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कृतघ्न है हम.(दुर्गा भाभी ) अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च पर (पूर्व प्रकाशित )

Posted On 5 Mar, 2016 Others में

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durga अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष

श्रद्धा नमन दुर्गा भाभी को

आज जबकि महिलायें कुछ सीमा तक स्वतंत्र हैं, उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही हैं,धरती से आकाश तक हर क्षेत्र में पुरुष के कंधे से  कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं,महिलाओं की प्रगति सुखद है,परन्तु उस काल में जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था ,देश को आज़ाद करना प्राथमिकता थी और शिक्षा अधिकांश महिलाओं के लिए नगण्य थी ऐसे समय में दुर्गा भाभी जैसी महिला का योगदान उनको पूजनीया बनाता है .

भारतीय स्वाधीनता संग्राम में महिलाओं की भागीदारी रही है,जिन्होंने तत्कालीन परिस्तिथियों से सर्वथा भिन्न अपनी अमूल्य सेवाएं समर्पित की हैं देश को स्वाधीन करने में . सभी क्रांतिकारी उनको भाभी ही पुकारते थे,परन्तु वो तो माँ थी स्नेहमयी तथा आवश्यकता पड़ने पर रणचंडी.एक आम भारतीय गृहस्थिन महिला की भांति जीवन व्यतीत करने वाली दुर्गा भाभी किस प्रकार स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय हुईं, ये ज्ञातव्य है.

तन,मन,धन,से देश के लिए समर्पित जिन क्रांतिकारियों को हम विस्मृत सा कर चुके हैं,उनमें से एक हैं दुर्गा भाभी,जिनके पति श्री भगवती चरण वोहरा थे जिनकी भारत माँ के क्रांतिकारी सपूतों भगतसिंह,अशफाक उल्लाह खान तथा चन्द्रशेखर आज़ाद,राजगुरु से बहुत घनिष्ठता थी तथा वें हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन ग्रुप से जुड़े थे. उनको देश के लिए अपने कर्तव्य की ओर प्रेरित करने वाली उनकी पत्नी थी दुर्गावती देवी . दुर्गावती ने अपने पति को तो प्रेरित किया ही स्वयं भी इस पुनीत यज्ञ में कूद पडीं. .लखनऊ स्थित उनका निवासस्थान क्रांतिकारियों का मीटिंग स्थान था,जहाँ भावी योजनायें तैयार होती थीं तथा उनमें भी सक्रियता रहती थी देशभक्त दुर्गाभाभी की.वे क्रांतिकारियों की तन,मन,धन से सहायता करती थीं. .
स्वाधीनता संग्राम में उनका सर्व महत्वपूर्ण योगदान गिना जाता है जब उन्होंने सांडर्स को मारने के बाद भगत सिंह को लाहौर से बाहर निकला ,लाहौर स्टेशन जहाँ के चप्पे चप्पे पर पुलिस थी भगतसिंह को दबोचने के लिए ,और भगत सिंह ,राजगुरु तथा आज़ाद उस पहेरेदारी को अंगूठा दिखाते हुए शान से फर्स्ट क्लास के कम्पार्टमेंट में दुर्गा भाभी के प्लान के अनुसार उन्ही के साथ कलकत्ता पहुँच गए,यहाँ वेश बदले दुर्गाभाभी भगत सिंह की पत्नी के रूप में थीं. जबकि इतिहास के अनुसार परिंदा भी अंग्रेजों की मर्जी के बिना पर नहीं मार सकता था. यह ऐतिहासिक घटना १८ दिसंबर १९२८ की है.अंग्रेजों की नाक के नीचे उनकी सत्ता को चुनौती देते हुए सारी कार्यवाही की योजना और उसको लागू करने का साहस दिखाने वाली इस वीरांगना के योगदान को कैसे भुलाया जा सकता है.अगले लगभग चार माह बम बनाने की प्रक्रिया सीखने व असेम्बली में डालने की योजना निर्माण तथा उसके क्रियान्वयन में उनकी विशिष्ठ भूमिका रही.इन सबसे बढ़कर चुनौती था,गोरों से स्वयं व अपने साथियों को बचाकर रखना.उनकी समस्त  योजनायें सफल हुईं.

