने की. ऐसे रामपाल,आसाराम,इमाम,मौलवी ,पादरी अन्य धर्मगुरु  रक्त बीज की तरह जन्म लेते रहेंगें .

अंत में   रामपाल को कड़ी से  कड़ी सजा मिले परन्तु आतंकवादियों की शरण स्थली  अवैध हथियारों की सप्लाई के केंद्र   उन  मस्जिद,मदरसों ,चर्च  अन्य धार्मिक केन्द्रों आदि पर भी कार्यवाही का पैमाना एक ही होना चाहिए.

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33 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepak pande के द्वारा
December 12, 2014

Aadarniya nisha jee blogger of the week kee badhai umda likha hai deepakbijnory.jagranjunction.com/2014/12/12/%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A5%9C%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A5%9B/

Rachna Varma के द्वारा
December 10, 2014

आदरणीय निशा जी , ब्लागर आफ द वीक बनने पर बधाई तथा एक बेहद महत्त्वपूर्ण लेख जिसमे आपने वास्तव में बहुत सही बात कही है इस तरह के साधु ,सन्यासियो की बाढ़ आई हुयी है |समझ में ही नहीं आता की आखिर अपने घर -परिवार मे ही इतनी व्यस्तता होती है कि भला इन पाखंडियो के पास जाने का समय कैसे मिल जाता है लोगो को |

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
December 6, 2014

निशा जी,सदैव की भांति आपके लेखों से ढेरों जानकारियों और वास्तविकताओं का ज्ञान मिलता है.आज रामपाल और आशाराम जैसे तथा कथित संतों का उद्भव एक ओर हमारी जनता की धार्मिक कूप मंडूकता उत्तरदायी है,तो सरकारी अमले में व्याप्त भ्रष्टाचार और नेताओं की स्वार्थ भरी राजनीती भी कम जिम्मेदार नहीं है सुन्दर लेख.बधाई स्वीकार करें.

    nishamittal के द्वारा
    December 7, 2014

    हार्दिक आभार अग्रवाल साहब

alkargupta1 के द्वारा
December 6, 2014

निशाजी ,सर्व प्रथम तो आपको इस स सम्मान हेतु हार्दिक बधाई तथाकथित नाकारा संत के कारण ही ज्ञानी संत समाज की छवि धूमिल होती ही है और इसमे हमारे समाज के शिक्षित वर्ग के अन्धविश्वास का बहुत बड़ा भाग है …..उत्कृष्ट आलेख की प्रस्तुति हेतु पुनश्च बधाई

    nishamittal के द्वारा
    December 7, 2014

    हार्दिक आभार अलका जी

sudhajaiswal के द्वारा
December 5, 2014

बहुत-बहुत बधाई निशा जी

    nishamittal के द्वारा
    December 7, 2014

    सुधा धन्यवाद

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
December 5, 2014

निशा जी बधाई । यह लेख पठनीय है तथा सभी पहलूओं पर प्रकाश डालता है । अच्छा सारगर्भित लेख लिखने के लिए विशेष बधाई ।

    nishamittal के द्वारा
    December 7, 2014

    आपका आभार आदरनीय बिष्ट जी

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
December 4, 2014

बेस्ट ब्लोगर की हार्दिक बधाई आदरणीय निशाजी ,आलेख वास्तव में बहुत लोगों के ह्रदय की बात कहता है ,किसी का विश्वास तोडना बड़ा पाप है,ये हमारे देशवासियों की बद नसीबी है कि साधू -संतों पर अँधा भरोसा कर लेते है .बहुत उत्कृष्ट आलेख .

    nishamittal के द्वारा
    December 8, 2014

    आभार आदरणीया निर्मला जी सकारात्मक प्रतिक्रिया हेतु

sadguruji के द्वारा
December 4, 2014

आदरणीया निशा मित्तल जी ! सादर अभिनन्दन ! ‘बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक’ से सम्मानित होने के लिए हार्दिक बधाई ! बहुत सही चुनाव हुआ है ! आपको बहुत बहुत बधाई ! शीर्षक बदल दिए जाने से लगा की कोई नई रचना है ! इसलिए पढ़ने के लिए आपके ब्लॉग पर चला आया ! आप इस मंच की शोभा और गर्व है ! बहुतों को अच्छा लिखने और सोचने की आपसे प्रेरणा मिलती है ! उन बहुतों में से एक मैं भी हूँ ! बहुत बहुत आभार !

    jlsingh के द्वारा
    December 5, 2014

    आदरणीया निशा महोदया, सादर अभिवादन …. सर्वप्रथम बेस्ट ब्लॉगर के लिए हार्दिक बधाई और सद्गुरु जी की बातों से पूरी तरह सहमत क्योंकि इसमें है शत प्रतिशत सच्चाई!..सादर!

    nishamittal के द्वारा
    December 8, 2014

    आभारी हूँ सिंह साहब

    nishamittal के द्वारा
    December 8, 2014

    आभारी हूँ आदरणीय आपकी सुखद प्रतिक्रिया से आपके लेख सदा ही सुन्दर सकारात्मक सन्देश प्रद होते हैं.मंच पर ऐसे लेखों की सदा आवश्यकता है.धन्यवाद पुनः

Bhola nath Pal के द्वारा
November 22, 2014

आदरणीय निशा जी !विवेकसंगत लेख i कुत्षित आचरण और अराजकता के उन्मूलन हेतु दंड विधान की अनुशंषा सराहनीय है बहुत बहुत बधाई ………..