८ अप्रेल १९२९ को कलकत्ता असेम्बली में बम डाल कर भगतसिंह, ने आत्मसमर्पण कर दिया और उनको फांसी की सजा मिली.तद्पश्चात दुर्गा भाभी खुल कर मैदान में आ गयीं.अब उनकी योजना थी गवर्नर हेली को मारने की .यद्यपि हेली बच गया परन्तु उसके अंगरक्षक घायल हो गए.दुर्गा भाभी ने गाँधी जी से भी अपील की तीनों को बचाने के लिए अंग्रेजों से बात करने की.उनके पति व आज़ाद ने जेल को (जिसमें भगत सिंह थे ) उड़ाने की योजना भी बनाई बम के परीक्षण के प्रयास में ही उनके पति का प्राणांत हुआ.परन्तु यह दारुण दुःख उनको उनके कर्तव्य से न डिगा सका,और उनका संघर्ष अनवरत चलता रहा.
दुर्गा भाभी को तीन साल के कठोर कारावास की सजा हुई,परन्तु अपने अन्य साथियों को प्रेरणा देने का कार्य वो करती रहीं यद्यपि उनके क्रांतिकारी साथी एक एक कर देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर रहे थे.. स्वाधीनता प्राप्ति के उपरान्त उन्होंने अपने आवास में ही निर्धन बच्चों के लिए “लखनऊ मोंटेसरी स्कूल” की स्थापना की और सक्रियता बनाये रखी. बाद में भी उन्होंने अपना आवास शहीदों पर शोध करने तथा इससे सम्बंधित अन्य कार्यों के लिए सरकार को ही दे दिया. ९२ वर्ष की अवस्था में १५ अक्टूबर१९९९ को उनका देहावसान गाज़ियाबाद में हुआ.परन्तु दुर्भाग्य हमारा कि हमारे सत्ताधारी ही उनके योगदान को भुला बैठे और यही कारण है कि आज उनका नाम भी चंद लोग ही जानते हैं.जिनके कारण हम स्वाधीन हैं आज़ाद हवा में सांस ले रहे हैं ,विकासशील और भविष्य में विकसित होने की बात करते हैं,उनका स्मरण न किया जाना ,उनके लिए किसी सत्ताधारी के द्वारा कोई प्रयास न किया जाना हमारी संवेदनहीनता व कृतघ्नता को दर्शाता है.
उन्होंने अपना नाम सार्थक किया और माँ दुर्गा की भांति अपने( देश के) शत्रुओं को धूल चटाई.उनको शत शत नमन. .

(संशोधन के साथ )

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89 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
March 14, 2016

क्रन्तिकारी और समाजसेवी दुर्गा भाभी (दुर्गावती देवी) को शत शत नमन ! उनके बारे में पहले भी मुझे पढ़ने का सौभाग्य मिला था ! आदरणीया निशा मित्तल जी, उनकी अमर स्मृति दिलाने के लिए सादर आभार ! जागरण मंच को भी धन्यवाद, जिसने उन्हें बड़े सम्मान के साथ याद किया है ! सर्वोत्तम प्रस्तुति हेतु सादर आभार !

    nishamittal के द्वारा
    March 15, 2016

    आपका हार्दिक आभार

राज कुकरेजा के द्वारा
March 14, 2016

दुर्गा भाभी के प्रति आप ने अपने विचारों की अति सुंदर अभिव्यक्ति की है.आज की परिस्थति में दुर्गा भाभी जैसी नारियां विशेष स्थान रखती हैं.आप को हार्दिक बधाई .

    nishamittal के द्वारा
    March 15, 2016

    आपका आभार समय देने के लिए

yamunapathak के द्वारा
March 13, 2016

मैं स्वयं भी दुर्गा देवी जी से अनभिज्ञ थी …बहुत ही सुन्दर ब्लॉग निशा जी आपको बहुत बहुत बधाई

    nishamittal के द्वारा
    March 15, 2016

    धन्यवाद यमुना जी

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
March 13, 2016

आदरणीया निशा जी बेस्ट ब्लॉग के लिए चुना गया और EK veerangana durga bhabhi par बहुत अच्छी जानकारी देता हुआ एक और sargarbhit aalekh . BAHUT BAHUT BADHAYI BHRAMAR 5.

    nishamittal के द्वारा
    March 15, 2016

    आपका हार्दिक आभार आदरणीय शुक्ल जी

OM DIKSHIT के द्वारा
March 12, 2016

बेस्ट ब्लॉग एवं बेस्ट प्रस्तुति की बधाई.

    nishamittal के द्वारा
    March 15, 2016

    धन्यवाद दीक्षित जी समय देने के लिए

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
March 12, 2016

गुरु गोविन्द दोउ खड़े काके लागु पाँय ,बलिहारी गुरु अपने गोविन्द दियो बताय | निशा जी   गदगद हुए एक और दुर्गा रूप को जाकर   ओम  शांति शांति

    nishamittal के द्वारा
    March 15, 2016

    आभार हरीश चन्द्र जी ,उन परिस्थितियों में इस रूप को धरना निश्चित रूप से महानतम कार्य था ,धन्यवाद आपका

jlsingh के द्वारा
March 12, 2016

आदरणीया निशा जी महोदया सादर अभिवादन! सच में अगर कहा जाय तो मैं भी दुर्गा भाभी के बारे में थोड़ा कुछ ही पढ़ा था. यहाँ, आपके ब्लॉग और उनपर प्रतिक्रिया से बहुत सारी बातों की जानकारी मिली. आपने यह बात बिलकुल सत्य लिखी है की उस समय महिलाएं न तो उतनी शिक्षित थी और नहीं उतना स्वतंत्र. इसलिए भी उनका योगदान और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है. आपने महिला दिवस के उपलक्ष्य में इसे मंच पर फिर से साझा किया यह हमलोगों के लिए लाभदायक रहा. आपका यह आलेख २०११ का है जबकि मैंने शायद २०१२ में इस मंच को ब्लॉगिंग के लिए चुना था. आपको सतहिक सम्मान की बधाई! और मेरी तरफ से अभिनंदन!

    nishamittal के द्वारा
    March 12, 2016

    धन्यवाद सिंह साहब महिला दिवस पर तीन नहान महिलाओं पर अलग अलग इन ये ब्लाग्स पोस्ट किये थे ,इस बार पुनः उन्हें श्रद्धांजली अर्पित करने के लिए ही पोस्ट किया था,शेष दो भी अवश्य करुँगी ,किसी सुअवसर पर

    nishamittal के द्वारा
    March 12, 2016

    आपका हार्दिक आभार (कृपया भविष्य में मेरी मेल पर सूचित करने का कष्ट अवश्य करें,जिससे समय पर पता चल जाय )

Ashish Shukla के द्वारा
March 10, 2016

आदरणीया एक वीरांगना का व्यक्तित्व से रूबरू कराने के लिए आपको धन्यवाद.

    nishamittal के द्वारा
    March 11, 2016

    धन्यवाद आपका

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
March 9, 2016

निशा मित्तल जी दुर्गा भाभी पर अच्छा जानकारीपूर्ण लेख  है । आप सही कहा कि बहुत से लोगों को तो यह भी मालूम नही होगा कि वह कौन थी उनका क्या योगदान रहा । बहरहाल आपने अपना फर्ज बखूबी निभाया । ऐसे बहुत से लोगों के योगदान को भुला दिया गया है ।

    nishamittal के द्वारा
    March 9, 2016

    हार्दिक आभार आदरणीय बिष्ट जी आपका

rameshagarwal के द्वारा
March 7, 2016

जय श्री राम निशाजी देश की स्वतंत्रता के लिए ऐसे बहुत भारतीय है जिनके वलिदानो को हम लोग भूल चुके मोदेजी एक किताब में ऐसे सब लोगो के संघर्ष की गाथा को वर्णित करने की दिश में प्रत्यनशील है ऐसे माहन देशवाशियो के लिए देश्वशी नतमस्तक लेकिन दुर्भाग्य देश नेहरु गांधी परिवार को ही याद कर सका.हमने शायद पढ़ा हो लेकिन याद नहीं देश्वशी बहुत कृतज्ञ है ऐसे वीर स्वतंत्रता सेनानियो पर साथ में आपका भी आभार जो आपने याद दिलाया .हम दुर्गा भाभी को उनके वलिदान के लिए नतमस्तक साधुवाद

    nishamittal के द्वारा
    March 9, 2016

    उपयोगी जानकारी देने और प्रतिक्रिया हेतु आभार आदरणीय अग्रवाल जी

Jitendra Mathur के द्वारा
March 7, 2016

मैंने दुर्गा भाभी के निधन का समाचार 16 अक्तूबर, 1999 को हिन्दी के एक समाचार-पत्र के एक छोटे से कॉलम में पढ़ा था । उसके उपरांत ही उनके बारे में पढ़ने और जानने की जिज्ञासा प्रबल हुई । हाल ही में मनोज कुमार को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है । 1965 में बनी अमर हिन्दी फ़िल्म ’शहीद’ में मनोज कुमार ने भगत सिंह का चरित्र निभाया था और निरुपा रॉय ने दुर्गा भाभी का । 2006 में बनी प्रशंसनीय फ़िल्म ’रंग दे बसंती’ में भी दुर्गा भाभी के चरित्र को उत्तम ढंग से प्रस्तुत किया गया था । महान मराठी लेखिका मृणालिनी जोशी ने भगत सिंह तथा अन्य क्रांतिकारियों की जीवन गाथा पर एक वृहत उपन्यास ‘इनक़लाब’ लिखा है जिसे लिखने के लिए वे न केवल भगत सिंह की माताजी विद्यावती देवी से बल्कि दुर्गा भाभी और सुशीला दीदी जैसी क्रांतिकारी महिलाओं से भी मिली थीं ताकि वे जो भी लिखें, वह प्रामाणिक हो । दुर्गा भाभी भारतीय नारियों के लिए ही नहीं वरन सभी देशप्रेमी स्त्री-पुरुषों के लिए सदा प्रेरणा-स्रोत बनी रहेंगी । मैंने भी अपने हिन्दी एकांकी ‘चिराग-ए-सहर’ में दुर्गा भाभी के चरित्र का उल्लेख किया है । आपने अपने इस पाँच वर्ष पुराने अत्यंत उत्कृष्ट लेख को पुनः हमारे समक्ष रखकर मुझ जैसे नए सदस्यों पर बड़ा ही उपकार किया है निशा जी । आभार एवं साधुवाद ।

    nishamittal के द्वारा
    March 9, 2016

    आभार मान्यवर जितेन्द्र जी,, आपकी प्रतिक्रिया से बहुत सारी जानकारी मिली.मृणालिनी जी को साधुवाद उन्होंने यथार्थ दिखाने के लिए भेंट की दुर्गा भाभी का निधन १९९९ में हुआ और ,जिन लोगों ने उनके चरित्र को सामने लाने का प्रयास किया वो सभी बधाई के पात्र हैं,साथ ही आप भी आपने अपनी पुस्तक में उनके विषय में लिखा है ,मैंने भी ऐसे ही महान व्यक्तित्त्वों पर कुछ लिखने का प्रयास किया है जो कुछ तो इसी साईट पर ब्लॉग के रूप में हैं कुछ ,अन्य विद्वत जनों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों में .पुनः आभार आपका