    nishamittal के द्वारा
    November 23, 2014

    आपका आभार आदरणीय पाल जी

yamunapathak के द्वारा
November 22, 2014

निशा जी यह सच में आस्चर्य चकित करने वाले बात है जब सब कुछ चल रहा होता है तब पुलिस क्या करती रहती है हाल की घटना ने मुझे बहुत झकझोर दिया है साभार

    nishamittal के द्वारा
    November 23, 2014

    यमुना जी ऐसी घटनाएँ प्राय सुनने को मिलती हैं लोगों की श्रद्धा अन्धविश्वास में जब बदलती है तो ऐसे ही लोगों में को भगवान मान बैठते हैं और परिणाम स्वरूप उनका हर प्रकार का शोषण भी उनको दीखता नहीं.साथ में प्रशासन का संरक्षण बस ……..आभार

brijeshprasad के द्वारा
November 22, 2014

इन कुरीतिओ का कारण हमारे लोकतंत्र का “शैशव” काल ही है। अबोध, अविवेकी,अपने हित के अलावा दीनदुनिया से बेखबर। जैसे नौलखा का हश्र हनुमान जी के द्वारा हुआ था। सारा खेल money and power (vote bank) का ही है। बड़ी मछली और छोटी मछली का खेल। ईश्वर हमारे लोकतंत्र को शीग्रह परिपक्व करे। ु2व

    nishamittal के द्वारा
    November 23, 2014

    धन्यवाद आपका

Shobha के द्वारा
November 21, 2014

निशा जी बहुत अच्छा लेख ऐसे लोगों वजह से अच्छे संत भी बदनाम होते है परन्तु यह संत नहीं व्यापारी हैं शोभा

    nishamittal के द्वारा
    November 23, 2014

    सही कहा आपने संत की परिभाषा दी है ग्रंथों के अनुसार उस पोस्ट में शोभा जी आभार

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
November 21, 2014

निशा जी सवा  सौ करोड़ जनता कितनी ही जागती रहे किसी न किसी मामले मैं ठगी जाती रहती है राजनीतिज्ञ ,धर्म गुरु ,व्यवसायी ,डॉक्टर ,बकील ,सरकारी ऑफिस ,नाते रिश्ते ,अड़ोसी पड़ोसी कहाँ कहाँ सतर्क रह सकते हैं यदि हरिश्चंद्र का तमगा लगा हो तो ठगा जाना निश्चित ही होता है किस किस को भ्रष्ट कहोगे | सिर्फ बद दुआएं ही देकर मन मसोश सकते हैं ओम शांति शांति जपकर ही मन शांत कर लिया जाता है 

    sadguruji के द्वारा
    November 22, 2014

    आदरणीय हरिश्चंद्र जी ! सादर अभिनन्दन ! बहुत सुन्दर और व्यंग्यमय ढंग से बहुत कटु सत्य आपने कहा है ! मुस्कुराने और सोचने पर विवश करने के लिए हार्दिक आभार !

    nishamittal के द्वारा
    November 23, 2014

    जी सही कहा आपने परन्तु श्रद्धा और अन्धविश्वास में अंतर है

    nishamittal के द्वारा
    November 23, 2014

    आभार आपका  

sudhajaiswal के द्वारा
November 21, 2014

निशा जी, पूरी तरह सहमत हूँ आपके विचार्रों से, आजकल धर्म के नाम पर ऐसे धर्मगुरु जनता की भावनाओं और धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं| हमें स्वयं जागरूक होकर इनका बहिष्कार करना होगा|

    nishamittal के द्वारा
    November 23, 2014

    धन्यवाद सुधा

sadguruji के द्वारा
November 21, 2014

आदरणीया निशा मित्तल जी ! सादर अभिनन्दन ! काफी दिनों के बाद मंच पर पुनः आपकी वैचारिक उपस्थिति हुई है ! बहुत सार्थक और विचारणीय रचना ! आपने सही कहा है कि इनके सुरक्षा कवच पक्ष-विपक्ष के राजनेता हैं जो वोट बैंक की खातिर या स्वयम इनसे जुड़े होने के कारण उस भूमिका का निर्वाह करते हैं,चोर से कहा चोरी करो ,और साह से कहा देखते रहिओ ! मंच पर इस उपयोगी और पठनीय रचना की प्रस्तुति के लिए आभार !

jlsingh के द्वारा
November 20, 2014

आवश्यकता है स्वयम सचेत होने,वोट बैंक की राजनीति से बाहर निकल देश,समाज के हित की चिंता करते हुए इन सभी के विरुद्ध समान रूप से कड़ी कार्यवाही करने की न कि व्यर्थ में कोहराम मचाने की. ऐसे रामपाल,आसाराम,इमाम,मौलवी ,पादरी अन्य धर्मगुरु रक्त बीज की तरह जन्म लेते रहेंगें . सही लिखा है आपने आदरणीया… पर हम सभी थोड़े बहुत धर्मभीरु तो हैं ही इसीका फायदा ये लोग उठाते हैं. कुछ बड़े लोगों का साथ और संरक्षण इन्हे फलने फूलने में मदद करता है…

    nishamittal के द्वारा
    November 23, 2014

    सही कहा आपने परन्तु जब हम स्वयं इनको स्वयंभू बनने का अवसर देते हैं तो दोषी हम ही हैं


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