Shobha के द्वारा
March 5, 2016

प्रिय निशा जी आपके लेख बहुत दिन बाद पढ़ने को मिलते हैं परिपूर्ण होते हैं दुर्गा भाभी को हम भूल चुके हैं आपके याद दिलाने का बहुत शुक्रिया अब तक एक ही खानदान के गुणगान सुन कर थक चुके थे | “ऐतिहासिक घटना १८ दिसंबर १९२८ की है.अंग्रेजों की नाक के नीचे उनकी सत्ता को चुनौती देते हुए सारी कार्यवाही की योजना और उसको लागू करने का साहस दिखाने वाली इस वीरांगना के योगदान को कैसे भुलाया जा सकता है”.इसके बाद भगत सिह ने अपने बलिदान से पूरे भारत मैं चेतना जगा दी| याद कर मेरी आँख मैं आंसू आ गए

    nishamittal के द्वारा
    March 5, 2016

    आपकी उदारता और संवेदनशीलता को नमन शोभा जी ,ये मेरा पुराना ब्लॉग है ,अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर तीन ऐसी  अलग अलग क्षेत्रों में अप्रतिम योगदान देने महिलाओं पर पोस्ट किया था.,उनमें से एक महान विभूति दुर्गाभाभी थीं.दुर्भाग्य हमारा अब तो पाठ्यपुस्तकों में कहीं उल्लेख भी नही ऐसी विभूतियों का और यदि ऐसा कुछ पर्यास किया भी गया तो असहिष्णुता और साम्प्रदायिकता बन जाती है.

संदीप कौशिक के द्वारा
April 23, 2011

इतनी महान हस्ती की जीवन-कथा से परिचय कराने के लिए आपका आभार | आने वाली हर पीढ़ी इनकी कर्जदार रहेगी चाहे वह माने या ना माने | लेकिन इतने संघर्षों के बाद मिली इस आज़ादी की कीमत हम भूलते जा रहे है जो कि एक अत्यंत कटु-सत्य है |अपनी नैतिकता से समझौता करना किसी भी समाज के लिए बहुत ही शर्म की बात है | अंदर तक झकझोर देने वाले शीर्षक सहित इस सुंदर लेख के लिए आपको बधाई और इस मंच पर रखने के लिए पुनः धन्यवाद | :)

    nishamittal के द्वारा
    April 23, 2011

    धन्यवाद संदीप जी,आपसे परिचय थोडा देर से हुआ समय मिलने पर महान विभूतियों से सम्बद्ध आलेख भी पढ़ें.पुनः धन्यवाद.

atul lakhotia के द्वारा
March 19, 2011

एक तेजस्वी व्यक्तित्व से रूबरू कराने के लिए आपको धन्यवाद. बेहद सुंदर लेख|

    nishamittal के द्वारा
    March 19, 2011

    धन्यवाद अतुल जी आपकी प्रतिक्रिया के लिए.

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
March 8, 2011

बिलकुल दुरुस्त फ़रमाया आपने की वास्तव में कृतघ्न हैं हम… सच बताऊँ तो आज ही मुझे उनके देहावसान का दिन पता चला, नहीं तो १५ अगस्त या २६ जनवरी के विशिष्ट अंक में ही उनके बारे में पढने को मिलता था. शत शत नमन उस वीरांगना को… और आपका भी बहुत बहुत शुक्रिया परिचय करवाने का..

    nishamittal के द्वारा
    March 8, 2011

    धन्यवाद शिवेंद्र जी ,अब कभी भूले भटके ही याद आती है महान विभूतियों की

Aakash Tiwaari के द्वारा
March 7, 2011

आदरणीया निशा जी, अगर ऐसी वीरांगनाएं न होती तो हमें आज यूँ ही आजादी न मिल जाती….आज हम आजादी का महत्व नहीं जानते लेकिन ऐसे लोगों के बारे में पढ़कर बहुत कुछ समझ में आता है.. आकाश तिवारी

    nishamittal के द्वारा
    March 7, 2011

    धन्यवाद आकाश जी,आपने सही कहा इन्ही महान विभूतियों के परिश्रम का मीठा फल हमें मिला है.

ALKA GUPTA के द्वारा
March 6, 2011

निशा जी , आज इस साहसी व क्रांतिकारी वीरांगना का नाम शायद बहुत ही कम लोगों को पता हो , मंच पर इस लेख की प्रस्तुति निश्चित ही सराहनीय है इनका जीवन परिचय व स्मरण करने के लिए बहुत धन्यवाद ! इस वीरांगना को मेरा श्रद्धा से शत-शत नमन!

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    अलका जी आपको मिस कर रहे थे,प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद.

K M Mishra के द्वारा
March 5, 2011

निशा जी सादर प्रणाम । आज की पीवीआर और मैकडोनाल्ड जाने वाली पीढ़ी महात्मा गंाधी को ही याद कर लें यही बहुत है । राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में फर्क न कर सकने वालों के आगे दुर्गाभाभी का नाम लेने पर वो इसे बालाजी टेलीफिल्म का नया सीरियल समझ लेंगे । मैं हृदय से धन्यवाद करता हॅंू आपको जो हमें दुर्गाभाभी जैसी वीरांगनाओं की याद दिला रही हैं । मुझे तो भगवती चरण वोहरा का ‘बम का फलसफा’ याद आता है जिसे बहुत से लोग भगत सिंह का लिखा लेख मानते हैं । शत शत नमन करता हूं भारत मॉं की इस वीर बेटी को ।

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    मिश्र जी,नमस्कार,आपने सही कहा नयी पीढी को हमारे सेनानियों या देश के प्रतीकों का ज्ञान नहीं है,इसमें दोष हमारी शिक्षप्रनाली का भी है,और माता-पिता भी इस दोष से बच नहीं सकते,राष्ट्र्गीत्व राष्ट्रगान के अंतर को न जान्ने वाले तो आपको बहुत लोग मिलेंगें जो शिक्षित हैं.प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद.

chaatak के द्वारा
March 5, 2011

निशा जी, हम चातित्रिक पतन के एक ऐसे स्तर को लांघ चुके हैं जहाँ शर्म तो आने से रही हम अपनी बेशर्मी को भी प्रचारित करने में शर्माते नहीं| दम नहीं आवाज़ में या कान बहरे हो गए, क्यूँ हमारी बात का उनपर असर होता नहीं?

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    सही कहा चातक जी आपने काश हम सबकी आवाज़ सुन सकें,प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद.

RajniThakur के द्वारा
March 5, 2011

वास्तव में कृतघ्न हैं हम जो इस वीरांगना को उनका सम्मान और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में समुचित स्थान नहीं दिला पाए. हम सबको आदरणीय दुर्गा भाभी की जीवनी एवं योगदान का स्मरण कराने के लिए आपका बहुत आभार.

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    धन्यवाद रजनी प्रतिक्रिया के लिए.

rita30singh के द्वारा
March 5, 2011

आदरणीय निशा जी, सादर नमस्कार l हमारे स्वाधीनता संग्राम में सक्रीय एक जुझारू महिला से रूबरू कराने के लिए आपका बहुत -बहुत शुक्रिया तथा दुर्गा भाभी को मेरा भी शत-शत नमन l

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    धन्यवाद रीता जी प्रतिक्रिया के लिए.,आपकी रचना मुझको नहीं मिल पायी या अभी लिखा नहीं.

Dharmesh Tiwari के द्वारा
March 5, 2011

आदरणीया निशा जी सादर प्रणाम,एक ऐसे ब्यक्तित्व जिसने देश को स्वतंत्र कराने में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए महिलाओं के लिए एक मिशाल कायम किया के जीवन के बारे में गहराई से रूबरू कराने के लिए धन्यवाद!

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    धर्मेश जी धन्यवाद आपका प्रतिक्रिया के लिए.

Vivekinay के द्वारा
March 5, 2011

A Very Nice Article which shows power with importance of ladies for republic-ism in INDIA. A very grateful than x to you for your this great article.

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    विवेक विनय जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद.

    nishamittal के द्वारा
    March 7, 2011

    विवेक जी ,केवल गणतंत्र में ही नहीं महिलाओं का महत्त्व सदा सर्वत्र है.

vinita shukla के द्वारा
March 5, 2011

एक तेजस्वी व्यक्तित्व से रूबरू कराने के लिए आपको धन्यवाद.

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    धन्यवाद विनीता जी.

Nikhil के द्वारा
March 5, 2011

आदरणीय निशा जी, दुर्गा भाभी के चरित्र और उनकी साहस कथा से परिचय करवाने के लिए आपका आभार. आपने सच कहा है, कृतघ्न है हम. क्यूंकि अपने स्वार्थ की पूर्ति में हम इतने लिप्त हो चुके हैं की अपने इतिहास को बिसर बैठे हैं. इन्कलाब की आवाज़ को अपनी आवाज़ देने वाली इस वीरांगना पर लेख लिखने के लिए आप बधाई की पात्र हैं. जय हिंद निखिल झ a

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    निखिल जी धन्यवाद आपका सच है हमें बिना परिश्रम करे आज़ादी मिल गयी तो हम उसका मोल नहीं जानते अतः भुला दिया.

Thakur के द्वारा
March 5, 2011

निशा जी, एक वीरांगना का स्मरण और श्रध्दा सुमन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद् |

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    ठाकुर साहब आभार आपकी प्रतिक्रिया के लिए.

rajeev dubey के द्वारा
March 5, 2011

निशा जी, एक महत्त्वपूर्ण विषय पर लेख के लिए बधाई. दुर्गा भाभी का नाम सदैव अमर रहेगा… देशप्रेमी जन साधारण उन्हें नहीं भूल सकता, हाँ यह जरूर है कि क्रांतिकारियों को कई पुस्तकों में आतंकवादी लिखवाने वाली केंद्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ऐसे क्रांतिवीरों को जरूर भुला चुकी है. देश के तथाकथित नामी गिरामी इतिहासकार बिपन चंद्रा जो कि JNU में इतिहास के प्रोफ़ेसर रहे हैं और कांग्रेस सरकारों के प्रिय इतिहासकार हैं, उनकी पुस्तक – India\’s Struggle for Independence, Penguin Books, 1989, pp 247 पर भगत सिंह जैसे महान देशभक्त क्रांतिकारियों को revolutionary terrorsists जैसे शर्मनाक विशेषणों से पुकारा गया है. जनता कृतघ्न नहीं है, नेता शर्महीन हैं, सत्ता गलत लोगों के पास है… इतिहास शासक लिखवाता है, और गलत इतिहास पढ़कर नई पीढी देश पर जान न्योछावर करने वाले अमर वीरों को भूल रही है. हमें जागरूक होकर सही लोगों को नेतृत्व सौंपना होगा.

    nishamittal के द्वारा
    March 5, 2011

    आदरणीय दुबे जी, देशप्रेमी जनता ऐसी महान विभूतियों को स्मरण कर उनके सद्कार्यों से प्रेरणा ग्रहण कर सके यही उद्देश्य जानकारी प्रस्तुत करने का रहता है.दुर्गा भाभी के नाम व कृत्यों से बहुत कम लोग परिचित हैं .सरकारी प्रयासों के लिए जहाँ तक विचार करने की बात है तो ये हमारा दुर्भाग्य है कि देश के लिए अपने सुख-सुविधा,प्राण तक न्योछावर करने वालों को आतंकवादी कहा जाय.प्राचीन इतिहास को तोड़ मरोड़ कर लिखे का आरोप विदेशी इतिहासकारों पर मढने का आरोप तो सही हो सकता है,परन्तु यदि अपने देश में ऐसे कलंकित लोग हों और पुस्तकों में ये विवरण दिया जाय तथा सरकार द्वारा उसका कोई सुधार न हो तो हमारा ही दोष कहा जायेगा. हाँ इतना अवश्य है जनता भी तो उनके प्रति कृतज्ञ तभी हो सकती है जब उनसे परिचित हों.आपकी जानकारी सहित प्रतिक्रिया के लिए आभार

aftab azmat के द्वारा
March 5, 2011

निष् जी, नमस्ते…मैं आपकी बात से सहमत हूँ…हम इस कदर बेकार हो गए है की अब हमारे पास अपनी उप्लाभ्धियों पर गर्व करने का समय ही नहीं बचा…बहुत सार्थक लेख…बधाई… http://www.aftabazmat.jagranjunction.com

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    धन्यवाद आफताब जी,प्रतिक्रिया के लिए.

Rajkamal Sharma के द्वारा
March 4, 2011

आदरणीय निशा जी ….सादर अभिवादन ! हम सभी ने इतिहास की किताबो में उपर्लिखित यह सब कुछ पढ़ा है ….. आदरणीय दुर्गा जी को उनके योगदान के लिए समुचित स्थान इतिहास में मिला है ….. इसलिए आपका यह कहना मेरे गले नहीं उतरा की उनको भुला दिया गया है ….. जिसने भी उनको अपने बचपन में मन से पढ़ा ,सारी जिन्दगी उनको भुला नहीं पायेगा ….. हम अपने नेताओं से यह उम्मीद कतई नही कर सकते है की वोह आज़ादी के लिए अपना योगदान देने वाले सभी के लिए छुट्टी घोषित कर दे , या फिर समारोह करके उन सभी को याद करे ….. जो हमारे दिलो में जिंदा है + अमर है – उनके लिए किसी आडम्बर की कोई जरूरत मैं नही समझता ….. उनके पीछे रह गए परिवार को उचित सन्मान मिले , उनकी जरूरतों का ख्याल रखा जाए ….यही उनको सच्ची श्रद्धांजलि है ….. धन्यवाद

    nishamittal के द्वारा
    March 5, 2011

    राजकमल जी,आप प्रतिक्रिया में कुछ न कुछ ऐसा जरूर लिखते हैं कि मुझको पहले आपका उत्तर देना प्राय जरूरी हो जाता है.आपने कहा है कि,उनको भुलाया नहीं गया आप व्यक्तिगत रूप से न लें ,जिनको स्वाधीनता संग्राम का इतिहास थोडा बहुत पता है,उनकी बात छोडिये शेष लोग तो जानते भी नहीं कि कौन थीं वो और क्या भूमिका रही थी उनकी .एक घरेलू महिला का अपनी जान हथेली पर रखकर क्रांतिकारियों का साथ देना,क्रांतिकारी साथियों को, पति के शहीद होने पर भी तनमन धन से साथ देना किसी साधारण जीवट वाले व्यक्तित्व का काम नहीं. अवकाश घोषित करने की तो बात मै न तो कभी कहती हूँ न किसी के लिए भी अवकाश घोषित होना चाहिए.परन्तु जैसा कि आदरणीय बाजपेयीजी,ने कहा है कि प्रेरक व्यक्तित्व से प्रभावित हो कर युवा पीढी कुछ प्रेरणा ले सकती है,आपके अनुसार तो शेष क्रांतिकारियों या सेनानियों को किसी भी प्रकार से याद करना समय व धन की बर्बादी है. सच्ची श्रद्धांजली तभी हो सकती है जब महान विभूतियों से प्रेरणा लेकर उन कार्यों को समय व परिस्तिथि के अनुसार आगे बढाया जाय.

    nishamittal के द्वारा
    March 5, 2011

    आपके वाक्यों का उत्तर देने के प्रयास में धन्यवाद देना भूल गयी .धन्यवाद प्रतिक्रिया हेतु.आप प्रतिक्रियाएं पढ़कर ही देख लें कितने लोग उनके नाम व कार्यों से परिचित हैं,जबकि यहाँ तो सभी प्रबुद्ध व देश के लिए भावनाएं रखने वाले लोग हैं.

sdvajpayee के द्वारा
March 4, 2011

  हाई स्‍कूल-इंटर के दौरान क्रांतिकारी साहित्‍य ढूंढ कर पढा था। प्राय: सब विस्‍मृत सा हो गया है।आज आपके लेख ने पुन: कुछ फ्लैशबैक में पहुंचा दिया और मुझे भी श्रद्धा नमन का सुअवसर दे दिया।  दर अस्‍ल हम अपने देश के क्रंतिकारियों को सर माथे बैठाये रख कर देश प्रेमी चरित्रवान युवा तैयार कर सकते हैं। इन्‍हीं क्रांतिकारियों की बदौलत ही हम आज खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं। इन क्रांतिकारियों के सामने घर-परिवार या निजी महत्‍वाकांक्षायें सब अर्थहीन थे। केवल एक लक्ष्‍य, एक उद्देश्‍य था भारत की स्‍वतंत्रता। उसके खोये सम्‍मान-गौरव की बहाली। और, इसके लिए वे सर में कफन बांध कर घूमते थे। इनमें शहीद ए आजम सरदार भगत सिंह जैसे उच्‍च शिक्षित थे तो उनके नेता अमर शहीद चंद्र शेखर आजाद जैसे मात्र मिडिल पढे। संभवत: दुर्गा भाभी का दाम्‍पत्‍य जीवन दीर्घजीवी नहीं था। शादी के तीसरे दिन ही राजगुरू, समेत तीन चार क्रांतिकारियों के साथ परीक्षण को ले जा रहे बम के नाव में फट जाने से दुर्गा भाभी के पति शहीद हो गए थे। इस हादसे से विचलित हुए बगैर दुर्गा भाभी क्रांति की मशाल प्रज्‍ज्‍वलित किये रहीं। उन्‍हों ने कई बार अपने बुद्धि चातुर्य और अदम्‍य साहस से अंग्रेजों को गच्‍चा दिया था और क्रांतिकारियों को पकडे जाने से बचाया था। शहीद ए आजम को सुरक्षित निकालने में वह उनकी सद्य: विवाहिता पत्‍नी बनीं थीं और शादी के नये जोडे में दिल्‍ली से कलकत्‍ता का सफर पूरा किया था। बताते हैं कि उनके दोनों पैरों में पिस्‍तौलें बंधी हुई थीं। क्रांतिकारी रह यशपाल जी ने भी काफी क्रांति-साहित्‍य लिखा है। दुर्गा भाभी यथा नाम तथा गुणा थीं।

    nishamittal के द्वारा
    March 5, 2011

    आदरणीय बाजपेयी जी,मेरे द्वारा पूर्व में तो कभी उनके संदर्भ में नहीं पढ़ा गया परन्तु कुछ एक लेखों में उनका नाम पढ़ा है.उनके विषय में पढने का प्रयास किया तो यही उल्लेख मिला कि उनके पति का देहावसान बमविस्फोट के दौरान हुआ,और ये घटना उनके विवाह के कुछ समय बाद की है,क्योंकि कलकत्ता प्रवास के समय ये सभी क्रांतिकारी साथ थे. हो सकता है मै गलती पर हूँ परन्तु मै प्रयास करूंगी कि और जानकारी प्राप्त कर यथा संभव सही जानकारी मंच पर प्रस्तुत कर सकूं. पैर में पिस्तौल बांधकर यात्रा करने का कार्य तो एक घरेलू महिला के अदम्य साहस का ही परिचायक है.जैसा कि आपने कहा है कि वो सब लोग ऐसा इसलिए कर सके कि उस समय उनके दिलों में केवल एक ही भावना थी ,एक ही लक्ष्य था.आज की युवा पीढी ऐसे वीरों से कुछ प्रेरणा ग्रहण कर सके ,ऐसे प्रयास किये जाने चाहियें. आपके द्वारा जानकारी सहित प्रतिक्रिया देने के लिए आभारी हूँ.

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
March 4, 2011

आपको एक ऐसी महान विभूति जिनके अविस्मरणीय योगदान से बहुत सारे लोग अनजान हैं, के योगदान की पावन गाथा मंच पर रखने के लिए आपका आभार

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    धन्यवाद शैलेश जी.प्रतिक्रिया के लिए.

shuklabhramar5 के द्वारा
March 4, 2011

निशा जी दुर्लभ – काल के गर्त में छिपे,राजगुरु और भगत सिंह के समय की क्रांति से जुडी दुर्गा -भाभी -एक हीरे को सामने ला के बहुत ही बड़ा योगदान दिया आपने और एक अनूठा कार्य ..सराहनीय लेख लिखा -बहुत से लोग जिनका शायद नाम भी नहीं सुने होंगे ..बहुत खूब -आप की लेखनी में ओज -तेज भरा है ..बधाई हो शुक्लाभ्रमर५

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    शुक्ल जी आपकी प्रतिक्रिया व लेख पसंद करने के लिए धन्यवाद.

allrounder के द्वारा
March 4, 2011

निशाजी नमस्कार एक दुर्लभ व्यक्तित्व से परिचय कराने के लिए हार्दिक आभार !

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    धन्यवाद सचिन जी अब आपकी बारी है जिताने की.

NIKHIL PANDEY के द्वारा
March 4, 2011

निशा जी अभिवादन.. दुर्गा भाभी के विषय में थोडा बहुत हमने सुना था.. ..आपने यहाँ लेख के माध्यम से उनके चरित्र को रखकर बहुत महत्वपूर्ण कार्य किया है.. ऐसे व्यक्तित्व ही हमारे देश को विशिष्ट बनाते है.. ऐसे चरित्रों को हमारा नमन.. और उन्हें सामने लेन के लिए आप बधाई की पात्र है.. शुभकामनाये..

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    धन्यवाद निखिल जी ऐसे ही व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ा जा सकता है.

आर.एन. शाही के द्वारा
March 4, 2011

रणचण्डी स्वरूपा दुर्गा भाभी की बहादुरी और कृत्य के विषय में मैं नहीं जानता था । ऐसी वीरांगना के विषय में सविस्तार जानकारियां प्रदान करने के लिये आभार निशा जी ।

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    आदरनीय शाही जी,आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार.

Ramesh bajpai के द्वारा
March 4, 2011

परन्तु दुर्भाग्य हमारा कि हमारे सत्ताधारी ही उनके योगदान को भुला बैठे और यही कारण है कि आज उनका नाम भी चंद लोग ही जानते हैं.जिनके कारण हम स्वाधीन हैं आज़ाद हवा में सांस ले रहे हैं ,विकासशील और भविष्य में विकसित होने की बात करते हैं,उनका स्मरण न किया जाना ,उनके लिए किसी सत्ताधारी के द्वारा कोई प्रयास न किया जाना हमारी संवेदनहीनता व कृतघ्नता को दर्शाता है. आदरणीया निशाजी ये सत्ताधारी तो बस राजनीती की रोटिय हीसेक रहे है | पर आप और हम मिल कर इन महान लोगो के बलिदान को सबसे परिचित तो करवा ही सकते है | बधाई

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    आदरनीय बाजपेयीजी,आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार.

sanjay kumar tiwari के द्वारा
March 4, 2011

ek anjani vibhuti se parichay karane ka dhayavad….. sader naman karte hai

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    तिवारी जी सादर अभिवादन धन्यवाद प्रतिक्रिया हेतु.

March 4, 2011

आदरणीय निशा जी प्रणाम, क्रांतिकारियों की कहानियाँ पढ़ते हुए दुर्गाभाभी के बारे में भी पढ़ा था और उनका स्वतंत्रता आन्दोलन में उनका महती योगदान था. ऐसी महान वीरांगना को स्मरण करके गर्व का अनुभव होता है. दुर्गा भाभी को मेरी और से भी शत शत नमन.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 5, 2011

    आदरणीया निशा जी, तवारीख़ के पन्नों में गुम एक महान हस्ती का पुनः स्मरण कराने के लिए हार्दिक धन्यवाद| दुर्गा भाभी जैसे अनेक और देश के सच्चे भक्त आज भी अनजाने हैं …दुर्गा भाभी के साथ-साथ उन हज़ारों देशभक्तों को भी दिल से सलाम जिन्होंने जंगे आज़ादी में ख़ुशी से अपने प्राणों की आहुति दे दी|

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    राजेन्द्र जी आपकी प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद.

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    वाहिद जी धन्यवाद आ[पका प्रतिक्रिया हेतु,

rahulpriyadarshi के द्वारा
March 4, 2011

दुर्गा भाभी की याद दिलाते हुए आपने यह जो आलेख लिखा है,उसे पढ़कर बहुत अच्छा लगा,भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भागीदारी निश्चित रूप से उल्लेखनीय है,उनके योगदान को कम करके आंकना वीरांगनाओं का अपमान होगा,भारतवर्ष धन्य है जहां ऐसी माताएं,बहनें हुयी है,लेख लिखने के लिए आपको सादर धन्यवाद.

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    राहुल जी आपने लेख पढ़ा पसंद आया प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद.

rachna varma के द्वारा
March 4, 2011

निशा जी नमस्कार , बहुत दूर की कौड़ी लायी है आप तो आज के दौर में जरुरी है की लोग सिर्फ बालीवुड और हालीवुड की चमकती नायिकाओ की जीवनी ही न खंगाले वरन देश की वीरनायिकाओ के बारे में भी जाने जिनके त्याग से ही देश को आजादी मिली एक बेहतरीन आलेख से रूबरू करने का शुक्रिया !

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    आपने सही कहा रचना जी आज मीडिया देता है चटपटी मसालेदार खबरें चाहे फेशन जगत की हो या फिल्मों की ऐसे व्यक्तित्वों पर लिखने से क्या मिलेगा उनको.

दीपक पाण्डेय के द्वारा
March 4, 2011

निशा दीदी प्रणाम , एक वीरांगना के जीवनगाथा से परिचय कराने के लिए आपका आभार. वैसे आपका कृतघ्न कहना जायज़ है क्युकी मैंने नाम तो सुना था पर इनके बारे में विशेष जानकारी नहीं थी. रंग दे बसंती फिल्म में शायद उनका चित्रांकन किया गया था.

    nishamittal के द्वारा
    March 6, 2011

    दीपक भाई प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद.

    nishamittal के द्वारा
    March 7, 2011

    रंग दे बसंती में दुर्गा भाभी का उल्लेख है ये मैं नहीं जानती क्योंकि मैं देख नहीं सकी यह फिल्म .उसके निर्माता को धन्यवाद की उन्होंने ऐसा अच्छा कार्य किया.


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